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एसआईआर: उत्तराखंड में पिछले करीब एक साल में घट गए 4,53,459 मतदाता, नौ लाख की नहीं हो पाई मैपिंग

आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Fri, 15 May 2026 07:41 AM IST
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सार

उत्तराखंड में पिछले करीब एक साल में 4,53,459 मतदाता घटे हैं। नौ लाख की मैपिंग नहीं हो पाई। मृत्यु, विस्थापन, डुप्लीकेसी की वजह से सालभर में ये वोटर कम हुए हैं।

SIR in Uttarakhand State lost 453,459 voters and mapping of nine lakh voters remained elusive read All Updates
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद
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विस्तार

उत्तराखंड में पिछले करीब एक साल में 4,53,459 मतदाता घट गए हैं। एक जनवरी 2025 को प्रदेश में कुल मतदाता 84,29,459 थे जो कि वर्तमान में 79,76,000 रह गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, मृत्यु, विस्थापन, डुप्लीकेसी, अनुपस्थिति के कारण पूरी प्रक्रिया के बाद इन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

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प्रदेश में 2003 के बाद से चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) नहीं हुआ। इस दौरान तमाम ऐसे मतदाता हैं, जिनकी मृत्यु या विस्थापित होने के बावजूद मतदाता सूची में शामिल थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 84,31,101 मतदाता थे। छह जनवरी 2025 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जो अंतिम मतदाता सूची जारी की थी, उसमें मतदाताओं की कुल संख्या 84,29,459 दर्ज की गई थी।

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मृत्यु, विस्थापित होने के कारण यह संख्या घटी
इस साल जनवरी में मतदाता सूची तो जारी नहीं हुई लेकिन सालभर में चुनाव आयोग ने एएसडी (एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ) सूची पर काम किया। साथ ही डुप्लीकेसी सॉफ्टवेयर की मदद से दो जगह से नाम हटाकर एक जगह किया गया। लिहाजा, 4,53,459 मतदाता कम होने के बाद वर्तमान में प्रदेश में 79,76,000 मतदाता रह गए हैं।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ.विजय कुमार जोगदंडे का कहना है कि मृत्यु, विस्थापित होने के कारण यह संख्या घटी है। उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों में भी एसआईआर हुआ है, ऐसी भी संभावना है कि तमाम वहां के मतदाता वापस लौट गए। उन्होंने इसे सामान्य प्रक्रिया करार दिया।

नौ लाख मतदाताओं का नहीं मिला 2003 का रिकॉर्ड

प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्री एसआईआर के तहत बीएलओ मैपिंग का काम हुआ। 79,76,000 मतदाताओं में से 70 लाख की मैपिंग तो पूरी हो गई है। 9,76,000 मतदाता ऐसे हैं, जिनका 2003 की मतदाता सूची का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया। अब एसआईआर के दौरान इन सभी को गणना प्रपत्र दिए जाएंगे, जिस पर उन्हें 2003 के वोट से संबंधित जानकारी देनी होगी। जानकारी न देने पर या उनकी जानकारी से ईआरओ संतुष्ट न होने पर नोटिस जारी होगा, जिसके बाद उन्हें जवाब देना होगा। जवाब ठीक न हुआ तो वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया जाएगा।

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घबराएं नहीं, फॉर्म-6 से नया वोट भी बनेगा

एसआईआर के दौरान नए वोट बनाने का काम भी जारी रहेगा। इसके लिए फॉर्म-6 भरा जा सकेगा। जिनके वोट नहीं हैं, वो अपने बीएलओ से संपर्क करके फॉर्म भर सकते हैं। ऑनलाइन भी भर सकते हैं।

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