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Jyotish Mahakumbh: ज्योतिष विद्या के स्तर तक नहीं पहुंच सकता AI, विशेष सत्र में ग्रहों की स्थिति पर हुआ मंथन

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 24 Jan 2026 10:57 PM IST
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सार

ग्राफिक एरा विवि के सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में पंडित केए दुबे पदमेश ने कहा, ज्योतिष विद्या क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी।

Amar Ujala Jyotish Mahakumbh 2026 In Dehradun special session Held on AI and astrology
ज्योतिष महाकुंभ में विशेष सत्र - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ के पहले दिन गृहों की स्थिति, समय की बदलती परिस्थिति विषय पर ज्योतिषाचार्याें ने मंथन किया। ज्योतिषाचार्याें ने कहा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भले ही तेजी से हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा हो लेकिन ज्योतिष विद्या की गहराई और सूक्ष्मता तक उसका पहुंचना संभव नहीं है।

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ग्राफिक एरा विवि के सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में पंडित केए दुबे पदमेश ने कहा, ज्योतिष विद्या क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी। विज्ञान में नकारात्मक ऊर्जा भी और सकारात्मक ऊर्जा भी है लेकिन मानव ऊर्जा में केवल धनात्मक ऊर्जा है। जब कोई मानव अपने आध्यात्मिक मन से किसी के बारे में अपना कथन करता है तो वह सत्य के बहुत नजदीक होता है। ऐसे में एआई ज्योतिष के इस स्तर पर कभी नहीं पहुंच सकता। आज इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस और आईपीएस इस विद्या के साथ जुड़े हैं। जितनी लोकप्रियता ज्योतिष को मिली है उतनी लोकप्रियता किसी भी विज्ञान या कला को नहीं मिली।
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इस बीच ज्योतिष के साथ विज्ञान का जुड़ना सोने पर सुहागा जैसा है। यही वजह है कि ज्योतिष के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी है। उन्होंने कहा, सस्ती लोकप्रियता ज्योतिष को कलंकित करती है और विज्ञान के लिए कष्टदायी है। आज वर्तमान समय में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्हें संस्कृत भी आती है और विज्ञान भी आता है। ऐसे लोगों के कदम इस क्षेत्र में बढ़ेंगे तो इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा।

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सिर्फ ज्योतिष में है मन की बात बताने की ताकत
पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने कहा, पूरी दुनिया में सिर्फ ज्योतिष में ही इतनी ताकत है जो किसी के मन की बात बता सकता है। ऐसे में यह कार्यक्रम न सिर्फ ज्योतिष पर मंथन करने का है बल्कि हमारे सनातन धर्म को मजबूती देगा। इस साल की भविष्यवाणी करते हुए उन्होंने कहा, वर्ष 2026 का स्वामी सूर्य है तो यह साल बहुत शानदार रहने वाला है। खासकर आध्यात्मिक जगत को बहुत ही सम्मान देगा। भारतीय वैदिक ज्योतिष 101 फीसदी बोलता है। उन्होंने कहा, कोई भी कार्य शुरू करने से पहले अपने गुरु को प्रणाम करते हुए गायत्री मंत्र का जाप करते हुए शुरू करें तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। सलाह देते हुए उन्होंने कहा, हर व्यक्ति को दिन में गायत्री की 16 माला करनी चाहिए।

Amar Ujala Jyotish Mahakumbh 2026 In Dehradun special session Held on AI and astrology

उत्तराखंड की राजनीति में उथल-पुथल की संभावना
पंडित रमेश सेमवाल ने कहा, उत्तराखंड की राजनीति में राहु का प्रभाव है और मंगल कम है। यही वजह है कि बीते 25 वर्षों में उत्तराखंड में कई बार राजनीति उथल-पुथल देखने को मिली है। आने वाले समय में भी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली सकती है। इस साल बहुत सारी समस्याएं उत्तराखंड में आने वाली हैं। हालांकि उत्तराखंड का बृहस्पति और शनि का प्रभाव आने वाले समय में अच्छा होगा और प्रदेश में निवेश बढ़ेगा।

प्राचीन विद्या पर आधारित है एआई
पंडित संतोष खंडूरी ने कहा, वर्तमान समय वास्तव में बहुत एडवांस है। आज के समय में लोग अपने सवालों का जवाब मोबाइल या लैपटॉप से ढूंढ लेते हैं लेकिन जिस मोबाइल में आप एआई के जरिये अपने सवालों को ढूंढ लेते हैं वह अशुद्ध और अपवित्र है। एआई आज का विषय नहीं है यह प्राचीन और बहुत पुरानी विद्या है। एआई गणनाएं कर सकता है, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का विश्लेषण कर सकता है और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संभावनाएं बता सकता है लेकिन ज्योतिष केवल डेटा आधारित विद्या नहीं है। इसमें वर्षों का अनुभव, व्यक्ति की परिस्थितियों की समझ, सांस्कृतिक संदर्भ और अंतर्ज्ञान की अहम भूमिका होती है जिसे मशीन में समाहित करना कठिन है।

हमारे ऋषि मुनियों के शोध का फल है एआई
आचार्य डॉ. सुशांत राज ने कहा, हमारी प्राचीन विद्या को अपडेट कर एआई को तैयार किया गया है। अगर हमारे ऋषि मुनियों ने तमाम तरह के शोध नहीं किए होते तो एआई इतना सफल नहीं होता। एआई की परिभाषा और उसका उद्देश्य वर्तमान में पूरी तरह से अलग है लेकिन उसके विकास में हमारी प्राचीन भारतीय विचारधाराओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योगदान नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, ग्रहों की स्थिति देखकर यह कहा जा सकता है कि आने वाले समय में भूकंप और प्राकृतिक आपदा जैसी घटनाएं देखने को मिलेंगी। इन घटनाओं का अधिक प्रभाव प्रदेश के कुमाऊं क्षेत्र में ज्यादा देखने को मिलेगा। हालांकि इन आपदाओं में नियंत्रण पाने के लिए सरकार की ओर से पहले ही अच्छी तैयारी कर ली जाएगी। साथ ही इस साल भी बीते साल की तरह अधिक वर्षा होगी और इसका लाभ व नुकसान दोनों मिलेगा।

एक त्योहार-एक तिथि को बढ़ाना होगा
पंडित राम लखन गैराला ने कहा, हमें एक त्योहार एक तिथि की ओर बढ़ना होगा। धर्म रहेगा तो हमारी भारतीय संस्कृति सुरक्षित रहेगी और हम सुरक्षित रहेंगे। इसलिए इस ज्योतिष महाकुंभ में देश-विदेश के विद्वान आए हैं। कहा, एआई को सहायक उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम निर्णायक के रूप में। कहा, ज्योतिष में प्रत्येक जातक की कुंडली को उसके जीवन, समय और परिवेश के अनुसार अलग-अलग तरीके से देखा जाता है। यही मानवीय दृष्टि ज्योतिष को विशिष्ट बनाती है।

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