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Dehradun News: बारहखड़ी से सुधरेगी हिंदी भाषा, बदलनी होगी शिक्षण पद्धति
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स्कूली बच्चों में हिंदी भाषा की कमजोर होती पकड़ को लेकर शिक्षकों ने चिंता जताई। उनका कहना है कि बच्चों की हिंदी सुधारने के लिए बुनियादी स्तर से शुरुआत करनी होगी, जिसमें बारहखड़ी (12 खड़ी) का नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है। इसके साथ ही शिक्षण पद्धति में सुधार और सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाने पर भी जोर दिया जाना चाहिए।
वर्तमान समय में बच्चे अंग्रेजी और अन्य भाषाओं की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिससे हिंदी के मूलभूत ज्ञान में कमी देखी जा रही है। कई छात्र सामान्य शब्दों की वर्तनी तक सही नहीं लिख पा रहे हैं। ऐसे में बारहखड़ी का अभ्यास बच्चों की पढ़ने-लिखने की क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसके लिए हमें निचले स्तर से ही तैयारी करनी होगी। इसके साथ ही हमें विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान देना होगा। दीपाली जुगरान, प्रधानाचार्य, गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज
विद्यालयों में हिंदी विषय को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे व्यवहारिक रूप से सिखाने पर जोर देना होगा। इसके लिए नियमित लेखन अभ्यास, शुद्ध उच्चारण और पठन-पाठन की आदत विकसित कराना जरूरी है। इसके अलावा अभिभावकों को भी बच्चों के साथ हिंदी में संवाद बढ़ाना चाहिए, ताकि भाषा के प्रति उनकी रुचि विकसित हो सके। साथ ही विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रणाली लागू कर, शिक्षकों को भी समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाए। हरलीन कौर चौधरी, प्रधानाचार्य, एडिफाई वर्ल्ड स्कूल
अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में हिंदी भाषा की स्थिति और कमजोर हो सकती है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है। हिंदी सुधारने के लिए हमें बच्चों को बारहखड़ी और वर्णमाला का अभ्यास कराना होगा। इसके अलावा शब्दों के उच्चारण और लिखने पढ़ने की आदत को विकसित करना होगा। साथ ही अगर हम मानक हिंदी के अनुसार चलेंगे तो बच्चे आसानी से हमारी मातृभाषा को समझ और लिख सकेंगे। डॉ. मंजू सकलानी, हिंदी विभागाध्यक्ष, विल फील्ड स्कूल
बारहखड़ी का नियमित अभ्यास, लेखन और पठन अभ्यास से ही बच्चों की हिंदी सुधारी जा सकती है। इसके अलावा शिक्षकों और अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों की वर्तनी और उच्चारण की गलतियों को नजरअंदाज न करें, बल्कि तुरंत सुधार करना होगा। साथ ही रोजमर्रा की पढ़ाई में हिंदी को प्राथमिकता देनी होगी और स्कूल में हिंदी निबंध, लेखन, वाद-विवाद और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए। अनिता जोशी, प्रधानाचार्य, भवानी बालिका इंटर कॉलेज
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विद्यालयों में हिंदी विषय को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे व्यवहारिक रूप से सिखाने पर जोर देना होगा। इसके लिए नियमित लेखन अभ्यास, शुद्ध उच्चारण और पठन-पाठन की आदत विकसित कराना जरूरी है। इसके अलावा अभिभावकों को भी बच्चों के साथ हिंदी में संवाद बढ़ाना चाहिए, ताकि भाषा के प्रति उनकी रुचि विकसित हो सके। साथ ही विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रणाली लागू कर, शिक्षकों को भी समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाए। हरलीन कौर चौधरी, प्रधानाचार्य, एडिफाई वर्ल्ड स्कूल
अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में हिंदी भाषा की स्थिति और कमजोर हो सकती है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है। हिंदी सुधारने के लिए हमें बच्चों को बारहखड़ी और वर्णमाला का अभ्यास कराना होगा। इसके अलावा शब्दों के उच्चारण और लिखने पढ़ने की आदत को विकसित करना होगा। साथ ही अगर हम मानक हिंदी के अनुसार चलेंगे तो बच्चे आसानी से हमारी मातृभाषा को समझ और लिख सकेंगे। डॉ. मंजू सकलानी, हिंदी विभागाध्यक्ष, विल फील्ड स्कूल
बारहखड़ी का नियमित अभ्यास, लेखन और पठन अभ्यास से ही बच्चों की हिंदी सुधारी जा सकती है। इसके अलावा शिक्षकों और अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों की वर्तनी और उच्चारण की गलतियों को नजरअंदाज न करें, बल्कि तुरंत सुधार करना होगा। साथ ही रोजमर्रा की पढ़ाई में हिंदी को प्राथमिकता देनी होगी और स्कूल में हिंदी निबंध, लेखन, वाद-विवाद और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए। अनिता जोशी, प्रधानाचार्य, भवानी बालिका इंटर कॉलेज