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Chamoli: ग्रीन टी, मसाला टी के बाद अब कंडाली टी भी बाजार में आई, खून की कमी दूर करने सहित जानें ये खास गुण

लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी, संवाद न्यूज एजेंसी, कर्णप्रयाग (चमोली) Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 06 Feb 2026 03:10 PM IST
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सार

कंडाली की चाय भी बाजार में आई है। हार्क ने अलकनंदा कृषि व्यवसाय स्वायत्त सहकारिता महिला समूह के माध्यम से चाय बनाना शुरू किया है। 100 से 150 रुपये प्रति किलो कंडाली की सूखी पत्तियां बिक रहीं हैं।

Nettle tea also arrived in the market Tea production started through a women's group karnaprayag Uttarakhand
नेटल टी - फोटो : AI
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विस्तार

ग्रीन टी, मसाला टी आदि के बाद अब कंडाली यानी नेटल टी भी मार्केट में आ गई है। लोगों को जहां यह चाय खूब पसंद आ रही है वहीं इससे ग्रामीणों की आमदनी भी हो रही है। नेटल की सूखी पत्तियां 100 से 150 रुपये तक में बिक रही हैं।

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हिमालीय क्षेत्रों में होने वाली जंगली घास नेटल यानि कंडाली बारह महीने होती है। अब यह रोजगार का साधन भी बन रही है। कालेश्वर में संचालित हार्क अलकनंदा कृषि व्यवसाय स्वायत्त सहकारिता महिला समूह के माध्यम से कंडाली की चाय बनाने का काम शुरू किया है।

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एक किलो पत्तियों में इसके करीब 40 ग्राम के 25 से अधिक पैकेट तैयार हो रहे हैं। इससे जहां महिला स्वयं सहायता समूह की आय हो रही है वहीं गांवों से कंडाली की पत्तियां लाने वाले ग्रामीणों की भी आय हो रही है। एक साल में हार्क ग्रामीणों को करीब डेढ़ लाख तक का भुगतान कर चुका है।
 

बहुत गुणकारी है कंडाली

नेटल का वैज्ञानिक नाम अर्टिका डायोइका है। कंडाली की सब्जी भी बनाई जाती है। कंडाली की खासियत यह है कि यह पेट की समस्याओं को दूर करता है। इसके सेवन से खून की कमी दूर होती है और हड्डियों को मजबूत बनाने व जोड़ों के दर्द में लाभकारी मानी जाती है।

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महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कंडाली की चाय तैयार की जा रही है। 100 से 150 रुपये प्रति किलो के हिसाब कंडाली की सूखी पत्तियां खरीदी जा रही हैं। कंडाली पहाड़ में रोजगार का बेहतर साधन बन रहा है। कंडाली की चाय की ऑनलाइन खरीदारी हो रही है। इसके अलावा देहरादून और दिल्ली के बाजार में भी बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। - गणेश उनियाल, प्रबंधक हार्क कालेश्वर, कर्णप्रयाग।

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