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Rudraprayag: बंजर खेतों में उगाई चाय अब महिलाओं की भी हो रही आय, पलायन से जूझ रहे गांवों में भी नई उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी, जखोली (रुद्रप्रयाग)
Published by: Renu Saklani
Updated Fri, 19 Jun 2026 01:49 PM IST
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सार
उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड की जखोली ब्लॉक में की गई पहल रंग लाई है। यहां बंजर खेतों में चाय उत्पादन हो रहा है, जिससे अब महिलाओं की भी आय हो रही है।
जखोली ब्लॉक के बंजर खेतों में उगाई चाय
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
जखोली ब्लॉक के कई गांवों में कभी जो जमीन बंजर पड़ी थी वहां आज चाय की हरियाली है। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड की पहल से तैयार किए गए चाय बागान न सिर्फ महिलाओं को रोजगार दे रहे हैं बल्कि पलायन से जूझ रहे गांवों में नई उम्मीद भी जगा रहे हैं।
चाय विकास बोर्ड ने ललूड़ी, पूजारगांव, कंपनियां, पोंठी, चौरा और लौंगा गांवों में करीब 70 हेक्टेयर भूमि पर चाय के बागान विकसित किए हैं। बोर्ड के पर्यवेक्षक कुशाल सिंह रावत ने बताया कि इन बागानों में करीब 350 महिलाओं को रोजगार मिला है और वर्तमान में सालाना लगभग सात हजार किलोग्राम चायपत्ती का उत्पादन हो रहा है।
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कंपनियां गांव की संतोषी देवी कहती हैं कि पहले खेत खाली पड़े रहते थे लेकिन अब इन्हीं खेतों से परिवार की आय बढ़ रही है। गुड्डी देवी का कहना है कि गांव में रोजगार मिलने से महिलाओं को घर के पास ही काम मिल रहा है। महीने में करीब 10 हजार की आमदनी भी हो रही है।
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वहीं पांखु देवी और बबिता देवी का मानना है कि यदि चाय उत्पादन बढ़ा तो पलायन की रफ्तार भी कम होगी और युवाओं को गांव में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे। उद्यान विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र प्रसाद कुकसाल के अनुसार चाय की खेती पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका का मजबूत विकल्प बन सकती है। बागानों की उम्र बढ़ने के साथ उत्पादन में भी वृद्धि होगी।