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President Election 2022: उत्तराखंड में क्रास वोटिंग से कांग्रेस में खलबली, बागी की तलाश शुरू
Sat, 23 Jul 2022 02:50 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 23 Jul 2022 02:50 PM IST
सार
उत्तराखंड कांग्रेस में क्रास वोटिंग से खलबली मची है। प्रदेश अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष से कमेटी बनाकर जांच कराने का अनुरोध किया है। नेता प्रतिपक्ष ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण व गंभीर बताया है। कहा है कि मामले में हाईकमान कार्रवाई करेगा।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रपति चुनाव में क्रास वोटिंग को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस में खलबली मची है। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस में उस बागी की तलाश शुरू हो गई है, जिसने राजग प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया। पार्टी के नेता अब एक-दूसरे को ही शक की नजर से देख रहे हैं। मामले को गंभीर मानते हुए प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से एक कमेटी बनाकर मामले की जांच का अनुरोध किया।
इस बीच मामला हाईकमान तक भी पहुंच गया है। लेकिन जब तक पार्टी लाइन से बाहर जाकर वोट करने वाले की पहचान नहीं हो जाती, कोई भी बड़ा नेता खुलकर कुछ कहने से बच रहा है। पहले से बगावत के जख्मों से छलनी कांग्रेस को राष्ट्रपति चुनाव में बड़ा धक्का लगा है। उत्तराखंड से कुल 67 विधायकों ने बीती 18 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में मतदान किया था। कांग्रेस के राजेंद्र भंडारी और तिलकराज बेहड़ अलग-अलग कारणों से मतदान में भाग नहीं लिया था।
इसी तरह से भाजपा के विधायक व परिवहन मंत्री चंदनराम दास अस्पताल में भर्ती होने के कारण वोट नहीं दे पाए थे। इस तरह 70 में से कुल 67 विधानसभा सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। विधानसभा में दलीय स्थिति देखें तो वर्तमान विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के 47, कांग्रेस के 19 विधायक हैं। इसके अलावा बसपा के दो और दो निर्दलीय हैं।
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राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा ने दो निर्दलीय और दो बसपा सदस्यों का विश्वास भी जुटा लिया था। इस तरह राजग की प्रत्याशी मुर्मू को 50 मत ही मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें 51 वोट मिले हैं। साफ है कि यह वोट कांग्रेस विधायक ने दिया है। कांग्रेस के दो विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए थे। इस हिसाब से यूपीए उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को 17 वोट मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें 15 ही वोट मिले।
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इस बीच मामला हाईकमान तक भी पहुंच गया है। लेकिन जब तक पार्टी लाइन से बाहर जाकर वोट करने वाले की पहचान नहीं हो जाती, कोई भी बड़ा नेता खुलकर कुछ कहने से बच रहा है। पहले से बगावत के जख्मों से छलनी कांग्रेस को राष्ट्रपति चुनाव में बड़ा धक्का लगा है। उत्तराखंड से कुल 67 विधायकों ने बीती 18 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में मतदान किया था। कांग्रेस के राजेंद्र भंडारी और तिलकराज बेहड़ अलग-अलग कारणों से मतदान में भाग नहीं लिया था।
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इसी तरह से भाजपा के विधायक व परिवहन मंत्री चंदनराम दास अस्पताल में भर्ती होने के कारण वोट नहीं दे पाए थे। इस तरह 70 में से कुल 67 विधानसभा सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। विधानसभा में दलीय स्थिति देखें तो वर्तमान विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के 47, कांग्रेस के 19 विधायक हैं। इसके अलावा बसपा के दो और दो निर्दलीय हैं।
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राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा ने दो निर्दलीय और दो बसपा सदस्यों का विश्वास भी जुटा लिया था। इस तरह राजग की प्रत्याशी मुर्मू को 50 मत ही मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें 51 वोट मिले हैं। साफ है कि यह वोट कांग्रेस विधायक ने दिया है। कांग्रेस के दो विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए थे। इस हिसाब से यूपीए उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को 17 वोट मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें 15 ही वोट मिले।
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
एक वोट निरस्त हो गया था, जबकि एक वोट किसी विधायक ने पार्टी लाइन से बाहर जाकर राजग प्रत्याशी को दिया। इधर, इस मामले में पार्टी के बड़े नेता कुछ भी कहने से बच रहे हैं। पार्टी विधानमंडल दल के नेता यशपाल आर्य ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
यह गंभीर मामला है। मैंने इस संबंध में नेता प्रतिपक्ष से बात की है। उनसे एक कमेटी बनाकर मामले की जांच का अनुरोध किया है।- करन माहरा, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर मसला है। पार्टी हाईकमान इस पर नजर बनाए हुए है। क्रास वोटिंग करने वाले सदस्य के खिलाफ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही कार्रवाई की जाएगी।- यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष
यह गंभीर मामला है। मैंने इस संबंध में नेता प्रतिपक्ष से बात की है। उनसे एक कमेटी बनाकर मामले की जांच का अनुरोध किया है।- करन माहरा, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर मसला है। पार्टी हाईकमान इस पर नजर बनाए हुए है। क्रास वोटिंग करने वाले सदस्य के खिलाफ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही कार्रवाई की जाएगी।- यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष