दूसरे प्रयास में हुआ झंडे जी का अरोहण, ध्वज दंड खंडित होने से मची अफरा-तफरी, 13 श्रद्धालु घायल
- नए ध्वज दंड पर स्थापित हुए थे श्री झंडेजी, 105 फीट की सबसे अधिक ऊंचाई थी
- शाम पौने पांच बजे बारिश में कैंची फिसलने से हुआ हादसा
विस्तार
देहरादून के ऐतिहासिक झंडे जी के आरोहण को आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भले ही पहली बार में झंडे जी का ध्वज दंड खंडित होने के कारण आरोहण नहीं हो सका। लेकिन शाम को दोबारा प्रयास के बाद आरोहण संपन्न हुआ।
इससे पहले शाम को आरोहण के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया। झंडे जी को स्थापित करने के अंतिम क्षण में ध्वज दंड का निचला हिस्सा खंडित हो गया। जिस कारण झंडे जी का बड़ा हिस्सा श्रद्धालुओं के ऊपर जा गिरा। हादसे में 13 श्रद्धालु घायल हो गए। इनमें से सात को श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। सेवादारों और पुलिस के संयुक्त प्रयासों से स्थिति पर काबू पाया गया।
लेकिन इससे पूरे परिसर में भगदड़ की स्थिति बन गई। गनीमत रही कि एसपी सिटी श्वेता चौबे उस समय पुलिस बल के साथ मौके पर मुस्तैद थी। उन्होंने पुलिस टीम और सेवादारों के साथ मोर्चा संभालकर घायलों को उठाने के साथ उन्हें उपचार दिलाने में देर नहीं होने दी।
इसी बीच श्री महंत इंदिरेश से आधा दर्जन एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंची तो पुलिस ने इनके लिए मार्ग खाली कराया। घायलों को तत्काल महंत इंदिरेश अस्पताल पहुंचाया गया और उपचार दिया गया। इनमें सुरजीत सिंह (50) निवासी रतिया सोलन (हिमाचल प्रदेश) को गंभीर चोटें आईं हैं।
उसके सिर में कई टांके लगे हैं। इसी बीच सीओ पटेलनगर अनुज कुमार और इंस्पेक्टर सूर्यभूषण नेगी अस्पताल पहुंचे। पुलिस और सेवादाराें को भीड़ को नियंत्रित करने में मशक्कत करनी पड़ी। हादसे के चलते पूरे इलाके को सील कर दिया गया। देर शाम श्री झंडेजी का दोबारा आरोहण शुरू हुआ, जो सकुशल संपन्न हुआ। मौसम की विषम परिस्थितियों के बावजूद भी श्रद्धालुओं का जोश देखने लायक रहा। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु इस पवित्र रस्म के साक्षी बने।
ये हुए घायल
सुरजीत सिंह पुत्र लालचंद (50) वर्ष निवासी ग्राम रतिया, थाना दमोह, जनपद सोलन (हिमाचल प्रदेश)
अवतार सिंह पुत्र बलदेव सिंह (50)निवासी बनाड़, मोहाली (पंजाब)
लाडी पुत्र प्रकाश सिंह (22) निवासी रोपड़ (पंजाब)
गुरचरण सिंह पुत्र जगदीश सिंह (44) निवासी धमाणा, जिला रोपड़ (पंजाब)
जसकरण पुत्र पुरुषोत्तम (24) निवासी नवांशहर (पंजाब)
सचिन पुत्र रघुवीर सिंह (23) निवासी काशीपुर, खेड़ागंज (उत्तराखंड)
जगमीत सिंह पुत्र हरप्रीत सिंह (14)निवासी 290 गांधीग्राम, देहरादून, उत्तराखंड
जयकारे और ढोल-नगाड़ों की थाप से आती रही ऊर्जा
झंडा जी को स्थापित करना बेहद मुश्किल रहा, लेकिन श्री झंडा जी की दिव्य शक्ति और श्रद्धालुओं की श्री झंडा जी के प्रति अटूट आस्था का ही नतीजा रहा कि पूरी प्रक्रिया सकुशल संपन्न हुई। आरोहण के समय श्रद्धालु महाराज के जयकारे लगाते रहे। वहीं, ढोल-नगाडों की थाप की मधुर ध्वनि श्रद्धालुओं में ऊर्जा का संचार करती रही।
दर्शनी गिलाफ को छूने को आतुर रहे श्रद्धालु
झंडा जी के आरोहण में दर्शनी गिलाफ का विशेष महत्व होता है। दर्शनी गिलाफ चढ़ाने के लिए 100 साल पहले ही बुकिंग करानी होती है, तब जाकर किस्मत वाले को ही यह सौभाग्य हासिल हो पाता है। इस दर्शनी गिलाफ को श्री झंडा जी पर चढ़ाए जाने से पहले उसे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया। दर्शनी गिलाफ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही। दर्शनी गिलाफ को छूकर श्रद्धालु धन्य हुए।
ऐतिहासिक क्षण के दर्शन हुए तो आंखें हुई नम
मखमली वस्त्र, सुनहरे गोटों, चंवर से सुसज्जित कर श्री झंडे जी का आरोहण किया गया। श्री झंडे जी को लकड़ियों की कैंची के सहारे धीरे-धीरे खड़ा किया गया। श्री झंडा साहिब को स्थापित किया तो श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनकर खुद को सौभाग्यशाली समझा। इस दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम नजर आई।
श्री गुरू राम राय का 374वां जन्मदिवस मनाया
श्री गुरू राम राय ने वर्ष 1676 में दून में डेरा डाला था। उनका जन्म 1646 में पंजाब के होशियारपुर जिले के कीरतपुरमें होली के पांचवें दिन हुआ था। इसलिए दरबार साहिब में हर साल होली के पांचवें दिन उनके जन्मदिवस पर झंडा मेला लगाया जाता है। गुरू राम राय ने ही लोक कल्याण के लिए विशाल ध्वज को यहां स्थापित किया था। इस बार उनका 374वां जन्मदिवस धूमधाम से मनाया गया।
