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T20 World Cup: ICC पर भेदभाव करने का आरोप लगाने वाले नासिर हुसैन को श्रीकांत ने भी लताड़ा, 2003 की याद दिलाई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 12 Feb 2026 12:35 PM IST
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सार
नासिर हुसैन के आईसीसी पर भेदभाव के आरोप के बाद क्रिस श्रीकांत ने 2003 विश्व कप का हवाला देकर पलटवार किया। उन्होंने दोहरे मापदंड पर सवाल उठाए, भारत के प्रभाव को स्वाभाविक बताया और पाकिस्तान के खेलने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि खेल राजनीति से ऊपर रहना चाहिए।
नासिर हुसैन और श्रीकांत
- फोटो : Twitter/ANI
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विस्तार
पाकिस्तान के टी20 विश्व कप 2026 से जुड़े विवाद पर इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन की विवादित टिप्पणी के बाद भारतीय क्रिकेट के पूर्व सलामी बल्लेबाज क्रिस श्रीकांत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। श्रीकांत ने नासिर को साल 2003 की याद दिलाते हुए कहा कि जब उनकी टीम को फायदा मिला था, तब उन्हें भेदभाव का क्यों नहीं याद आया था। नासिर ने बहिष्कार विवाद पर पाकिस्तान और बांग्लादेश का समर्थन किया था और कहा था कि ये अच्छा है। साथ ही नासिर ने भारत को भी इस मामले में घसीटा था और कहा था कि जो डिमांड बांग्लादेश ने किया, अगर वही बीसीसीआई करता तो क्या आईसीसी का फैसला वही होता जो अभी दिया।
श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, '2003 विश्व कप के दौरान नासिर हुसैन इंग्लैंड के कप्तान थे। इंग्लैंड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जिम्बाब्वे और केन्या जाने से इनकार कर दिया था। उस फैसले के चलते इंग्लैंड को टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा और केन्या क्वार्टर फाइनल में पहुंच गया। उस समय इंग्लैंड ने अपने फैसले लिए थे। अब वे सवाल क्यों उठा रहे हैं? आपका एक नियम है और हमारा एक नियम, ऐसा नहीं चल सकता।'
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श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, '2003 विश्व कप के दौरान नासिर हुसैन इंग्लैंड के कप्तान थे। इंग्लैंड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जिम्बाब्वे और केन्या जाने से इनकार कर दिया था। उस फैसले के चलते इंग्लैंड को टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा और केन्या क्वार्टर फाइनल में पहुंच गया। उस समय इंग्लैंड ने अपने फैसले लिए थे। अब वे सवाल क्यों उठा रहे हैं? आपका एक नियम है और हमारा एक नियम, ऐसा नहीं चल सकता।'
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श्रीकांत का पाकिस्तान पर बयान
उन्होंने यह भी कहा कि आईसीसी की आय का बड़ा हिस्सा भारतीय दर्शकों से आता है, इसलिए भारत को कुछ मामलों में प्रभावशाली माना जाता है। हर दौर में किसी न किसी टीम का प्रभाव रहता है। उस समय इंग्लैंड का दबदबा था, आज भारत का है। श्रीकांत ने पाकिस्तान के भारत के साथ खेलने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'मुझे खुशी है कि पाकिस्तान खेलने के लिए तैयार हो गया है। यह विश्व क्रिकेट के लिए बेहद जरूरी है। भारत-पाकिस्तान मुकाबला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि करोड़ों दर्शकों की भावनाओं से जुड़ा होता है।' उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान मैच नहीं खेलता तो उसे सबसे अधिक नुकसान होता। ऐसे फैसलों से किसी एक देश को अलग-थलग पड़ने का खतरा रहता है, इसलिए खेल को राजनीति से ऊपर रखना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आईसीसी की आय का बड़ा हिस्सा भारतीय दर्शकों से आता है, इसलिए भारत को कुछ मामलों में प्रभावशाली माना जाता है। हर दौर में किसी न किसी टीम का प्रभाव रहता है। उस समय इंग्लैंड का दबदबा था, आज भारत का है। श्रीकांत ने पाकिस्तान के भारत के साथ खेलने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'मुझे खुशी है कि पाकिस्तान खेलने के लिए तैयार हो गया है। यह विश्व क्रिकेट के लिए बेहद जरूरी है। भारत-पाकिस्तान मुकाबला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि करोड़ों दर्शकों की भावनाओं से जुड़ा होता है।' उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान मैच नहीं खेलता तो उसे सबसे अधिक नुकसान होता। ऐसे फैसलों से किसी एक देश को अलग-थलग पड़ने का खतरा रहता है, इसलिए खेल को राजनीति से ऊपर रखना जरूरी है।
नासिर हुसैन और बाबर आजम
- फोटो : ANI
क्या बोले थे नासिर हुसैन?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश के टूर्नामेंट से हटने के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ ग्रुप-स्टेज मैच का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी थी। हालांकि, बाद में पाकिस्तान सरकार ने अपना रुख बदलते हुए टीम को खेलने की अनुमति दे दी। नासिर हुसैन ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए स्काई स्पोर्ट्स पॉडकास्ट में सवाल उठाया था कि क्या आईसीसी सभी टीमों के साथ एक जैसा व्यवहार करता है? उन्होंने कहा, 'अगर भारत किसी टूर्नामेंट से एक महीने पहले कह देता कि हमारी सरकार हमें किसी देश में खेलने नहीं देगी, तो क्या आईसीसी उतना ही सख्त रहता? हर कोई सिर्फ एक चीज चाहता है, समानता।' नासिर ने यह भी जोड़ा कि भारत के पास पैसा है, ताकत है, लेकिन ताकत के साथ जिम्मेदारी भी आती है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश के टूर्नामेंट से हटने के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ ग्रुप-स्टेज मैच का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी थी। हालांकि, बाद में पाकिस्तान सरकार ने अपना रुख बदलते हुए टीम को खेलने की अनुमति दे दी। नासिर हुसैन ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए स्काई स्पोर्ट्स पॉडकास्ट में सवाल उठाया था कि क्या आईसीसी सभी टीमों के साथ एक जैसा व्यवहार करता है? उन्होंने कहा, 'अगर भारत किसी टूर्नामेंट से एक महीने पहले कह देता कि हमारी सरकार हमें किसी देश में खेलने नहीं देगी, तो क्या आईसीसी उतना ही सख्त रहता? हर कोई सिर्फ एक चीज चाहता है, समानता।' नासिर ने यह भी जोड़ा कि भारत के पास पैसा है, ताकत है, लेकिन ताकत के साथ जिम्मेदारी भी आती है।
सुनील गावस्कर का पलटवार
सुनील गावस्कर ने इस टिप्पणी का सीधा नाम लिए बिना जवाब दिया। उन्होंने लिखा, 'कुछ लोग, खासकर पुरानी ताकतें, यह पचा नहीं पा रही हैं कि अब विश्व क्रिकेट का पावर सेंटर भारत है।' उन्होंने कहा कि सवाल पूछने वाले यह भूल जाते हैं कि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत ने पाकिस्तान जाने से काफी पहले ही मना कर दिया था। तब तक शेड्यूल भी जारी नहीं किया गया था और इसके बाद ही आईसीसी ने न्यूट्रल वेन्यू का इंतजाम किया था। गावस्कर ने स्पोर्टस्टार में अपने आर्टिकल में साफ लिखा, 'दुनिया का हर समझदार व्यक्ति जानता है कि भारत की कोई भी सरकार अपने खिलाड़ियों को पाकिस्तान भेजने की अनुमति नहीं देगी।'
सुनील गावस्कर ने इस टिप्पणी का सीधा नाम लिए बिना जवाब दिया। उन्होंने लिखा, 'कुछ लोग, खासकर पुरानी ताकतें, यह पचा नहीं पा रही हैं कि अब विश्व क्रिकेट का पावर सेंटर भारत है।' उन्होंने कहा कि सवाल पूछने वाले यह भूल जाते हैं कि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत ने पाकिस्तान जाने से काफी पहले ही मना कर दिया था। तब तक शेड्यूल भी जारी नहीं किया गया था और इसके बाद ही आईसीसी ने न्यूट्रल वेन्यू का इंतजाम किया था। गावस्कर ने स्पोर्टस्टार में अपने आर्टिकल में साफ लिखा, 'दुनिया का हर समझदार व्यक्ति जानता है कि भारत की कोई भी सरकार अपने खिलाड़ियों को पाकिस्तान भेजने की अनुमति नहीं देगी।'
नासिर हुसैन और सुनील गावस्कर
- फोटो : Twitter/ANI
आईसीसी वोटिंग पर भी उठाया मुद्दा
गावस्कर ने यह भी याद दिलाया कि बांग्लादेश के मामले में आईसीसी बोर्ड की वोटिंग में पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर बाकी सभी ने उनके प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था। इसके बावजूद निशाना सिर्फ भारत पर साधा गया। इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया है कि क्रिकेट अब सिर्फ मैदान का खेल नहीं रहा। राजनीति, कूटनीति और आर्थिक ताकत सब साथ चलती हैं, लेकिन गावस्कर के तर्कों ने यह जरूर दिखाया कि इतिहास को नजरअंदाज कर सिर्फ एक देश को कठघरे में खड़ा करना आसान है, सही नहीं।
गावस्कर ने यह भी याद दिलाया कि बांग्लादेश के मामले में आईसीसी बोर्ड की वोटिंग में पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर बाकी सभी ने उनके प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था। इसके बावजूद निशाना सिर्फ भारत पर साधा गया। इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया है कि क्रिकेट अब सिर्फ मैदान का खेल नहीं रहा। राजनीति, कूटनीति और आर्थिक ताकत सब साथ चलती हैं, लेकिन गावस्कर के तर्कों ने यह जरूर दिखाया कि इतिहास को नजरअंदाज कर सिर्फ एक देश को कठघरे में खड़ा करना आसान है, सही नहीं।