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ज्ञान, आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत से उत्तराखंड की पहचान : सीएम

Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 07:06 PM IST
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Uttarakhand is identified with Sanskrit, the language of knowledge and faith: CM
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- मुख्यमंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति से किया सम्मानित
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की पहचान ऊंचे पर्वतों व ऐतिहासिक मंदिरों से ही नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत से भी है। वेदों से लेकर उपनिषदों तक, रामायण से लेकर महाभारत तक, आयुर्वेद से लेकर खगोलशास्त्र तक, गणित से लेकर दर्शनशास्त्र तक हमारे ज्ञान की जड़ें संस्कृत में ही निहित हैं। संस्कृत हमारे अतीत की स्मृति के साथ भविष्य की संभावना भी है।
रविवार को मुख्य सेवक सदन में संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों को गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति प्रदान की। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केंद्र, ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ कर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन किया।
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सीएम ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत को आधुनिक और व्यावहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के विशेष प्रयास किए गए। संस्कृत साहित्य को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जा रहा है। एआई के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए स्वरूप में सबके सामने रखा जा रहा है। सभी जिलों में आदर्श संस्कृत ग्रामों की स्थापना की गई है। राज्य में पहली बार गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की गई है। सरकार संस्कृत विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता, शोध कार्यों में सहयोग व रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर इसे नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के प्रयास कर रही है।
संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, सरकार ने राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सुविधाओं को बढ़ाया गया है। प्रत्येक जिले में एक-एक संस्कृत ग्राम बनाए गए। इस मौके विधायक सविता कपूर, खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी मौजूद रहे।
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