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Dehradun News: एक मंडल से प्रस्ताव भेजा, दूसरे से आने का इंतजार
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- लेखपाल- पटवारी क्षेत्र पुनर्गठन को लेकर चल रही कवायद
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। लेखपाल-पटवारी क्षेत्र के पुनर्गठन की कवायद चल रही है मगर अभी मामला प्रस्ताव स्तर से ही आगे नहीं बढ़ा है। गढ़वाल मंडल का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, जबकि कुमाऊं मंडल से प्रस्ताव भेजा जाना है।
प्रदेश में लेखपाल पटवारी के करीब 1644 क्षेत्र पूर्व की तरह चले आ रहे हैं। जबकि राज्य बनने के बाद जनसंख्या की बढ़ोतरी हुई है, इसके अलावा राजस्व से जुड़े कामकाज में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके दृष्टिगत लेखपाल-पटवारी क्षेत्र के पुनर्गठन को लेकर राजस्व परिषद ने कोशिश शुरू की। इसके लिए करीब तीन महीने पहले कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के कमिश्नर से प्रस्ताव मांगा गया। इसमें जनसंख्या, क्षेत्रफल आदि को देखते हुए पुनर्गठन का प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। प्रस्ताव आने के बाद ही प्रक्रिया के आगे बढ़ने की संभावना है।
क्या कहते हैं अधिकारी
गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय का कहना है कि संबंधित प्रस्ताव को भेजा जा चुका है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत का कहना है कि राजस्व परिषद के साथ बैठक हुई थी। इसमें मानकों को लेकर बात हुई थी। इसके बाद के बाद जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। बीस दिनों के अंदर संबंधित प्रस्ताव को भेज दिया जाएगा।
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कामकाज में कई गुना बढ़ाेतरी हुई : लेखपाल संघ
उत्तराखंड लेखपाल संघ के हरिद्वार के जिलाअध्यक्ष देवेश घिल्डियाल ने बताया कि सत्तर के दशक के बाद से लेखपाल-पटवारी क्षेत्र का पुनर्गठन नहीं हुआ है। राज्य बनने के समय 51 तहसील थी, जाे 111 हो चुकी हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का काम बंटा है, लेकिन यहां पर बदलाव नहीं हुआ है। कामकाज में दस गुना तक बढ़ोतरी हुई है। अगर केवल प्रमाण पत्रों की बात करें तो हरिद्वार- देहरादून जैसी अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में एक पटवारी के पास एक महीने में 15 हजार तक प्रमाण पत्र बनाने का काम आ रहा है। इसके अलावा सर्वे, पैमाइश समेत अन्य कार्य भी है। ऐसे में पुनर्गठन का काम जल्द किया जाना चाहिए, इससे लोगों को भी सुविधा मिल सकेगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। लेखपाल-पटवारी क्षेत्र के पुनर्गठन की कवायद चल रही है मगर अभी मामला प्रस्ताव स्तर से ही आगे नहीं बढ़ा है। गढ़वाल मंडल का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, जबकि कुमाऊं मंडल से प्रस्ताव भेजा जाना है।
प्रदेश में लेखपाल पटवारी के करीब 1644 क्षेत्र पूर्व की तरह चले आ रहे हैं। जबकि राज्य बनने के बाद जनसंख्या की बढ़ोतरी हुई है, इसके अलावा राजस्व से जुड़े कामकाज में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके दृष्टिगत लेखपाल-पटवारी क्षेत्र के पुनर्गठन को लेकर राजस्व परिषद ने कोशिश शुरू की। इसके लिए करीब तीन महीने पहले कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के कमिश्नर से प्रस्ताव मांगा गया। इसमें जनसंख्या, क्षेत्रफल आदि को देखते हुए पुनर्गठन का प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। प्रस्ताव आने के बाद ही प्रक्रिया के आगे बढ़ने की संभावना है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय का कहना है कि संबंधित प्रस्ताव को भेजा जा चुका है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत का कहना है कि राजस्व परिषद के साथ बैठक हुई थी। इसमें मानकों को लेकर बात हुई थी। इसके बाद के बाद जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। बीस दिनों के अंदर संबंधित प्रस्ताव को भेज दिया जाएगा।
कामकाज में कई गुना बढ़ाेतरी हुई : लेखपाल संघ
उत्तराखंड लेखपाल संघ के हरिद्वार के जिलाअध्यक्ष देवेश घिल्डियाल ने बताया कि सत्तर के दशक के बाद से लेखपाल-पटवारी क्षेत्र का पुनर्गठन नहीं हुआ है। राज्य बनने के समय 51 तहसील थी, जाे 111 हो चुकी हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का काम बंटा है, लेकिन यहां पर बदलाव नहीं हुआ है। कामकाज में दस गुना तक बढ़ोतरी हुई है। अगर केवल प्रमाण पत्रों की बात करें तो हरिद्वार- देहरादून जैसी अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में एक पटवारी के पास एक महीने में 15 हजार तक प्रमाण पत्र बनाने का काम आ रहा है। इसके अलावा सर्वे, पैमाइश समेत अन्य कार्य भी है। ऐसे में पुनर्गठन का काम जल्द किया जाना चाहिए, इससे लोगों को भी सुविधा मिल सकेगी।