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भागती दिल्ली, भटकता ध्यान: मेट्रो में हर दिन छूट रही यात्रियों की अमानत
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-पिछले दो वित्त वर्ष में यात्रियों ने मेट्रो में 19,491 सामान खोने की शिकायतें दर्ज कराईं
करीब 70 प्रतिशत सामान अपने मालिकों तक वापस पहुंचा
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। दिल्ली की तेज भागती जिंदगी में लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने के दबाव में लंच बॉक्स, पर्स, ईयरबड्स, घड़ियां तक चलते-चलते भूल रहे हैं। इसकी तस्दीक दिल्ली मेट्रो के आंकड़े करते हैं। बीते दो वर्षों में 19,491 यात्रियों ने सामान खोने की शिकायत दर्ज कराई। इनमें करीब 70 प्रतिशत सामान मालिकों तक वापस पहुंचा। सबसे ज्यादा छूटने वाली चीजों में लंच बॉक्स, पानी की बोतल, छाते, ईयरबड्स, घड़ियां और बैकपैक शामिल हैं।
डीएमआरसी के अनुसार, यात्री किसी भी स्टेशन पर सामान खोने की सूचना दे सकता है। सामान मिलने पर वह सात दिन के भीतर उसी स्टेशन से वैध फोटो पहचान पत्र (आधार, पैन, वोटर आईडी) लेकर ले सकता है। सात दिन में कोई नहीं आता तो सामान कश्मीरी गेट स्थित लॉस्ट एंड फाउंड ऑफिस भेजा जाता है, जहां से एक महीने के भीतर वापस लिया जा सकता है।
कीमती सामान (सोना, चांदी, गहने) को 48 घंटे स्टेशन पर सुरक्षित रखने के बाद लॉस्ट एंड फाउंड ऑफिस भेजा जाता है। मोबाइल व लैपटॉप को पुलिस सत्यापन के बाद तय प्रक्रिया से निपटाया जाता है। बिना दावे की नकदी सात दिन बाद डीएमआरसी के खाते में जमा होती है, जबकि विदेशी मुद्रा व स्मार्ट कार्ड की अलग निपटान प्रक्रिया है। लावारिस सामान की नीलामी भी समय-समय पर की जाती है।
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सामान मिला तो डीएमआरसी खुद भी करती है संपर्क
अधिकारी के अनुसार, लॉस्ट एंड फाउंड ऑफिस में जमा होने वाले सामान की जानकारी उसकी वेबसाइट के लॉस्ट एंड फाउंड सेक्शन में अपलोड की जाती है। अगर सामान में मालिक की संपर्क जानकारी मिलती है तो अधिकारी सीधे उससे संपर्क करते हैं। पहले से शिकायत दर्ज कराने वाले यात्री का सामान मिलने पर उसे भी सूचना दी जाती है। यात्री सारथी ऐप, किसी भी मेट्रो स्टेशन या लॉस्ट एंड फाउंड ऑफिस के जरिये अपने खोए सामान की जानकारी दे सकते हैं। यानी मेट्रो में सामान छूटने के बाद उसे वापस पाने का रास्ता मौजूद है, बस यात्री को समय पर शिकायत करनी होगी।
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करीब 70 प्रतिशत सामान अपने मालिकों तक वापस पहुंचा
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। दिल्ली की तेज भागती जिंदगी में लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने के दबाव में लंच बॉक्स, पर्स, ईयरबड्स, घड़ियां तक चलते-चलते भूल रहे हैं। इसकी तस्दीक दिल्ली मेट्रो के आंकड़े करते हैं। बीते दो वर्षों में 19,491 यात्रियों ने सामान खोने की शिकायत दर्ज कराई। इनमें करीब 70 प्रतिशत सामान मालिकों तक वापस पहुंचा। सबसे ज्यादा छूटने वाली चीजों में लंच बॉक्स, पानी की बोतल, छाते, ईयरबड्स, घड़ियां और बैकपैक शामिल हैं।
डीएमआरसी के अनुसार, यात्री किसी भी स्टेशन पर सामान खोने की सूचना दे सकता है। सामान मिलने पर वह सात दिन के भीतर उसी स्टेशन से वैध फोटो पहचान पत्र (आधार, पैन, वोटर आईडी) लेकर ले सकता है। सात दिन में कोई नहीं आता तो सामान कश्मीरी गेट स्थित लॉस्ट एंड फाउंड ऑफिस भेजा जाता है, जहां से एक महीने के भीतर वापस लिया जा सकता है।
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कीमती सामान (सोना, चांदी, गहने) को 48 घंटे स्टेशन पर सुरक्षित रखने के बाद लॉस्ट एंड फाउंड ऑफिस भेजा जाता है। मोबाइल व लैपटॉप को पुलिस सत्यापन के बाद तय प्रक्रिया से निपटाया जाता है। बिना दावे की नकदी सात दिन बाद डीएमआरसी के खाते में जमा होती है, जबकि विदेशी मुद्रा व स्मार्ट कार्ड की अलग निपटान प्रक्रिया है। लावारिस सामान की नीलामी भी समय-समय पर की जाती है।
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सामान मिला तो डीएमआरसी खुद भी करती है संपर्क
अधिकारी के अनुसार, लॉस्ट एंड फाउंड ऑफिस में जमा होने वाले सामान की जानकारी उसकी वेबसाइट के लॉस्ट एंड फाउंड सेक्शन में अपलोड की जाती है। अगर सामान में मालिक की संपर्क जानकारी मिलती है तो अधिकारी सीधे उससे संपर्क करते हैं। पहले से शिकायत दर्ज कराने वाले यात्री का सामान मिलने पर उसे भी सूचना दी जाती है। यात्री सारथी ऐप, किसी भी मेट्रो स्टेशन या लॉस्ट एंड फाउंड ऑफिस के जरिये अपने खोए सामान की जानकारी दे सकते हैं। यानी मेट्रो में सामान छूटने के बाद उसे वापस पाने का रास्ता मौजूद है, बस यात्री को समय पर शिकायत करनी होगी।