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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Tiger population in Uttarakhand rose from 178 to 560 over 18 years 81 personnel not recruited for STPF

Uttarakhand: प्रदेश में 18 वर्षों में 178 से 560 हुए बाघ, एसटीपीएफ में नहीं हुई 81 कर्मियाें की भर्ती

Mon, 27 Jul 2026 10:08 AM IST
Renu Saklani विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Mon, 27 Jul 2026 10:08 AM IST
सार

नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथाॅरिटी ने वर्ष 2008-2009 में बाघों को शिकारियों से बचाने और सुरक्षा को लेकर एसटीपीएफ बनाने का फैसला किया था। पिछले 18 वर्षों में बाघों की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़कर 560 तक पहुंच गई है।

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Tiger population in Uttarakhand rose from 178 to 560 over 18 years 81 personnel not recruited for STPF
बाघ - फोटो : संवाद

विस्तार

राज्य में पिछले 18 वर्षों में बाघों की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़कर 560 तक पहुंच गई, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए प्रस्तावित स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) अब तक अस्तित्व में नहीं आ सकी है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के लिए स्वीकृत 81 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो पाई है। वन विभाग का कहना है कि भर्ती का अधियाचन पहले ही अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजा जा चुका है।

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राज्य में 2008 में बाघों की संख्या 178 थी। इसमें 164 बाघ केवल कार्बेट टाइगर रिजर्व में होने का अनुमान था। नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथाॅरिटी ने वर्ष 2008-2009 में बाघों को शिकारियों से बचाने और सुरक्षा को लेकर एसटीपीएफ बनाने का फैसला किया। इसके तहत कार्बेट, दुधवा और रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एसटीपीएफ का गठन होना था।

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इसके लिए वित्तीय सहायता भी एनटीसीए के माध्यम से उपलब्ध कराई जानी थी। लेकिन वन महकमा के लचर सिस्टम के चलते करीब 18 साल बीत जाने के बाद भी एक भी कर्मचारी की भर्ती नहीं हो सकी है। इस बीच बाघों की संख्या में खासा इजाफा हो गया। वर्ष-2022 की गणना में बाघों की संख्या राज्य में 560 तक पहुुंच गई, इसमें केवल कार्बेट में ही 260 बाघ है। वहीं, फोर्स के गठन की बात करें तो अधियाचन अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को पिछले वर्ष को भेजा गया था।

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17 वन महकमे के मुखिया बदल चुके

18 साल की अवधि में वन विभाग में एक-दो नहीं बल्कि 17 प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) बदल गए। इसके अलावा कई प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव-मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक बने, लेकिन फोर्स का गठन नहीं हो सका है।

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एसटीपीएफ के गठन के लिए वन मुख्यालय से पिछले वर्ष ही अधियाचन भेजा जा चुका है। आयोग की तरफ से कुछ जानकारी मांगी गई थी उसे भी उपलब्ध कराया गया है। -प्रसन्न पात्रो, मुख्य वन संरक्षक मानव संसाधन
 

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