सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Sandalwood cultivation in Uttarakhand will strengthen the economic condition of farmers

Uttarakhand News: चंदन की खुशबू से महकेगी किसानों की आर्थिकी, शोध में सगंध पौध केंद्र को अच्छे परिणाम

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 09 Feb 2026 01:15 PM IST
विज्ञापन
सार

एक दशक से चंदन की खेती पर चले रहे शोध में सगंध पौध केंद्र को अच्छे परिणाम मिले हैं। रानीपोखरी क्लस्टर में 1500 चंदन के पेड़ लगाए गए। मानकों में चंदन के तेल व लकड़ी की गुणवत्ता सही पाई गई।

Sandalwood cultivation in Uttarakhand will strengthen the economic condition of farmers
चंदन - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार

उत्तराखंड में चंदन की खुशबू से किसानों की आर्थिकी महकेगी। राज्य सगंध पौध केंद्र की ओर से एक दशक से अधिक समय से किए जा रहे शोध में चंदन उगाने में अच्छे परिणाम मिले हैं। चंदन की लकड़ी व तेल की गुणवत्ता मानकों में सही पाई गई है। सगंध पौध केंद्र शोध के आधार पर प्रदेश में चंदन की खेती के लिए कार्ययोजना तैयार करेगा।

Trending Videos

चंदन एक सुगंधित प्रजाति का वृक्ष है। जो अपने उपचारात्मक गुणों के लिए प्रसिद्ध है। चंदन का कई औषधीय उपयोग के साथ धार्मिक व सांस्कृतिक रूप से प्रयोग किया जाता है। सगंध पौध केंद्र ने प्रदेश के किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए रानीपोखरी क्लस्टर में ट्रायल के तौर चंदन के पौध लगाए थे। इसमें चंदन की पैदावार व लकड़ी की गुणवत्ता अच्छी पाई गई। केंद्र ने चंदन की लकड़ी व तेल की सेलाकुई स्थित प्रयोगशाला में जांच की। जिसमें पाया गया कि प्राकृतिक रूप से उगने वाले चंदन की तरह ट्रायल में लगाए गए चंदन की ग्रोथ के साथ लकड़ी व तेल की गुणवत्ता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

बाजार में 2.5 लाख प्रति किलो तक तेल की कीमत

सगंध पौध केंद्र के वैज्ञानिकों के मुताबिक बाजार में चंदन का तेल 2.5 लाख रुपये प्रति किलो व लकड़ी 3500 रुपये प्रति किलो तक मिल रहे हैं। यदि किसान एक हेक्टेयर पर चंदन की खेती करता है तो लकड़ी से तीन करोड़ व तेल से 4.4 करोड़ तक आय प्राप्त कर सकता है।

 

सुगंधित उत्पादों में इस्तेमाल होता है चंदन

चंदन की लकड़ी व तेल का इस्तेमाल सुगंधित उत्पादों में किया जाता है। परफ्यूम के साथ साबुन व अन्य उत्पादों में इसका प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा धार्मिक अनुष्ठानों में हवन व तिलक लगाने में चंदन का विशेष महत्व है। चंदन की लकड़ी से माला, मूर्तियां भी बनाई जाती है। चंदन की सुगंध शांति व तनाव मुक्ति प्रदान करती है।

ये भी पढ़ें...Uttarakhand: दो माह में एक दीवार तक पार नहीं कर पाई शासन की चिट्ठी, अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश का मामला

उत्तराखंड में चंदन का उत्पादन हो सकता है। सगंध पौध केंद्र को शोध में रानीपोखरी में लगाए गए चंदन की गुणवत्ता अच्छी मिली है। आने वाले समय में प्रदेश जिन क्षेत्रों में चंदन की पैदावार हो सकती है, उन क्षेत्रों को चंदन की पैदावार करने के लिए कार्य योजना बनाई जाएगी। जिससे किसानों की आर्थिकी मजबूत हो सके। -नृपेंद्र चौहान, निदेशक सगंध पौध केंद्र, सेलाकुई

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed