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शिक्षक बोले : बिना सहमति टीईटी पर निर्णय लिया तो होगा बहिष्कार
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सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी की नई व्यवस्था तैयार किए जाने की चर्चाओं पर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध किया है। शिक्षकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि बिना सहमति टीईटी पर कोई निर्णय लिया गया तो वह उसका पूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे।
उधर, टीईटी की बाध्यता समाप्त करने, पुरानी पेंशन बहाली और गोल्डन कार्ड की खामियां दूर करने की मांग के लिए शिक्षकों ने 22 जून को सचिवालय कूच करने का फैसला लिया है। शिक्षकों के इस आंदोलन को विभिन्न कर्मचारी, शिक्षक व पेंशनर संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। दरअसल, वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपे जाने का संघ कड़ा विरोध कर रहा है। कार्यक्रम संयोजक व संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह रावत ने बताया कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि सरकार सेवारत शिक्षकों को टीईटी आवेदन के लिए अर्ह बनाने संबंधी ड्राफ्ट तैयार कर रही है। जिससे प्रदेशभर के प्रारंभिक शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई है।
शिक्षकों ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में टीईटी से जुड़े मुद्दे का स्थायी समाधान चाहती है तो सेवारत शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इसके तहत वर्ष में कम से कम तीन बार या प्रत्येक तिमाही में एक बार सेवारत टीईटी आयोजित की जानी चाहिए जिससे शिक्षकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। बताया कि 22 जून को होने वाले सचिवालय कूच के संबंध में बृहस्पतिवार को बैठक कर रणनीति बनाई गई।
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उधर, टीईटी की बाध्यता समाप्त करने, पुरानी पेंशन बहाली और गोल्डन कार्ड की खामियां दूर करने की मांग के लिए शिक्षकों ने 22 जून को सचिवालय कूच करने का फैसला लिया है। शिक्षकों के इस आंदोलन को विभिन्न कर्मचारी, शिक्षक व पेंशनर संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। दरअसल, वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपे जाने का संघ कड़ा विरोध कर रहा है। कार्यक्रम संयोजक व संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह रावत ने बताया कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि सरकार सेवारत शिक्षकों को टीईटी आवेदन के लिए अर्ह बनाने संबंधी ड्राफ्ट तैयार कर रही है। जिससे प्रदेशभर के प्रारंभिक शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई है।
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शिक्षकों ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में टीईटी से जुड़े मुद्दे का स्थायी समाधान चाहती है तो सेवारत शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इसके तहत वर्ष में कम से कम तीन बार या प्रत्येक तिमाही में एक बार सेवारत टीईटी आयोजित की जानी चाहिए जिससे शिक्षकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। बताया कि 22 जून को होने वाले सचिवालय कूच के संबंध में बृहस्पतिवार को बैठक कर रणनीति बनाई गई।