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भलाई के लिए शूरा कमेटी का हुआ गठन : शहर काजी
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शूरा कमेटी का गठन किसी के विरोध या सियासत में नहीं बल्कि समाज की भलाई और इंसाफ के लिए हुआ है। मशवरे के लिए बनाई गई कमेटी में उलेमा, सियात को भी शामिल किया गया है। इनके मशवरे से ही अब आगे के निर्णय होंगे। मजहब कोई भी हो बात हमेशा इंसाफ की होनी चाहिए। ये बातें शहर काजी हजरत मुफ्ती हशीम अहमद कासमी ने कहीं।
शनिवार को पलटन बाजार स्थित जामा मस्जिद में शहर काजी और शूरा कमेटी के सदर हजरत मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने प्रेसवार्ता की। शहर काजी ने कहा कि मुसलमानों पर अत्याचार नहीं होना चाहिए। अब जहालत, गरीबी को दूर करने की बात करनी होगी। गरीबी दूर करने के लिए इस्लाम में लिखे तरीकों पर चलेंगे। जुल्म के खिलाफ आवाज उठाएंगे। इसके लिए कानूनी लोगों ने मदद ली जाएगी, उलेमा से मशवरा लेकर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इंसाफ के हक में हम खड़े होंगे, जिसके खिलाफ नाइंसाफी, जुल्म होगा उसके साथ कानूनी कार्रवाई के साथ खड़े होंगे। शूरा कमेटी के सदर हजरत मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने कहा कि बच्चा-बच्चा पढ़ने वाला होना चाहिए। इस्लाम का बुनियादी पैगाम यही है कि समाज की बुनियाद न्याय पर कायम हो।
इंसाफ के लिए लाजमी है कि कानून किसी भी सूरत में खिलौना न बन जाए। लोग कानून को खुद हाथों में लेंगे तो सामाजिक अमन को खतरा होगा। उन्होंने कहा कि विवादों और आरोपों का निपटारा विधिसम्मत ही होना चाहिए। इस मौके पर दिलशाद अहमद कुरैशी, पार्षद मुकीम अहमद, मुफ्ती ताहिर कासमी, आतिफ शेख, नसीम अहमद आदि मौजूद रहे।
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शनिवार को पलटन बाजार स्थित जामा मस्जिद में शहर काजी और शूरा कमेटी के सदर हजरत मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने प्रेसवार्ता की। शहर काजी ने कहा कि मुसलमानों पर अत्याचार नहीं होना चाहिए। अब जहालत, गरीबी को दूर करने की बात करनी होगी। गरीबी दूर करने के लिए इस्लाम में लिखे तरीकों पर चलेंगे। जुल्म के खिलाफ आवाज उठाएंगे। इसके लिए कानूनी लोगों ने मदद ली जाएगी, उलेमा से मशवरा लेकर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इंसाफ के हक में हम खड़े होंगे, जिसके खिलाफ नाइंसाफी, जुल्म होगा उसके साथ कानूनी कार्रवाई के साथ खड़े होंगे। शूरा कमेटी के सदर हजरत मुफ्ती सलीम अहमद कासमी ने कहा कि बच्चा-बच्चा पढ़ने वाला होना चाहिए। इस्लाम का बुनियादी पैगाम यही है कि समाज की बुनियाद न्याय पर कायम हो।
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इंसाफ के लिए लाजमी है कि कानून किसी भी सूरत में खिलौना न बन जाए। लोग कानून को खुद हाथों में लेंगे तो सामाजिक अमन को खतरा होगा। उन्होंने कहा कि विवादों और आरोपों का निपटारा विधिसम्मत ही होना चाहिए। इस मौके पर दिलशाद अहमद कुरैशी, पार्षद मुकीम अहमद, मुफ्ती ताहिर कासमी, आतिफ शेख, नसीम अहमद आदि मौजूद रहे।