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Dehradun News: उपराष्ट्रपति ने यूकॉस्ट महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत को किया सम्मानित
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- जनजातीय क्षेत्रों में कौशल विकास, डिजिटल व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता : पंत
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। भारत मंडपम नई दिल्ली में आयोजित विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से जनजातीय जीवन में परिवर्तन विषय पर सेमिनार में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत को विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया।
तकनीकी सत्र में प्रो. पंत ने बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी न केवल जीवन को सरल बनाते हैं, बल्कि जनजातीय समुदायों की आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्थानीय संसाधनों व पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर सतत विकास की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रो. पंत ने कहा, उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। जनजातीय क्षेत्रों में कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। यदि विज्ञान को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू किया जाए, तो यह जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन ला सकता है, साथ ही राज्य के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इस मौके पर शिक्षाविद डॉ. रीमा पंत, प्रहलाद अधिकारी, डॉ. राजेंद्र राणा, विकास नौटियाल, अर्चित पांडेय, कुमार रोशन, संदीप मनराल मौजूद रहे।
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देहरादून। भारत मंडपम नई दिल्ली में आयोजित विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से जनजातीय जीवन में परिवर्तन विषय पर सेमिनार में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत को विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया।
तकनीकी सत्र में प्रो. पंत ने बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी न केवल जीवन को सरल बनाते हैं, बल्कि जनजातीय समुदायों की आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्थानीय संसाधनों व पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर सतत विकास की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
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प्रो. पंत ने कहा, उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। जनजातीय क्षेत्रों में कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। यदि विज्ञान को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू किया जाए, तो यह जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन ला सकता है, साथ ही राज्य के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इस मौके पर शिक्षाविद डॉ. रीमा पंत, प्रहलाद अधिकारी, डॉ. राजेंद्र राणा, विकास नौटियाल, अर्चित पांडेय, कुमार रोशन, संदीप मनराल मौजूद रहे।