Suryansh Shedge: 2011 की जीत देख रो पड़े थे, फिर कैसे तय किया डेब्यू तक का सफर? सूर्यांश शेडगे का बड़ा खुलासा
सूर्यांश शेडगे ने बताया कि 2011 में भारत की विश्व कप जीत ने उनके अंदर टीम इंडिया के लिए खेलने का सपना जगाया। डेब्यू के बाद उन्होंने अपने सफर, अर्शदीप सिंह और श्रेयस अय्यर को लेकर भी खुलकर बात की।
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शेडगे को भारतीय टीम में कैसे मिला मौका और कब हुआ उनका डेब्यू?
ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी के चोटिल होने के बाद सूर्यांश शेडगे की किस्मत का दरवाजा खुला। उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया। इसके बाद, रविवार को स्टॉर्मोंट के सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब मैदान पर आयरलैंड के खिलाफ खेले गए दूसरे टी20 मैच में उन्होंने भारत के लिए अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच (डेब्यू) खेला।
विश्व कप की उस रात क्या हुआ था जिसने शेडगे को भावुक कर दिया?
भारतीय टीम में जगह बनाने के बाद अपनी इस अविश्वसनीय यात्रा पर बात करते हुए सूर्यांश शेडगे ने उस पल को याद किया, जिसने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। शेडगे ने कहा कि क्रिकेट देखते हुए मैं अपने जीवन में पहली बार तब रोया था, जब भारत ने 2011 का विश्व कप जीता था। उस रात जब भारतीय टीम ट्रॉफी उठा रही थी, तो उसे देखकर मेरे अंदर कुछ बदल गया। मैंने उसी पल तय कर लिया कि मुझे भी एक दिन सबसे बड़े मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। उसी दिन से मैंने इस सपने को जीने और इसके लिए कड़ी मेहनत करना शुरू कर दिया था।
भारतीय जर्सी पहनने के बाद कैसा था सूर्यांश शेडगे का अनुभव?
शेडगे ने बताया कि मैं अच्छी तरह जानता था कि यह रास्ता आसान नहीं होने वाला है, लेकिन मैं हर चुनौती और कड़ी मेहनत के लिए तैयार था। जब मैंने पहली बार भारतीय टीम की आधिकारिक जर्सी पहनी, तो उस फीलिंग को शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। सुबह जल्दी उठना, मैदान पर पसीना बहाना और कई तरह के त्याग करना, उस एक पल में सब कुछ सफल हो गया। बचपन से मैंने सिर्फ इसी दिन का सपना देखा था। भारतीय जर्सी पहनना मेरे लिए सिर्फ एक सपने का पूरा होना भर नहीं है, बल्कि यह मेरे करियर की एक नई शुरुआत है।
सूर्यांश ने उस पल को भी याद किया जब उनके चयन की आधिकारिक घोषणा हुई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें सबसे पहले बधाई देने वालों में टीम के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह शामिल थे। शेडगे ने कहा कि जब मेरा चयन भारतीय टीम में हुआ, तो अर्शदीप सिंह पाजी ने मुझे सीधे वीडियो कॉल किया। उन्होंने मुझे दिल से बधाई दी और अपना खुद का चयन का अनुभव भी मुझसे साझा किया। हमने कुछ देर बातचीत की। वह पल मेरे लिए बहुत ज्यादा इमोशनल था। उस समय मुझे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि मेरा सपना सच हो चुका है। आज भी जब मैं सोचता हूं, तो यह किसी खूबसूरत सपने जैसा लगता है।
कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ कैसी रहती है शेडगे की मैदान के बाहर की बॉन्डिंग?
शेडगे ने टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर के प्रभाव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अय्यर के साथ उनका रिश्ता सिर्फ मैच के दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अक्सर खेल की बारीकियों को समझने के लिए लंबी चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा "मैं श्रेयस अय्यर भाई से अक्सर बातचीत करता रहता हूं। मैदान के बाहर भी हम दोनों काफी समय एक साथ बिताते हैं। हमारी चर्चा ज्यादातर क्रिकेट, बैटिंग-बॉलिंग, मैच की परिस्थितियों और दबाव के पलों से निपटने के तरीकों पर केंद्रित रहती है। आईपीएल के दौरान भी हम साथ बैठकर दूसरे मैच देखते थे और एनालिसिस करते थे कि अगर हम ऐसी स्थिति में होते तो क्या करते। इन चर्चाओं से मुझे उनके अनुभव से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।"
बातचीत के दौरान, शेडगे ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की भी तारीफ की, लेकिन उन्होंने विशेष रूप से श्रेयस अय्यर की मानसिकता की सराहना करते हुए कहा कि उनका आत्मविश्वास और मानसिक रूप से स्वतंत्र रहने की क्षमता उन्हें सबसे अलग बनाती है। शेडगे ने कहा कि श्रेयस अय्यर की सबसे बड़ी ताकत उनकी मानसिक मजबूती है। उन्हें बल्लेबाजी करना बहुत पसंद है और वह खेल को कभी भी मुश्किल नहीं बनाते। उन्हें अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा है। अगर वह किसी मैच में शून्य (0) पर भी आउट हो जाएं, तो वह उसका असर अपने अगले मैच पर बिल्कुल नहीं पड़ने देते। उन्हें पूरा विश्वास रहता है कि अगले मैच में वह जोरदार वापसी करेंगे। ऐसा कमाल का आत्मविश्वास बहुत कम खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। वह न तो पिछली गेंद के बारे में सोचते हैं और न ही बीते हुए मैच की फिक्र करते हैं। वह हर मैच में पूरी आजादी और निडरता के साथ खेलते हैं, यही बात उन्हें एक बेहद खतरनाक बल्लेबाज बनाती है।