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Dehradun News: भू-स्थानिक मिशन से वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए मिल रहा है जमीनी डाटा
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। केंद्र के राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन से संस्थाओं को मिल रहा जमीनी डाटा वैज्ञानिक, आर्थिक और विकासात्मक उद्देश्यों के लिए बड़ा मददगार साबित हो रहा है। जिसके अधिक बेहतर उपयोग के लिए मिशन के मूल्यांकन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।
सांसद महेंद्र भट्ट ने राज्यसभा में उच्च-सटीकता वाले डिजिटल एलिवेशन मॉडल से जुड़े राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन की प्रगति पर महत्वपूर्ण जानकारी मांगी। जिसके जवाब में विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि बजट घोषणा के अनुरूप, राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन प्रस्ताव के मूल्यांकन की प्रक्रिया संबंधी औपचारिकताएं शुरू की गई। इस संबंध में, प्रस्ताव मूल्यांकन के विभिन्न चरणों में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार संबंधित मंत्रालय, विभाग के साथ व्यापक हितधारक परामर्श किया गया है। मूल्यांकन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में प्राप्त सुझावों को शामिल करने के बाद मंत्रिमंडल नोट के रूप में मिशन दस्तावेज को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 15 फरवरी 2021 से भू-स्थानिक दिशानिर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक निधियों का उपयोग करके उत्पन्न किया गया सभी भू-स्थानिक डेटा, सुरक्षा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से एकत्रित गोपनीय भू-स्थानिक डेटा को छोड़कर, सभी भारतीय संस्थाओं को वैज्ञानिक, आर्थिक और विकासात्मक उद्देश्यों के लिए आसानी से सुलभ कराया जाएगा। उनके उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
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देहरादून। केंद्र के राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन से संस्थाओं को मिल रहा जमीनी डाटा वैज्ञानिक, आर्थिक और विकासात्मक उद्देश्यों के लिए बड़ा मददगार साबित हो रहा है। जिसके अधिक बेहतर उपयोग के लिए मिशन के मूल्यांकन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।
सांसद महेंद्र भट्ट ने राज्यसभा में उच्च-सटीकता वाले डिजिटल एलिवेशन मॉडल से जुड़े राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन की प्रगति पर महत्वपूर्ण जानकारी मांगी। जिसके जवाब में विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि बजट घोषणा के अनुरूप, राष्ट्रीय भू-स्थानिक मिशन प्रस्ताव के मूल्यांकन की प्रक्रिया संबंधी औपचारिकताएं शुरू की गई। इस संबंध में, प्रस्ताव मूल्यांकन के विभिन्न चरणों में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार संबंधित मंत्रालय, विभाग के साथ व्यापक हितधारक परामर्श किया गया है। मूल्यांकन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में प्राप्त सुझावों को शामिल करने के बाद मंत्रिमंडल नोट के रूप में मिशन दस्तावेज को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 15 फरवरी 2021 से भू-स्थानिक दिशानिर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक निधियों का उपयोग करके उत्पन्न किया गया सभी भू-स्थानिक डेटा, सुरक्षा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से एकत्रित गोपनीय भू-स्थानिक डेटा को छोड़कर, सभी भारतीय संस्थाओं को वैज्ञानिक, आर्थिक और विकासात्मक उद्देश्यों के लिए आसानी से सुलभ कराया जाएगा। उनके उपयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
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