Uttarakhand: पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन, उत्तराखंड में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित
उत्तराखंड के पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे राज्य से शोक की लहर है।
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लंबे समय से बीमार चल रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया है। उनके आकस्मिक निधन के चलते प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। पूर्व सीएम की अंतेष्टि 20 मई को पुलिस सम्मान के साथ सम्पन्न होगी।
उत्तराखंड ने खोया सशक्त नेतृत्व : निशंक
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने पूर्व सीएम मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़़ी (सेनि) के निधन पर कहा कि मेरे जीवन से एक ऐसे आत्मीय अभिभावक, मार्गदर्शक और स्नेहिल संरक्षक के दूर हो जाने का असहनीय दुःख है, जिसकी रिक्तता कभी भरी नहीं जा सकेगी। उनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन, सादगी और जनसेवा का प्रेरणादायी उदाहरण था। भारतीय सेना में मेजर जनरल के रूप में मातृभूमि की सेवा करने के बाद उन्होंने राजनीति में भी राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ जनहित को अपना सर्वोच्च ध्येय बनाया। राजनीति के अनेक पड़ाव आए। परिस्थितियां बदलीं लेकिन उनका स्नेह, विश्वास और आत्मीय मार्गदर्शन कभी नहीं बदला। आज उनके जाने से केवल उत्तराखंड ने अपना एक सशक्त नेतृत्व खोया है बल्कि मैंने व्यक्तिगत रूप से अपने जीवन का एक आत्मीय संरक्षक खो दिया है।
राज्यपाल ने जताया शोक
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) के निधन पर शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड के विकास, सुशासन और सैनिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने में मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
सुशासन, पारदर्शिता व विकास की नई इबारत लिखी : भरत चौधरी
कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी ने कहा, पूर्व सीएम मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) का निधन स्तब्ध करने वाला है। उन्होंने सुशासन, पारदर्शिता व विकास की नई इबारत लिखी। उनके कठोर व जनहित के निर्णय आज भी मिसाल हैं। सैन्य पृष्ठभूमि से निकलकर सार्वजनिक जीवन में आकर उन्होंने साबित किया कि चरित्र, निष्ठा व राष्ट्रसेवा ही सबसे बड़ी राजनीति है। उन्होंने गहरा शोक प्रकट करते हुए भगवान से परिवार को दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
राज्य आंदोलन की आवाज केंद्र तक पहुंचाई : त्रिवेंद्र रावत
पूर्व सीएम एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, बीसी खंडूड़ी ने सैनिक जीवन में राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया, वहीं सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, सुशासन और विकास की नई पहचान बनाई। उत्तराखंड राज्य आंदोलन की आवाज को संसद और केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुंचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी ऐतिहासिक योजनाओं के माध्यम से उन्होंने देश के गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं,पूरे देश के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है।
उत्तराखंड के विकास के प्रति समर्पित थे : महाराज
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा वे एक अनुशासित सैनिक, कुशल प्रशासक और उत्तराखंड के विकास के प्रति समर्पित नेता थे। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पारदर्शी शासन और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विशेष बल दिया। उनका निधन उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवारजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति देने की ईश्वर से कामना की।
कुशल प्रशासक व अनुशासन थी पहचान : जोशी
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने बसंत विहार पहुंचकर पूर्व सीएम मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कहा, एक वीर सैनिक के रूप में मां भारती की सेवा करने से लेकर, एक कुशल प्रशासक और राजनेता के रूप में उत्तराखंड के नव निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय है। शोकाकुल परिजनों को दुख में सहने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की।
सादगी, ईमानदारी व अनुशासन की मिसाल थे खंडूड़ी
बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि वे सादगी, ईमानदार व अनुशासन की मिसाल थे। उनके साथ मुझे करीब से काम करने का सौभाग्य मिला। एक जांबाज फौजी का कड़क अनुशासन, संवेदनशील राजनेता का दिल एक साथ धड़कता था। अटल जी की सरकार में रोड किंग के रूप में देश में स्वर्णिम चतुर्भुज की नींव रखने से लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर पहाड़ों में सड़कों का जाल बिछाने में उनका ऐतिहासिक योगदान रहा। उनकी बेदाग राजनीतिक विरासत हमेशा भाजपा का मार्गदर्शन करती रहेगी।