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दून अस्पताल : शॉर्ट सर्किट के कारण का निवारण
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दून अस्पताल में शॉर्ट सर्किट की घटनाओं के कारण का निवारण अब जल्द होगा। इसके लिए प्रबंधन सभी विभागों में इलेक्ट्रिक लोड का ऑडिट कराएगा। अस्पताल ने यह निर्णय तब लिया है जब शासन ने अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेते हुए जवाब तलब किया था।
गत दो जनवरी को अस्पताल के ओपीडी भवन में मेन स्विच में शॉर्ट सर्किट से अफरातफरी मच गई थी। इससे पहले अस्पताल के आईपीडी भवन में बच्चा वार्ड के नजदीक स्थित कैंटीन में देर रात आग लग गई थी। इस दौरान बिस्किट के बॉक्स के गत्ते समेत तमाम सामान जल गया था। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने आग की लपटें देखकर आनन-फानन गेट तोड़कर आग बुझाई थी। इसके अलावा भी अस्पताल में आठ से दस बार फायर स्प्रिंकलर से पानी लीकेज से भी शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ गया था। इन सभी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए शासन की ओर से अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई गई थी, साथ ही मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
इस दौरान अधिकारियों को शॉर्ट सर्किट की समस्याओं के निवारण की दिशा में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इस पर अस्पताल प्रबंधन अब सभी विभागों में हो रही बिजली की आपूर्ति के लोड का ऑडिट कराएगा। इसके लिए तकनीकी संवर्ग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इसमें यह भी बात सामने आई कि कुछ विभागों में मरीजों के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनें तो बढ़ाई गईं लेकिन उनको उसी लाइन से जोड़ दिया गया। ऐसे में एक मेन स्विच के लिए लोड उठा पाना मुश्किल हो रहा है।
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चिकित्सकों ने हीटर चलाया तो खैर नहीं
अस्पताल प्रबंधन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक अधिकारी चिकित्सकों की ओपीडी का औचक निरीक्षण करेंगे। अगर उनके कक्ष में हीटर चलता मिला तो उन पर कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में सेंट्रलाइज एसी लगा हुआ है। ठंड के सीजन में किसी भी कमरे को आसानी से गर्म किया जा सकता है। इसके बाद भी कुछ चिकित्सक ओपीडी में हीटर लगाते हैं। इसकी वजह से बेवजह लोड बढ़ता है।
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सभी विभागों में जल्द ही इलेक्ट्रिक लोड का ऑडिट कराया जाएगा। यह मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कराया जा रहा है। इससे शॉर्ट सर्किट की घटनाओं को रोक जा सकेगा। - डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट, चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पताल
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गत दो जनवरी को अस्पताल के ओपीडी भवन में मेन स्विच में शॉर्ट सर्किट से अफरातफरी मच गई थी। इससे पहले अस्पताल के आईपीडी भवन में बच्चा वार्ड के नजदीक स्थित कैंटीन में देर रात आग लग गई थी। इस दौरान बिस्किट के बॉक्स के गत्ते समेत तमाम सामान जल गया था। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने आग की लपटें देखकर आनन-फानन गेट तोड़कर आग बुझाई थी। इसके अलावा भी अस्पताल में आठ से दस बार फायर स्प्रिंकलर से पानी लीकेज से भी शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ गया था। इन सभी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए शासन की ओर से अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई गई थी, साथ ही मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
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इस दौरान अधिकारियों को शॉर्ट सर्किट की समस्याओं के निवारण की दिशा में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इस पर अस्पताल प्रबंधन अब सभी विभागों में हो रही बिजली की आपूर्ति के लोड का ऑडिट कराएगा। इसके लिए तकनीकी संवर्ग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। इसमें यह भी बात सामने आई कि कुछ विभागों में मरीजों के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनें तो बढ़ाई गईं लेकिन उनको उसी लाइन से जोड़ दिया गया। ऐसे में एक मेन स्विच के लिए लोड उठा पाना मुश्किल हो रहा है।
चिकित्सकों ने हीटर चलाया तो खैर नहीं
अस्पताल प्रबंधन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक अधिकारी चिकित्सकों की ओपीडी का औचक निरीक्षण करेंगे। अगर उनके कक्ष में हीटर चलता मिला तो उन पर कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में सेंट्रलाइज एसी लगा हुआ है। ठंड के सीजन में किसी भी कमरे को आसानी से गर्म किया जा सकता है। इसके बाद भी कुछ चिकित्सक ओपीडी में हीटर लगाते हैं। इसकी वजह से बेवजह लोड बढ़ता है।
सभी विभागों में जल्द ही इलेक्ट्रिक लोड का ऑडिट कराया जाएगा। यह मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कराया जा रहा है। इससे शॉर्ट सर्किट की घटनाओं को रोक जा सकेगा। - डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट, चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पताल