जनगणना: साल 2011 में ‘करोड़पति’ हो गया था उत्तराखंड, आबाजी में हुई थी रिकॉर्ड बढ़ोतरी
- जनसंख्या के मामले में 20वें स्थान पर था प्रदेश
- इस बार भी मैदानी जिलों में आबादी बढ़ने के आसार
विस्तार
हर दस साल के अंतराल पर होने वाली जनगणना का इस बार 16वां संस्करण शुरू होने जा रहा है। वर्ष 2011 की जनगणना में उत्तराखंड की जनसंख्या एक करोड़ पार कर गई थी।
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, साक्षरता दर में बढ़ोतरी के साथ ही उत्तराखंड की आबादी एक करोड़ से अधिक हो गई थी। उत्तराखंड राष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता में 17वें और जनसंख्या में 20वें स्थान पर था।
वर्ष 2001 की जनगणना रिपोर्ट में उत्तराखंड की आबादी 84 लाख से अधिक थी। देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों की आबादी में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। वर्ष 2001 की जनगणना में साक्षरता 71 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 79 प्रतिशत से अधिक हो गई थी।
2011 की जनगणना के मुताबिक, प्रदेश की 42 प्रतिशत आबादी कुमाऊं और 58 प्रतिशत आबादी गढ़वाल में निवास करती है। तब यह तथ्य भी सामने आया था कि प्रदेश की करीब 52 फीसदी आबादी तीन जिलों देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में निवास करती है।
प्रदेश में सबसे अधिक आबादी वाला जिला हरिद्वार तो सबसे कम आबादी वाला जिला रुद्रप्रयाग था। इसी प्रकार, सबसे अधिक साक्षरता वाला जिला देहरादून (85.24 प्रतिशत) था जबकि सबसे कम साक्षरता वाला जिला ऊधमसिंह नगर (74.44 प्रतिशत) था।
बीते दस साल में जितनी तेजी से मैदानी जिलों में आबादी का विस्तार हुआ है, उससे आबादी में खासी बढ़ोतरी होने की संभावना है। जनगणना के आंकड़े वर्ष 2021 में जारी होंगे।