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वन संपदा की सुरक्षा के लिए समन्वित प्रयास जरूरी : मिश्रा
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वनाग्नि नियंत्रण के लिए अंतर विभागीय बैठक का हुआ आयोजन
-15 फरवरी से शुरू हो रहा फायर सीजन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने कहा कि समृद्ध जैव विविधता राज्य की धरोहर है। वन संपदा की सुरक्षा के लिए समन्वित प्रयास, आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता जरूरी है। सामूहिक प्रयासों से प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकता है।
यह बात प्रमुख वन संरक्षक मिश्रा ने आईसीएफआरआई के सभागार में वनाग्नि नियंत्रण के लिए आयोजित अंतर विभागीय बैठक में कही। मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि नियंत्रण सुशांत पटनायक ने वन विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों, पूर्व में वनाग्नि की घटना, संवेदनशील क्षेत्र, पूर्व चेतावनी प्रणाली, निगरानी तंत्र के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि जागरूकता कार्यक्रम, एफएसआई उपग्रह आधारित फायर अलर्ट सिस्टम के माध्यम से निगरानी तंत्र को मजबूत कर जंगल की आग की घटनाओं को कम किया जा सकता है। बैठक में विस्तार से विभिन्न विभागों की भूमिका, उत्तरदायित्वों, मानक तैयार करने समेत अन्य विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में प्रमुख वन संरक्षक एसपी सुबुद्धि, अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडे व मीनाक्षी जोशी समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
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शासन ने जिलाधिकारियों को भेजा पत्र
प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु ने प्रदेश में वनाग्नि की रोकथाम व प्रभावी नियंत्रण के लिए एक पत्र जिलाधिकारियों को भेजा है। इसमें कहा गया है कि वनाग्नि की दृष्टि से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी जिले चीड़ बाहुल्य होने के कारण अधिक संवेदनशील है। प्रमुख सचिव वन ने अधिकारियों को जिला स्तरीय वनाग्नि प्रबंधन योजना को वन विभाग को भेजने, सूचनाओं के अदान प्रदान के लिए पुलिस विभाग के संचार तंत्र का उपयोग करने, राजस्व क्षेत्र, सिविल सोयम वन क्षेत्र में वनाग्नि प्रबंधन की व्यवस्था करने समेत अन्य निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा 31 मार्च के बाद ओण, आड़ा को जलाने की अनुमति सामान्य तौर पर नहीं देने की बात कही गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने कहा कि समृद्ध जैव विविधता राज्य की धरोहर है। वन संपदा की सुरक्षा के लिए समन्वित प्रयास, आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता जरूरी है। सामूहिक प्रयासों से प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकता है।
यह बात प्रमुख वन संरक्षक मिश्रा ने आईसीएफआरआई के सभागार में वनाग्नि नियंत्रण के लिए आयोजित अंतर विभागीय बैठक में कही। मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि नियंत्रण सुशांत पटनायक ने वन विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों, पूर्व में वनाग्नि की घटना, संवेदनशील क्षेत्र, पूर्व चेतावनी प्रणाली, निगरानी तंत्र के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि जागरूकता कार्यक्रम, एफएसआई उपग्रह आधारित फायर अलर्ट सिस्टम के माध्यम से निगरानी तंत्र को मजबूत कर जंगल की आग की घटनाओं को कम किया जा सकता है। बैठक में विस्तार से विभिन्न विभागों की भूमिका, उत्तरदायित्वों, मानक तैयार करने समेत अन्य विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में प्रमुख वन संरक्षक एसपी सुबुद्धि, अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडे व मीनाक्षी जोशी समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
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शासन ने जिलाधिकारियों को भेजा पत्र
प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु ने प्रदेश में वनाग्नि की रोकथाम व प्रभावी नियंत्रण के लिए एक पत्र जिलाधिकारियों को भेजा है। इसमें कहा गया है कि वनाग्नि की दृष्टि से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर, पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी जिले चीड़ बाहुल्य होने के कारण अधिक संवेदनशील है। प्रमुख सचिव वन ने अधिकारियों को जिला स्तरीय वनाग्नि प्रबंधन योजना को वन विभाग को भेजने, सूचनाओं के अदान प्रदान के लिए पुलिस विभाग के संचार तंत्र का उपयोग करने, राजस्व क्षेत्र, सिविल सोयम वन क्षेत्र में वनाग्नि प्रबंधन की व्यवस्था करने समेत अन्य निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा 31 मार्च के बाद ओण, आड़ा को जलाने की अनुमति सामान्य तौर पर नहीं देने की बात कही गई है।

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