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Roorkee: गंगा के जलस्तर में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट, इस बार 45 हजार क्यूसेक के स्तर तक ही छू पाया

Tue, 07 Jul 2026 01:05 PM IST
Renu Saklani अंकित गर्ग, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
अंकित गर्ग, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की Published by: Renu Saklani Updated Tue, 07 Jul 2026 01:05 PM IST
सार

बारिश की कमी का असर उत्तराखंड की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। गंगा नदी के जलस्तर में इस साल पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।अप्रत्याशित रूप से कम वर्षा के कारण अप्रैल से जून 2026 के बीच नदियों के जल प्रवाह में भी करीब 30 प्रतिशत तक कमी आई है। पिछले साल जुलाई के पहले सप्ताह में जहां गंगा का जलस्तर एक लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था, वहीं इस बार यह 45 हजार क्यूसेक के आसपास ही रहा।

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Ganga water level drops by more than 50 percent due to lack of expected rainfall Roorkee Uttarakhand news
गंगा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : amar ujala

विस्तार

मानसून की सुस्त रफ्तार और अपेक्षित वर्षा नहीं होने का असर अब गंगा के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। यूपी सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह तक गंगा के जलप्रवाह में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है। पिछले साल जलस्तर एक लाख क्यूसेक को छू गया था जबकि इस बार जलस्तर महज 45 हजार क्यूसेक तक ही सीमित है। पानी की इस कमी का कई क्षेत्रों पर गंभीर परिणाम देखने को मिल सकता है।

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अप्रैल से जून 2026 के दौरान भी नदियों के जलप्रवाह को लेकर विभागीय आंकड़े और भी चिंता पैदा कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि इन तीन महीनों में नदियों में औसतन 30 प्रतिशत तक कम पानी बहा। गौरतलब है कि गंगा में पानी की कमी का सीधा असर रुड़की की गंगनहर पर पड़ता है। इसी गंगनहर से हरिद्वार जिले समेत यूपी के अन्य जिलों में सिंचाई के साथ ही दिल्ली में पेयजल आपूर्ति होती है।

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पानी कम होने से गन्ना, धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा भूजल रिचार्ज की रफ्तार धीमी होने से आने वाले महीनों में नलकूपों और हैंडपंपों के जलस्तर पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यही स्थिति बनी रही तो कृषि उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और पर्यावरणीय संतुलन पर भी व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि आगामी दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने पर स्थिति में सुधार संभव है लेकिन फिलहाल उपलब्ध आंकड़े पानी के गंभीर संकट की ओर संकेत कर रहे हैं।

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अगस्त में और भी गिरावट की आशंका

मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अगस्त माह में भी पानी के स्तर में सुधार के संकेत नहीं हैं। माना जा रहा है कि जुलाई माह से भी कम बारिश हो सकती है। इसका सीधा असर आने वाले दिनों में खेतों में सिंचाई के गंभीर संकट के रूप में रूप में दिखाई दे रहा है।



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पिछले साल के मुकाबले जलस्तर में भारी कमी देखने को मिली है। एक लाख क्यूसेक के सापेक्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह तक 45 हजार क्यूसेक पानी ही मिल पाया है। अप्रैल से जून माह में भी नदियों में पानी की 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। इससे सिंचाई, भूजल रिचार्ज और पेयजल आदि समेत विभिन्न क्षेत्रों में असर देखने को मिलेगा। - विकास त्यागी, अधिशासी अभियंता, एनडीजीसी

 

 

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