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Dehradun News: सीएम से मिलीं महिला आयोग की अध्यक्ष, निर्दोषों पर दर्ज प्राथमिकी वापस लेने का आग्रह
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- ऋषिकेश में वन भूमि से संबंधित सर्वे व अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
देहरादून। ऋषिकेश में वन भूमि से संबंधित सर्वे व अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के संबंध में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। उन्होंने सीएम को एक पत्र सौंपकर आग्रह किया कि इस प्रकरण में जिन निर्दोष नागरिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, उन्हें जनहित में वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि वन भूमि के सर्वे व अतिक्रमण हटाने के उद्देश्य से पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची थी। जहां असमंजस और भ्रम का वातावरण बन गया, जिससे काफी नागरिक वहां एकत्र हो गए। घटना के बाद बड़ी संख्या में वहां मौजूद लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। महिला आयोग ने पत्र में उल्लेख किया है कि यह संपूर्ण घटनाक्रम किसी भी प्रकार के सुनियोजित विरोध या शासन-प्रशासन के प्रति अवमानना का परिणाम नहीं था, बल्कि परिस्थितिजन्य असमंजस व भय के वातावरण में उत्पन्न हुआ था। इस कारण तमाम निर्दोष लोग भी कार्रवाई की जद में आ गए हैं, जिनमें से कई अपने परिवार के एकमात्र भरण-पोषणकर्ता हैं। आयोग की अध्यक्ष ने सीएम धामी से अपेक्षा जताई है कि सरकार इस पूरे प्रकरण को मानवीय एवं संवेदनशील दृष्टिकोण से देखते हुए निर्दोष नागरिकों पर दर्ज प्राथमिकी वापस लेने के निर्देश प्रदान करे, जिससे प्रभावित परिवारों को मानसिक संबल मिले और शासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो।
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देहरादून। ऋषिकेश में वन भूमि से संबंधित सर्वे व अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के संबंध में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। उन्होंने सीएम को एक पत्र सौंपकर आग्रह किया कि इस प्रकरण में जिन निर्दोष नागरिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, उन्हें जनहित में वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि वन भूमि के सर्वे व अतिक्रमण हटाने के उद्देश्य से पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची थी। जहां असमंजस और भ्रम का वातावरण बन गया, जिससे काफी नागरिक वहां एकत्र हो गए। घटना के बाद बड़ी संख्या में वहां मौजूद लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। महिला आयोग ने पत्र में उल्लेख किया है कि यह संपूर्ण घटनाक्रम किसी भी प्रकार के सुनियोजित विरोध या शासन-प्रशासन के प्रति अवमानना का परिणाम नहीं था, बल्कि परिस्थितिजन्य असमंजस व भय के वातावरण में उत्पन्न हुआ था। इस कारण तमाम निर्दोष लोग भी कार्रवाई की जद में आ गए हैं, जिनमें से कई अपने परिवार के एकमात्र भरण-पोषणकर्ता हैं। आयोग की अध्यक्ष ने सीएम धामी से अपेक्षा जताई है कि सरकार इस पूरे प्रकरण को मानवीय एवं संवेदनशील दृष्टिकोण से देखते हुए निर्दोष नागरिकों पर दर्ज प्राथमिकी वापस लेने के निर्देश प्रदान करे, जिससे प्रभावित परिवारों को मानसिक संबल मिले और शासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो।