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उत्तराखंड: यात्री का सामान चोरी होने पर रेलवे को देना होगा मुआवजा, आयोग ने 47,222 रुपये चुकाने के दिए आदेश

Wed, 21 Oct 2026 02:17 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Wed, 21 Oct 2026 02:17 PM IST
सार

ट्रेन में सफर के दौरान यात्री का सामान चोरी होने के मामले में उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलवे को मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आयोग ने 37,222 रुपये की भरपाई के साथ 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश दिया। हालांकि, मानसिक पीड़ा के लिए जिला आयोग की ओर से तय 25,000 रुपये की राशि को हटा दिया गया है।

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Uttarakhand consumer commission orders railways to pay 37,222 compensation for passenger stolen luggage
ट्रेन - फोटो : संवाद

विस्तार

उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलवे को एक यात्री के सामान चोरी होने पर 37,222 रुपये का मुआवजा और 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च देने का निर्देश दिया है। आयोग ने जिला आयोग के आदेश को संशोधित करते हुए मानसिक पीड़ा के लिए दिए गए 25,000 रुपये हटा दिए। यह आदेश लीला धर डोभाल और अन्य की शिकायत पर दिया गया है, जिनके यात्रा के दौरान सामान की चोरी हुई थी।

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यह घटना दो जुलाई को मथुरा रेलवे स्टेशन पर हुई थी। लीला धर डोभाल और उनके परिवार के सदस्य उदयपुर से नई दिल्ली जा रहे थे। वे मेवाड़ एक्सप्रेस के एसी कोच बी-2 में यात्रा कर रहे थे। ट्रेन जब मथुरा स्टेशन पर धीमी हुई, तो कुछ अज्ञात लोग कोच में घुस गए। उन्होंने लीला धर डोभाल और वीणा डोभाल का कीमती सामान और नकदी चुरा ली। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कोच के दरवाजे खुले थे। साथ ही, कोच अटेंडेंट, रेलवे सुरक्षा बल कर्मी और टीटीई भी उपलब्ध नहीं थे। रेलवे ने अपनी लापरवाही से इन्कार किया था।

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देहरादून जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 11 मई 2022 को शिकायतकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया था। जिला आयोग ने रेलवे को 37,222 रुपये मुआवजा, 25,000 रुपये मानसिक पीड़ा और 10,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश दिया था। रेलवे ने इस फैसले को राज्य आयोग में चुनौती दी थी।

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राज्य आयोग ने माना कि रात में आरक्षित कोच के दरवाजे खुले रखना रेलवे की लापरवाही थी। आयोग ने कहा कि कोच अटेंडेंट या पुलिस कर्मियों की अनुपस्थिति भी लापरवाही दर्शाती है। राष्ट्रीय आयोग के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही से हुई चोरी के लिए रेलवे जिम्मेदार है। आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए दिए गए 25,000 रुपये को हटा दिया। साथ ही, मुआवजे पर ब्याज दर नौ फीसदी से घटाकर सात फीसदी वार्षिक कर दी।


 

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