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हरिद्वार: निरंजनी अखाड़े ने स्वामी प्रज्ञानंद को आचार्य महामंडलेश्वर के पद से किया निष्कासित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 12 Jan 2021 12:30 AM IST
स्वामी प्रज्ञानानंद
स्वामी प्रज्ञानानंद - फोटो : अमर उजाला
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने सोमवार को श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर पद के विवाद पर पटाक्षेप कर दिया। उन्होंने निरंजनी अखाड़े के नए आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशनंद गिरि के पट्टाभिषेक से तीन दिन पहले स्वामी प्रज्ञानंद गिरि को आचार्य महामंडलेश्वर पद से निष्कासित कर दिया। स्वामी प्रज्ञानंद को अखाड़े एवं संत समाज से भी बाहर करने की घोषणा कर दी है।



श्री दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पीठाधीश्वर कैलाशानंद गिरि के निरजंनी अखाड़े के नए आचार्य महामंडलेश्वर पद पर विधिवत घोषणा के बाद निरंजनी अखाड़े के वर्तमान आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद गिरि शनिवार को हरिद्वार पहुंचे। स्वामी प्रज्ञानंद ने अखाड़ों पर लेनदेन के आरोप लगाए।


कहा कि वे आचार्य महामंडलेश्वर हैं और त्यागपत्र नहीं देंगे। उनके त्यागपत्र दिए बगैर नए आचार्य महामंडलेश्वर का पट्टाभिषेक संत परंपरा के विरुद्ध है। स्वामी प्रज्ञानंद के इस बयान के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की अध्यक्षता में सोमवार को संतों की बैठक हुई। संतों की रायशुमारी के बाद नरेंद्र गिरि ने स्वामी प्रज्ञानंद को आचार्य महामंडलेश्वर के पद से निष्कासित कर दिया। 

श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि 2019 में विधिवत ढंग से स्वामी प्रज्ञानंद गिरि को आचार्य महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक किया गया, लेकिन इसमें शर्त थी कि आचार्य महामंडलेश्वर की नियुक्ति तभी दी जाएगी जब वे एक साल में अपना अनुभव दिखाएंगे। कहा कि स्वामी प्रज्ञानंद का पट्टाभिषेक कराना उनकी भूल रही। पट्टाभिषेक होने के बाद स्वामी प्रज्ञानंद गायब हो गए और अखाड़े से कोई संपर्क नहीं किया।

कई बार फोन किए कि आएं और अखाड़ों की शाखाओं में जाएं। इस बीच कई महात्मा और महंत ब्रह्मलीन भी हुए। आचार्य का दायित्व होने के नाते उनको आना चाहिए था, लेकिन उन्होंने शोक संदेश तक भेजना उचित नहीं समझा। कहा कि स्वामी प्रज्ञानंद को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी ने भी अपनी परंपराओं से बाहर कर दिया। अब प्रज्ञानंद अखाड़े में नहीं आ सकते हैं। संत समाज से भी बाहर कर दिए हैं। संत समाज के साथ न भोजन कर सकते हैं न उठ बैठ सकते हैं।

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