{"_id":"69ce63cbe27548837009b907","slug":"central-government-committed-to-early-warning-system-for-disasters-trivendra-dehradun-news-c-5-drn1043-936420-2026-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदाओं की पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध : त्रिवेंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदाओं की पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध : त्रिवेंद्र
विज्ञापन
विज्ञापन
- उत्तराखंड में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 31 की
- लैंसडोन में नए डॉप्लर वेदर रडार स्थापितअमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। हरिद्वार क्षेत्र के सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोकसभा में उत्तराखंड में बाढ़, भूस्खलन व ग्लेशियर पिघलने से उत्पन्न आपदाओं के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली के संबंध में सवाल उठाया। उन्होंने कहा, आपदाओं की पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। राज्य में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 31 की गई है।
सवाल के लिखित जवाब में पृथ्वी विज्ञान एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने अवगत कराया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर एक समग्र बहु-जोखिम पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की गई है, जिसमें प्रेक्षण नेटवर्क, उन्नत पूर्वानुमान मॉडल व जीआईएस आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली शामिल है। इसके अलावा केंद्रीय जल आयोग की ओर स हिमालयी राज्यों में अल्पकालिक बाढ़ पूर्वानुमान जारी किए जाते हैं, जिनमें 24 घंटे तक का समय उपलब्ध रहता है।
लैंसडोन में नए डॉप्लर वेदर रडार की स्थापना के साथ राज्य में अब कुल तीन डॉप्लर रडार संचालित हैं। इसके अलावा स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 31 की गई है। वर्षा मापन के लिए स्वचालित वर्षामापक और निगरानी स्टेशनों का विस्तार किया गया है। केदारनाथ में उच्च ऊंचाई स्वचालित मौसम प्रेक्षण प्रणाली की स्थापना से दुर्गम क्षेत्रों में भी मौसम निगरानी सुदृढ़ हुई है। ग्लेशियरों की निगरानी के लिए इसरो के माध्यम से उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली तकनीकों का उपयोग कर हिमालयी ग्लेशियरों के आकार, विस्तार एवं गतिशीलता की नियमित निगरानी की जा रही है। रावत ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए ये कदम हिमालयी राज्यों में आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।
Trending Videos
- लैंसडोन में नए डॉप्लर वेदर रडार स्थापितअमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। हरिद्वार क्षेत्र के सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोकसभा में उत्तराखंड में बाढ़, भूस्खलन व ग्लेशियर पिघलने से उत्पन्न आपदाओं के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली के संबंध में सवाल उठाया। उन्होंने कहा, आपदाओं की पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। राज्य में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 31 की गई है।
सवाल के लिखित जवाब में पृथ्वी विज्ञान एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने अवगत कराया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर एक समग्र बहु-जोखिम पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की गई है, जिसमें प्रेक्षण नेटवर्क, उन्नत पूर्वानुमान मॉडल व जीआईएस आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली शामिल है। इसके अलावा केंद्रीय जल आयोग की ओर स हिमालयी राज्यों में अल्पकालिक बाढ़ पूर्वानुमान जारी किए जाते हैं, जिनमें 24 घंटे तक का समय उपलब्ध रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
लैंसडोन में नए डॉप्लर वेदर रडार की स्थापना के साथ राज्य में अब कुल तीन डॉप्लर रडार संचालित हैं। इसके अलावा स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 31 की गई है। वर्षा मापन के लिए स्वचालित वर्षामापक और निगरानी स्टेशनों का विस्तार किया गया है। केदारनाथ में उच्च ऊंचाई स्वचालित मौसम प्रेक्षण प्रणाली की स्थापना से दुर्गम क्षेत्रों में भी मौसम निगरानी सुदृढ़ हुई है। ग्लेशियरों की निगरानी के लिए इसरो के माध्यम से उपग्रह आधारित रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली तकनीकों का उपयोग कर हिमालयी ग्लेशियरों के आकार, विस्तार एवं गतिशीलता की नियमित निगरानी की जा रही है। रावत ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए ये कदम हिमालयी राज्यों में आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।