T20 WC: 'पुरानी ताकतों को हजम नहीं हो रहा', गावस्कर ने नासिर हुसैन को क्यों लताड़ा? सूर्यवंशी का दिया उदाहरण
भारत-पाकिस्तान मैच पर उठे विवाद के बीच पूर्व इंग्लैंड कप्तान नासिर हुसैन ने आईसीसी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इसके जवाब में सुनील गावस्कर ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि असली पाखंड कौन कर रहा है, यह दुनिया देख रही है। उन्होंने इतिहास के उदाहरण देते हुए बताया कि जब इंग्लैंड ने मना किया था तब भी आईसीसी चुप था। पहले की ताकतों को ये हजम नहीं हो रहा कि भारत अब ताकतवर है।
विस्तार
जब पाकिस्तान का यह ड्रामा शुरू हुआ था, तो कुछ क्रिकेट पंडितों ने पाकिस्तान और बांग्लादेश को अपना समर्थन दिखाया था और भारत पर सवाल उठाए थे। इनमें इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन भी शामिल हैं। अब भारत के महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने उन्हें करार जवाब देते हुए लताड़ा है। गावस्कर का कहना है कि पुरानी ताकतों को भारत का दम देखना पच नहीं रहा। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए नासिर हुसैन की जमकर खिंचाई की। आइए पूरा मामला जानते हैं...
दरअसल, भारत-पाकिस्तान मैच पर खड़े हुए बवाल के बीच नासिर हुसैन ने स्काई स्पोर्ट्स पॉडकास्ट में सवाल उठाया था कि क्या आईसीसी सभी टीमों के साथ एक जैसा व्यवहार करता है? उन्होंने कहा, 'अगर भारत किसी टूर्नामेंट से एक महीने पहले कह देता कि हमारी सरकार हमें किसी देश में खेलने नहीं देगी, तो क्या आईसीसी उतना ही सख्त रहता? हर कोई सिर्फ एक चीज चाहता है, समानता।' नासिर ने यह भी जोड़ा कि भारत के पास पैसा है, ताकत है, लेकिन ताकत के साथ जिम्मेदारी भी आती है।
This could upset some Indian fans, but Nasser Hussain’s comments hit hard.
— Nibraz Ramzan (@nibraz88cricket) February 5, 2026
He exposed the ICC’s clear double standards favoring the BCCI, questioning if the same tough rules would apply if India refused to play somewhere over government concerns.
He gave props to Pakistan and… pic.twitter.com/lKaa9gIwJ7
सुनील गावस्कर ने इस टिप्पणी का सीधा नाम लिए बिना जवाब दिया। उन्होंने लिखा, 'कुछ लोग, खासकर पुरानी ताकतें, यह पचा नहीं पा रही हैं कि अब विश्व क्रिकेट का पावर सेंटर भारत है।' उन्होंने कहा कि सवाल पूछने वाले यह भूल जाते हैं कि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत ने पाकिस्तान जाने से काफी पहले ही मना कर दिया था। तब तक शेड्यूल भी जारी नहीं किया गया था और इसके बाद ही आईसीसी ने न्यूट्रल वेन्यू का इंतजाम किया था। गावस्कर ने स्पोर्टस्टार में अपने आर्टिकल में साफ लिखा, 'दुनिया का हर समझदार व्यक्ति जानता है कि भारत की कोई भी सरकार अपने खिलाड़ियों को पाकिस्तान भेजने की अनुमति नहीं देगी।'
गावस्कर ने दोहरे मापदंड दिखाने के लिए 2003 विश्व कप की घटना याद दिलाई, जब इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे में खेलने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा, 'तब कोई सुरक्षा खतरा नहीं था, फिर भी इंग्लैंड ने खेलने से इनकार कर दिया और अंक छोड़ दिए। क्या आईसीसी ने कुछ किया? नहीं। क्योंकि तब इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का दबदबा था और बाकी कोई उन्हें नाराज़ नहीं करना चाहता था।'
गावस्कर यहीं नहीं रुके। उन्होंने अंडर-19 विश्व कप फाइनल में वैभव सूर्यवंशी की 80 गेंदों पर 175 रन की विस्फोटक पारी का जिक्र करते हुए व्यंग्य किया। उन्होंने लिखा, 'अब अगर देखें तो जो वैभव सूर्यवंशी ने किया, वही असली धौंस जमाना (बुलीइंग) है, न कि वो काल्पनिक बुलीइंग जो कुछ लोग देखते हैं।' यह टिप्पणी सीधे तौर पर उन आलोचनाओं पर वार थी, जिनमें भारत या बीसीसीआई को ताकत का गलत इस्तेमाल करने वाला बताया जा रहा था।
गावस्कर ने यह भी याद दिलाया कि बांग्लादेश के मामले में आईसीसी बोर्ड की वोटिंग में पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर बाकी सभी ने उनके प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था। इसके बावजूद निशाना सिर्फ भारत पर साधा गया।
इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया है कि क्रिकेट अब सिर्फ मैदान का खेल नहीं रहा। राजनीति, कूटनीति और आर्थिक ताकत सब साथ चलती हैं, लेकिन गावस्कर के तर्कों ने यह जरूर दिखाया कि इतिहास को नजरअंदाज कर सिर्फ एक देश को कठघरे में खड़ा करना आसान है, सही नहीं।