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दून अस्पताल : आभा आईडी से पर्चे बनाना अनिवार्य, प्रक्रिया में उलझे रहे मरीज
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- कई मरीज परेशान होकर मदद के लिए स्वास्थ्यकर्मियों के पास भी पहुंचे
- एप्लीकेशन डाउनलोड कर उसे लॉगिन कर क्यूआर स्कैन करने बाद ही मिलेगा टोकन
संवाद न्यूज एजेंसी
देहरादून। दून अस्पताल में आभा आईडी से पर्चे बनाने की प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। इसकी तकनीकी प्रक्रिया को पूरी करने में मरीज उलझ रहे हैं। कई लोगों को स्वास्थ्यकर्मियों की मदद लेनी पड़ रही है। ऐसे में उन्हें काफी दिक्कतें हो रही हैं। मंगलवार को जब मरीज पर्चा बनवाने के लिए पहुंचे तो काउंटर पर तैनात कर्मचारियों ने आभा आईडी बनने के बाद ही पर्चा देने की बात कही। यह उनके लिए बिल्कुल नया था। आईडी बनाने के लिए मरीजों को लंबी प्रकिया से गुजरना पड़ा। मरीजों ने बताया कि पहले उन्हाेंने एक एप्लीकेशन डाउनलोड किया। बाद में इसे मोबाइल नंबर के साथ लॉग इन किया। इसके बाद पर्चा काउंटर पर लगे बारकोड में स्कैन किया तब उन्हें टोकन प्राप्त हुआ। फिर काउंटर पर तैनात कर्मियों ने उन्हें पर्चा दिया। इस प्रक्रिया में सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग मरीजों को हुई। बाद में मरीजों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए बिना आभा आईडी के भी पर्चे बनाए गए। अधिकारियों के मुताबिक मरीजों को आभा आईडी से जोड़ने के बाद उनके उपचार संबंधी समस्त जानकारी ऑनलाइन की जा सकेगी। आभा के नोडल डॉ. सुशील ओझा ने बताया कि मरीजों की आभा आईडी बनने के बाद वे सभी ऑनलाइन आ जाएंगे। उनकी जांच रिपोर्ट समेत चिकित्सकीय परामर्श आभा के एप्लीकेशन में मौजूद रहेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देहरादून। दून अस्पताल में आभा आईडी से पर्चे बनाने की प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। इसकी तकनीकी प्रक्रिया को पूरी करने में मरीज उलझ रहे हैं। कई लोगों को स्वास्थ्यकर्मियों की मदद लेनी पड़ रही है। ऐसे में उन्हें काफी दिक्कतें हो रही हैं। मंगलवार को जब मरीज पर्चा बनवाने के लिए पहुंचे तो काउंटर पर तैनात कर्मचारियों ने आभा आईडी बनने के बाद ही पर्चा देने की बात कही। यह उनके लिए बिल्कुल नया था। आईडी बनाने के लिए मरीजों को लंबी प्रकिया से गुजरना पड़ा। मरीजों ने बताया कि पहले उन्हाेंने एक एप्लीकेशन डाउनलोड किया। बाद में इसे मोबाइल नंबर के साथ लॉग इन किया। इसके बाद पर्चा काउंटर पर लगे बारकोड में स्कैन किया तब उन्हें टोकन प्राप्त हुआ। फिर काउंटर पर तैनात कर्मियों ने उन्हें पर्चा दिया। इस प्रक्रिया में सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग मरीजों को हुई। बाद में मरीजों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए बिना आभा आईडी के भी पर्चे बनाए गए। अधिकारियों के मुताबिक मरीजों को आभा आईडी से जोड़ने के बाद उनके उपचार संबंधी समस्त जानकारी ऑनलाइन की जा सकेगी। आभा के नोडल डॉ. सुशील ओझा ने बताया कि मरीजों की आभा आईडी बनने के बाद वे सभी ऑनलाइन आ जाएंगे। उनकी जांच रिपोर्ट समेत चिकित्सकीय परामर्श आभा के एप्लीकेशन में मौजूद रहेगा।