ऋषिगंगा त्रासदी में लापता हुए जौनसार बावर क्षेत्र के नौ लोगों का अब तक पता नहीं चल सका है। परिजनों की उम्मीदें दम तोड़ने लगी हैं। ददोली गांव के रहने वाले अनिल पुत्र थेफा और अनिल पुत्र भगतू के परिजन अपने लाडलों को पूरी तरह से मृत मान चुके हैैं।
चमोली आपदाः यहां लापता लोगों के परिजनों की टूटने लगी आस, दो युवकों का कर दिया क्रियाकर्म, तस्वीरें
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गुरुवार को दोनों युवकों के परिजनों ने उनका क्रियाकर्म (चौथा) भी कर दिया। आसपास के लोग भी परिजनों के घर जाकर उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। बीते साल क्षेत्र में रहने वाले 20-25 युवा रोजगार की तलाश में ऋषिगंगा पॉवर प्रोजेक्ट पर गए थे। जिनमें से ज्यादातर युवा बूढ़ी दिवाली के दौरान घर लौट आए थे जबकि, नौ लोग अपनी पारिवारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए वहीं पर काम कर रहे थे।
इनमें पंजिया गांव के चार, ददोली के दो और पाट समाल्टा, फटेऊ और साहिया खतार के एक-एक युवक शामिल थे। पांच दिन पूर्व ऋषिगंगा में बाढ़ आने के बाद से ये सभी नौ युवक लापता चल रहे हैं। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। किसी की मां तो किसी की पत्नी और बच्चे इसी उम्मीद में है कि उनके अपनों के कोई जिंदा होने की सूचना देगा।
अनिल पुत्र थेफा की मां व स्वयं थेफा का रो-रो कर बुरा हाल है। अनिल की पत्नी आमो देवी ने तो पिछले पांच दिनों से खाना पीना तक छोड़ दिया है। उसकी तीन बेटियां और छह साल का बेटा घर में रोना-धोना देखकर सहमे हुए हुए हैं। अनिल पुत्र भगतू के यहां पर भी ऐसा मातम पसरा हुआ था। ददोली गांव के स्याणा जवाहर सिंह, पूर्व प्रधान सुमू राम, संतुराम का कहना है कि वे लोग लापता युवकों की तलाश में ऋषिगंगा तट पर गए थे।
परियोजना का करीब 30-40 मीटर मुहाने पर मलबे की मोटी परत जमी हुई है। ऐसे में उनके अपने जिंदा होंगे, उन्हें उम्मीद नहीं है। बेटों के वापस आने की आस छोड़ अब परिजनों ने उनका क्रियाकर्म कर दिया है, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिल सके। वहीं उपजिलाधिकारी कालसी संगीता कन्नौजिया ने बताया कि जब तक किसी की मौत के पुख्ता प्रमाण नहीं मिलते, हम किसी को मृत घोषित नहीं कर सकते।