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विशेष सत्र: सीएम धामी बोले- नारी शक्ति के हित में लेते रहेंगे निर्णय, अधिकार मिलने तक चैन से नहीं बैठेंगे

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Tue, 28 Apr 2026 08:16 PM IST
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सार

Uttarakhand Assembly Special Session: सीएम ने कहा, विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि लोकसभा में ही गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

Uttarakhand Assembly Special Session on Women Reservation CM Dhami Says We Will Continue to Take Decisions
सदन में सीएम धामी - फोटो : सूचना विभाग
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विस्तार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, हमारी सरकार नारी शक्ति के हित में निर्णय लेते रहेंगे। जब तक महिलाओं को अधिकार नहीं मिल जाता है, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। महिला सशक्तीकरण के प्रयासों को किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

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विधानसभा के विशेष सत्र में नारी सम्मान-लोकतंत्र अधिकार विषय पर चर्चा के दौरान सीएम ने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन बिल को यथाशीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सर्वसम्मति संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा। सीएम ने राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही उत्तराखंड में नारी शक्ति का प्रतीक गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन, कमला पंत जैसी महिलाओं को नमन करने के साथ किया।
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नारी शक्ति अब केवल सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही है। चंद्रयान मिशन से लेकर सेना, वायु सेना में अग्रिम पंक्ति के मोर्चों पर महिलाएं काम कर रही है। इसके साथ खेलों में भी अग्रणी भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए थे। इस ऐतिहासिक अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। यह प्रयास मातृशक्ति की संख्या बढ़ाने का प्रयास भर नहीं था, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी कदम था। 2029 के लोकसभा चुनाव तक देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक प्रयास किया। परंतु विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया। विपक्षी दल के नेता तालियां बजा रहे थे, यह दृश्य को देखकर महाभारत की याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।

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विपक्ष कर रहा भ्रम फैलाने का प्रयास
सीएम ने कहा, विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि लोकसभा में ही गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, इसीलिए सीटें बढ़ाने का प्राविधान बिल में रखा गया। विपक्ष ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के बारे में कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रधानमंत्री लोकसभा में स्पष्ट कह चुके थे की यदि ये बिल पास हो जाएगा तो इसका पूरा श्रेय वो विपक्ष को देने को तैयार हैं।

नारी सशक्तीकरण के लिए जेंडर बजट में बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पांच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिए पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। महिला-पुरुष लिंगानुपात में 12 अंकों की वृद्धि हुई है। संस्थागत प्रसव 61 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गया है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 8.2 प्रतिशत की उच्च ब्याज दर के साथ टैक्स फ्री बचत की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अब तक चार करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं और 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है। यह काम कांग्रेस के समय भी हो सकते थे। राज्य सरकार ने इस वर्ष जेंडर बजट के तहत लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है।

उत्तराखंड में बढ़ जाती 105 सीटें, विपक्ष का कुछ नहीं जाता
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 105 हो सकती थी, जिसमें से 35 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती थी। इसी तरह सांसदों कि संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो जाती, इससे हर किसी का फायदा ही था, फिर भी विपक्ष ने बिल पास नहीं होने दिया। सीटें बढ़ने से विपक्ष का कुछ नहीं जाता। इतना जरूर था कि सामान्य घरों से महिलाएं राजनीति में आ जाती तो कुछ दलों की वंशवादी राजनीति की दुकानें बंद हो जाएंगी।

एक दिन जरूर पूरा होगा संकल्प
सीएम धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यूसीसी से मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। अब यूसीसी की मांग पूरे देश में उठ रही है। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य भी अवश्य करेगी।

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