सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Year Ender 2025 Disaster havoc Uttarakhand from mountains to plains Dharali, Tharali, and Dehradun.

Year Ender 2025: उत्तराखंड में पहाड़ से मैदान तक बरपा कुदरत का कहर; धराली, थराली और दून में दिखा खौफनाक मंजर

अमर उजाला नेटवर्क, उत्तराखंड Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 31 Dec 2025 09:05 PM IST
विज्ञापन
सार

Year Ender 2025 Uttarakhand: उत्तराखंड में वर्ष 2025 में आपदाओं ने खूब झकझोरा। प्रकृति के प्रकोप ने कई लोगों की जान ले ली। 

Year Ender 2025 Disaster havoc Uttarakhand from mountains to  plains Dharali, Tharali, and Dehradun.
उत्तरकाशी में आपदा - फोटो : एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

देवभूमि उत्तराखंड के सामने साल 2025 में कई घटनाएं अग्निपरीक्षा की तरह सामने आईं। पहाड़ से मैदान तक कुदरत का कहर बरपा। धराली, थराली और फिर देहरादून में आसमानी आफत ने कई जिंदगियां लील ली। जानते हैं ऐसी ही घटनाएं जिन्होंने न केवल हर किसी को झकझोरा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में छाई रहीं।  

Trending Videos


Year Ender 2025: शुरुआत में प्राकृतिक आपदा तो जाते-जाते वन्यजीवों की दहशत से जूझता रहा चमोली, कई जानें गईं

विज्ञापन
विज्ञापन

Year Ender 2025 Disaster havoc Uttarakhand from mountains to  plains Dharali, Tharali, and Dehradun.

धराली और हर्षिल की खीरगंगा का कहर

उत्तरकाशी में बीते पांच अगस्त को धराली और हर्षिल की खीरगंगा और तेलगाड मे आई आपदा में 60 से अधिक लोगों और 9 जवान मलबे में दब गए थे। वहीं धराली का पूरा बाजार करीब 25 से 30 फीट मलबे में दबकर जमींदोज हो गया था। दूसरी ओर यमुनोत्री घाटी में सिलाई बैंड में बादल फटने के कारण उसमे सात मजदूर बह गए थे। उसके बाद कुपड़ाखड्ड के उफान पर आने के कारण यमुना नदी में झील बनने के कारण स्यानाचट्टी कस्बे के अस्तित्व पर खतरा मंडरा गया था।


Year Ender 2025 Disaster havoc Uttarakhand from mountains to  plains Dharali, Tharali, and Dehradun.

चमोली में हिमस्खलन फिर थराली में आपदा

साल के शुरुआत में ही 28 फरवरी को माणा कैंप के पास भारी हिमस्खलन हुआ। जिसमें 55 मजदूर बर्फ के जलजले में दब गए थे। इनमें से आठ श्रमिकों की मौत हो गई थी। इसके बाद थराली आपदा ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। 22 अगस्त की रात को इस प्राकृतिक आपदा से थराली के कोटडीप, राड़ीबगड़, अपर बाजार,  कुलसारी, चेपड़ों, सगवाड़ा समेत कई इलाकों में व्यापक नुकसान हुआ। स्थिति यह रही कि तहसील परिसर के साथ ही दुकानों और मकानों में मलबा घुस गया तथा कई वाहन मलबे में दब गए। सबसे अधिक तबाही चेपड़ों में हुई। यहां एक बुजुर्ग मलबे में दब गए, सगवाड़ा गांव में भी 20 साल की युवती मलबे में दब गई थी। लोग इस आपदा से संभले भी नहीं थे कि सितंबर माह में नंदानगर की आपदा तबाही लेकर आई। 17 सितंबर की रात को अतिवृष्टि के दौरान पहाड़ियों के ऊपर बादल फटने से बरसाती गदेरों ने कुंतरी और धुर्मा गांव को तबाह कर दिया। सेरा गांव में 8 मकानें बह गई। इस क्षेत्र में एक माह तक अफरा-तफरी का  माहौल रहा। फाली गांव में पांच लोग अकाल मौत का शिकार हो गए थे।

Year Ender 2025 Disaster havoc Uttarakhand from mountains to  plains Dharali, Tharali, and Dehradun.

देहरादून ने पहली बार देखी ऐसी आपदा

इस साल मानसून की बारिश कई इलाकों में तबाही भी लेकर आई। वहीं, बीती 15-16 सितंबर की रात दून में हुई बारिश से कई इलाकों में आपदा आई तो लोगों को साल 2013 की केदारनाथ आपदा की याद आ गई। इसके साथ ही दून की बारिश ने 101 साल बाद बारिश का नया रिकॉर्ड भी बनाया। अकेले देहरादून में ऐसी आपदा आई कि हर कोई यह सोचने को मजबूर हो गया कि आखिर इतनी बारिश कैसे हुई। सहस्रधारा, मालदेवता, मसूरी रोड में समेत कई इलाकों में आई आपदा के साथ नंदा की चौकी का पुल भी नदी में बह गया। जिसके चलते लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। जबकि प्रेमनगर नंदा की चौकी का पुल तो अभी भी क्षतिग्रस्त होने की वजह से लोगों को वैकल्पिक मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। इन दो दिनों में अकेले सहस्रधारा में 264.0 एमएम बारिश हुई, जो सामान्य से बहुत अधिक थी। इससे पहले इतनी बारिश साल 1924 की तीन सितंबर को 212.6 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी, जो अब तक का ऑलटाइम रिकॉर्ड था।

दूसरे नंबर पर सबसे अधिक बारिश मालदेवता में 149.0 एमएम बारिश दर्ज की गई। कालसी में 119.5, नैनीताल में 105.0 एमएम बारिश हुई। प्रदेशभर की बात करें तो देहरादून में सबसे अधिक बारिश हुई। यहां 66.7 एमएम बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 1136 फीसदी अधिक थी। एक ओर मूसलाधार बारिश ने सहस्त्रधारा में तबाही मचाई तो वहीं, मालदेवता के केशरवाला में सड़क का करीब 100 मीटर का हिस्सा बहने से तकरीबन 17 गांवों का संपर्क टूट गया था। सहस्त्रधारा में लोगों के घरों, रेस्टोरेंट और होटल में पानी भरने के साथ ही कई मकान जमींदोज हो गए थे। इतना ही नहीं इलाके के पुल, रास्ते और जगह-जगह हुआ भूस्खलन आपदा की तबाही का मंजर बता रहा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed