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सहकारी समिति घोटाला: 3.43 करोड़ के गबन में पूर्व लेखाकार को सात साल की जेल
Tue, 11 Aug 2026 02:41 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Tue, 11 Aug 2026 02:41 AM IST
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बहुउद्देश्यीय किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड के ग्रामीण बचत केंद्र (मिनी बैंक) में 3.43 करोड़ रुपये से अधिक के गबन के मामले में अदालत ने पूर्व सहायक लेखाकार भारती देवी को दोषी करार दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने सोमवार को उन्हें सात साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
सहायक अभियोजन अधिकारी विशाल गौड़ ने बताया कि पोंधा (प्रेमनगर) स्थित सिल्वर हाइट्स निवासी भारती देवी वर्ष 2015 से मार्च 2020 तक मिनी बैंक में सहायक लेखाकार और प्रभारी के पद पर तैनात थीं। इसी अवधि में उन्होंने भारी वित्तीय अनियमितताएं कीं। जांच समिति की रिपोर्ट में 3,43,85,671 रुपये के गबन का खुलासा होने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
निकासी प्रपत्रों में अंकों से किया खेल
अभियोजन पक्ष ने अदालत में ऑडिट रिपोर्ट, कैशबुक, बैंक स्टेटमेंट, पासबुक और निकासी प्रपत्र समेत कई अहम दस्तावेज पेश किए। साक्ष्यों के विश्लेषण में सामने आया कि आरोपी ने खाताधारकों के निकासी-वितरण प्रपत्रों में अंकों को आगे-पीछे कर रकम में हेरफेर की। बैंक से रकम निकालने के बाद रजिस्टर में प्रविष्टि नहीं की गई और प्रपत्रों पर फर्जी हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये डकार लिए गए। अपराध पूरी तरह संदेह से परे साबित होने पर न्यायालय ने उन्हें छह अलग-अलग धाराओं में दोषी ठहराते हुए अधिकतम सात साल कैद की सजा सुनाई। अदालत के आदेशानुसार सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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ईडी कुर्क कर चुकी है 3.80 करोड़ की संपत्ति
सावधि जमा (एफडी) के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी और करोड़ों के गबन के इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सख्त कार्रवाई कर चुका है। जांच एजेंसी ने हाल ही में पूर्व लेखाकार भारती देवी की 62 लाख रुपये की संपत्ति अटैच की है। इससे पहले फरवरी 2023 में भी ईडी ने विकासनगर स्थित 12 फ्लैटों सहित करीब 3.18 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी। इस तरह इस मामले में अब तक कुल 3.80 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अटैच की जा चुकी है।
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सहायक अभियोजन अधिकारी विशाल गौड़ ने बताया कि पोंधा (प्रेमनगर) स्थित सिल्वर हाइट्स निवासी भारती देवी वर्ष 2015 से मार्च 2020 तक मिनी बैंक में सहायक लेखाकार और प्रभारी के पद पर तैनात थीं। इसी अवधि में उन्होंने भारी वित्तीय अनियमितताएं कीं। जांच समिति की रिपोर्ट में 3,43,85,671 रुपये के गबन का खुलासा होने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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निकासी प्रपत्रों में अंकों से किया खेल
अभियोजन पक्ष ने अदालत में ऑडिट रिपोर्ट, कैशबुक, बैंक स्टेटमेंट, पासबुक और निकासी प्रपत्र समेत कई अहम दस्तावेज पेश किए। साक्ष्यों के विश्लेषण में सामने आया कि आरोपी ने खाताधारकों के निकासी-वितरण प्रपत्रों में अंकों को आगे-पीछे कर रकम में हेरफेर की। बैंक से रकम निकालने के बाद रजिस्टर में प्रविष्टि नहीं की गई और प्रपत्रों पर फर्जी हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये डकार लिए गए। अपराध पूरी तरह संदेह से परे साबित होने पर न्यायालय ने उन्हें छह अलग-अलग धाराओं में दोषी ठहराते हुए अधिकतम सात साल कैद की सजा सुनाई। अदालत के आदेशानुसार सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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ईडी कुर्क कर चुकी है 3.80 करोड़ की संपत्ति
सावधि जमा (एफडी) के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी और करोड़ों के गबन के इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी सख्त कार्रवाई कर चुका है। जांच एजेंसी ने हाल ही में पूर्व लेखाकार भारती देवी की 62 लाख रुपये की संपत्ति अटैच की है। इससे पहले फरवरी 2023 में भी ईडी ने विकासनगर स्थित 12 फ्लैटों सहित करीब 3.18 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी। इस तरह इस मामले में अब तक कुल 3.80 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अटैच की जा चुकी है।