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Exclusive: उत्तराखंड के 131 गांव, तीन कस्बों में इसी साल सितंबर में जनगणना, पहली बार मिलेगी ये सुविधा

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 18 Feb 2026 07:45 AM IST
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सार

Census in Uttarakhand: उत्तराखंड की जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव की अमर उजाला के प्रमुख संवाददाता आफताब अजमत से बातचीत के मुख्य अंश।

Census in 131 villages and three towns of Uttarakhand in September this year Read Fill Interview
जनगणना - फोटो : freepik.com(प्रतीकात्मक)
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विस्तार

देशभर में जनगणना की अधिसूचना जारी हो चुकी है। उत्तराखंड में इसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। पहली बार पूर्ण रूप से डिजिटल जनगणना होगी। वैसे तो जनगणना अगले साल नौ से 28 फरवरी के बीच होनी है लेकिन उत्तराखंड के 131 गांव, तीन कस्बों में इसी साल सितंबर में होगी।

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सवाल : उत्तराखंड में जनगणना कब से होगी। इसमें कितने कर्मचारी लगेंगे?
जवाब : जनगणना दो चरणों में होनी है, जिसमें पहला चरण मकान सूचीकरण का और दूसरा जनगणना का है। उत्तराखंड में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी ने पहले चरण की मकान गणना 25 अप्रैल से 24 मई के बीच प्रस्तावित की है, जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अनुमोदन मिलना बाकी है। प्रदेश के रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी के जिलाधिकारियों से हिमाच्छादित क्षेत्रों की जानकारी ली गई है। ऐसे 131 गांव और तीन कस्बों बदरीनाथ, केदारनाथ व गंगोत्री में जनगणना का काम इसी साल सितंबर माह में किया जाएगा। जनगणना के लिए प्रदेश को 30 हजार गणना क्षेत्र में बांटा गया है। हर गणना क्षेत्र में एक प्रगणक होगा। हर छह प्रगणक पर एक सुपरवाइजर होगा।
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सवाल : उत्तराखंड में जनगणना की अधिसूचना जारी होने के बाद क्या असर होगा?
जवाब : यह अधिसूचना जारी हो चुकी है। केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार से अनुरोध करती है कि जनगणना कार्य के दौरान अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले न हों। वहीं, प्रशासनिक सीमाएं सील हो चुकी हैं। 31 दिसंबर 2025 को प्रदेश में जो गांव था, वह गांव रहेगा, जो वार्ड, शहर, जिला जितना था, उसकी सीमा उतनी ही रहेगी। मार्च 2027 तक यह व्यवस्था लागू रहेगी।

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सवाल : इस बार जनगणना में 2011 के मुकाबले क्या नया होगा?
जवाब : यह पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है, जिसमें सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से बैच बनाकर प्रशिक्षण होगा। हर एक प्रगणन की प्र्रगति रिपोर्ट लाइव देखी जा सकेगी। दूसरी ओर, पेपरलैस जनगणना है। प्रगणक को कागज नहीं बल्कि ऐप के माध्यम से जनगणना करनी है। खास बात ये है कि आम नागरिक भी अपनी मकान गणना और जनगणना खुद कर सकते हैं। इसके लिए जल्द ही पोर्टल लांच होगा। इस पर अपने मोबाइल नंबर से पंजीकरण कराने के बाद जनगणना प्रपत्र भरना होगा। इसके बाद एक आईडी मिलेगी। इस आईडी को संभालकर रखें। जब आपके घर प्रगणक आएगा तो पहले स्व: गणना के बारे में सवाल करेगा। अगर आपने की होगी तो अपनी यह आईडी उन्हें उपलब्ध करानी होगी, जिसमें दिए गए तथ्यों को मौके पर ही सत्यापित किया जाएगा। अन्यथा की स्थिति में प्रगणक अपने ऐप के माध्यम से पूरी जानकारी भरेगा।

सवाल : उत्तराखंड के विषम भौगोलिक क्षेत्रों तक आपकी टीम कैसे पहुंचेगी? क्या हेलिकॉप्टर की मदद लेंगे?
जवाब : जनगणना करने वाले कर्मचारी उसी क्षेत्र के शिक्षक हैं। उन्हें हमारे पास केवल तीन दिन की ट्रेनिंग लेनी है। ऐसा तो नहीं लगता कि हेलिकॉप्टर की जरूरत होगी लेकिन परिस्थितियों के हिसाब से राज्य सरकार के स्तर से इसमें फैसला लिया जा सकेगा। जनगणना में केंद्र-राज्य मिलकर काम करेंगे।

सवाल : प्रदेश में बड़ी संख्या घोस्ट विलेज की है, जनगणना में उनके लिए क्या होगा?
जवाब : 2011 की जनगणना के हिसाब से प्रदेश में 16,793 राजस्व ग्राम थे, जिनमें से 1048 गैर आबाद थे। हमारी टीम नौ से 28 फरवरी 2027 के बीच हर गांव तक पहुंचेगी। अगर वहां कोई मिलेगा तो उसकी गणना होगी। अगर नहीं तो भी ऐसे गैर आबाद गांवों की गणना हो जाएगी।

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