इंटरव्यू: राजनीति में सब कुछ जायज नहीं, खून पसीने से सींचा है पार्टी को, त्रिवेंद्र के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत
वरिष्ठ नेता सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अमर उजाला डिजिटल की सीरीज शतरंज में अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल से लेकर लोकसभा क्षेत्र, पार्टी और युवाओं के बारे में खुलकर अपने विचार रखे।
विस्तार
भाजपा के वरिष्ठ नेता सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत साफगोई के लिए जाने जाते हैं। उनके दिए बयान अक्सर राजनीतिक सुर्खियां बनते हैं और कई अर्थ निकाले जाते थे। संघ के प्रचारक से राजनीति का सफर तय करने, बतौर मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल, युवाओं में आक्रोश, राज्य की धामी सरकार के कामकाज और विधानसभा चुनाव खासकर अपने लोकसभा क्षेत्र हरिद्वार को लेकर अमर उजाला के संपादक अनूप वाजपेयी से बातचीत की। पढ़िए इंटरव्यू के कुछ अंश...
सवाल: राज्य बने 25 साल हो गए हैं। आप उत्तराखंड आंदोलन से भी जुड़े रहे। क्या राज्य सही दिशा में आगे बढ़ा है?
जवाब: राज्य में अस्थिरता का वातावरण बना रहता है, जो उसके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। हालांकि विकास हुआ है, रोजगार के अवसर बढ़े हैं और प्रति व्यक्ति आय तथा बजट में प्रगति हुई है। पहले लखनऊ की नजर पहाड़ की कंदराओं तक नहीं पहुंचती थी, लेकिन आज दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी सीएम से मिल सकते हैं। लोकतंत्र में चुने गए प्रतिनिधियों का असर विकास, समाज और नई पीढ़ी पर पड़ता है। इसकी खासियत यह है कि यदि प्रतिनिधि पसंद नहीं है, तो अगली बार उसे बदलकर किसी अच्छे व्यक्ति को चुन सकते हैं।
सवाल: क्या नेता युवाओं को आकर्षित करने में विफल रहे हैं?
जवाब: मुझे लगता है कि इन घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं से दिशा दी जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति को अच्छी तरह संभाला। विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हें मारपीट या अराजकता का माध्यम नहीं बनना चाहिए। राहुल गांधी के चुनाव आयोग के घेराव के दौरान आकाशवाणी कार्यालय में घुसने जैसी घटनाएं भी उचित नहीं हैं। पीढ़ियों तक सत्ता संभालने वाले किसी पार्टी के वरिष्ठ नेता का ऐसा आचरण अराजकता फैलाता है। अराजकता फैलाने वालों को नियंत्रित करना जरूरी है।
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सवाल: धामी सरकार के पांच साल के कार्यकाल को कैसे देखते हैं?
जवाब: पांच साल का कार्यकाल अच्छा रहा है। पांच नहीं, भाजपा का दस साल का कार्यकाल है। 2017 से भाजपा सरकार उत्तराखंड में काम कर रही है। जब मैं सीएम बना था, तब अगले 10-15 साल तक भाजपा सरकार बनाए रखने और राज्य की तरक्की के लिए काम करने का लक्ष्य था। धामी जी उसी काम को आगे बढ़ा रहे हैं। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के माध्यम से हर परिवार को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच दिया गया। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, होम स्टे और एडवेंचर टूरिज्म से अवसर बढ़े हैं। धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की है और करीब 36 हजार लोगों को सरकारी नौकरियां दी हैं। राज्य में विकास के कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं।
सवाल: आपके लोकसभा क्षेत्र हरिद्वार में विपक्ष हमेशा सक्रिय रहा किस तरह देख रहे हैं?
जवाब: हर क्षेत्र का अपना सामाजिक और राजनीतिक समीकरण होता है। विपक्ष हरिद्वार को अपने अनुकूल मानता है, लेकिन भाजपा भी वहां जीत सकती है। पार्टी हरिद्वार ग्रामीण, लक्सर, खानपुर, झबरेड़ा, भगवानपुर और ज्वालापुर जैसी सीटें जीत चुकी है। साफ छवि वाले प्रत्याशी, मेहनत, विनम्र व्यवहार और जनता के मिजाज को समझना जरूरी है। जनप्रतिनिधि जनता के सेवक हैं। अहंकार छोटी बात को भी बड़ा बना सकता है। सही रणनीति और अच्छे प्रत्याशियों के साथ हरिद्वार की पांच-छह और सीटें जीती जा सकती हैं।
सवाल: आपके बयानों का सोशल मीडिया पर गलत अर्थ निकाला जाता है। इन्हें पार्टी के खिलाफ माना जाता है?
जवाब: ऐसा सोचने वालों को अपनी सोच पर विचार करना चाहिए। हमने इस पार्टी को सींचा है और इसके लिए खून-पसीना बहाया है। कोई गलत काम करता है, तो उसे गलत कहना जरूरी है। कोई सही दिशा में नहीं जा रहा है, तो उसे आगाह करना चाहिए। ऐसा नहीं करेंगे, तो आंतरिक लोकतंत्र कैसे बचेगा? यदि कोई जानबूझकर गलत व्याख्या करता है, तो उसके बारे में कुछ नहीं किया जा सकता।