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तुगलकाबाद अग्निकांड: राख में बदले सपने, अब सिर्फ उम्मीदों का सहारा; कई लोग गए थे गांव, इसलिए बच गई जान

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sun, 14 Jun 2026 08:46 AM IST
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सार

तुगलकाबाद की इस आग ने लोगों से सिर्फ लोगों के मकान नहीं छीने, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और भविष्य का भरोसा भी छीन लिया है। अब इन परिवारों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं, ताकि राख में दबे उनके जीवन को दोबारा संवारने की कोई शुरुआत हो सके।

A massive fire in Tughlakabad reduced the dreams of dozens of families to ashes
तुगलकाबाद अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

तुगलकाबाद एक्सटेंशन में शुक्रवार को पांच मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने सिर्फ मकानों को नहीं जलाया, बल्कि दर्जनों परिवारों की वर्षों की मेहनत, सपनों और उम्मीदों को भी राख में बदल दिया। जिन लोगों ने एक-एक सामान जोड़कर अपना घर बसाया था, वे आज रिश्तेदारों और परिचितों के सहारे जिंदगी दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। किसी के पास रहने की जगह नहीं बची, किसी के बच्चों के कपड़े और किताबें जल गईं, तो किसी की पूरी जमा-पूंजी और जरूरी दस्तावेज आग की भेंट चढ़ गए।

घटना के बाद शनिवार को सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला, जब पीड़ित परिवारों को जले हुए सामान की पहचान के लिए बुलाया गया। सुबह से शाम तक लोग तेज धूप में इंतजार करते रहे। हर किसी को उम्मीद थी कि शायद राख के ढेर में उनकी कोई जरूरी चीज, कोई दस्तावेज या जिंदगी की कोई बची-खुची निशानी मिल जाए। लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें सिर्फ अनिश्चितता और बेचैनी ही हाथ लगी।

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इलाके में पूरे दिन एक ही चर्चा रही कि यदि गर्मी की छुट्टियों के कारण कई परिवार अपने गांव नहीं गए होते, तो यह हादसा कहीं अधिक भयावह साबित हो सकता था। कई लोग मानते हैं कि छुट्टियों ने दर्जनों जिंदगियां बचा लीं। तुगलकाबाद की इस आग ने लोगों से सिर्फ उनके मकान नहीं छीने, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और भविष्य का भरोसा भी छीन लिया है। अब इन परिवारों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं, ताकि राख में दबे उनके जीवन को दोबारा संवारने की कोई शुरुआत हो सके।

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परिवार गांव में था इसलिए बच गई जान
रामनाथ यादव बताते हैं कि वह अपने भाई के साथ एक ही फ्लैट में रहते हैं। गर्मी की छुट्टियों में उनके परिवार गांव गए हुए थे। हादसे वाली रात दोनों भाइयों ने दूसरी छत पर कूदकर जान बचाई। उन्होंने कहा, अच्छा हुआ परिवार यहां नहीं था, वरना उन्हें बचाने के प्रयास में कोई बड़ा हादसा हो सकता था। अब रहने और खाने का इंतजाम करना सबसे बड़ी चिंता है।

ग्रिल काटकर बचाया परिवार
राधेश्याम के लिए वह रात किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। उन्होंने बताया कि पत्नी और दो बेटियों को बचाने के लिए उन्होंने औजार से ग्रिल और रेलिंग काटी। परिवार सुरक्षित है, यही सबसे बड़ी राहत है। घर की जमा-पूंजी और जरूरी कागजात सब बर्बाद हो गया।

भविष्य की चिंता सबसे बड़ी
रिजवाना जामिया से यहां पहुंचीं। उनके रिश्तेदार इसी इमारत में रहते हैं और छुट्टियों में गांव गए हुए थे। उन्होंने कहा, शुक्र है कि वे यहां नहीं थे। उन्होंने मुझे घर की स्थिति देखने भेजा है। मेरे बच्चे घर पर अकेले हैं और लगातार फोन कर रहे हैं, लेकिन यहां इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।

रिश्तेदारों का हाल जानने पहुंची
नीतू कहती हैं, बस इतना पता है कि परिवार सुरक्षित है। नौकरी और बच्चों की पढ़ाई के लिए दिल्ली आए थे। अब सबसे बड़ा डर यही है कि अगर सब कुछ खत्म हो गया तो आगे जिंदगी कैसे चलेगी।

कोको को बचाने में मुमताज झुलसीं
तुगलकाबाद एक्सटेंशन के भीषण अग्निकांड में इंसान और उसके पालतू जानवर के बीच भावनात्मक रिश्ते की एक मार्मिक कहानी सामने आई है। आग लगने के बाद मुमताज ने पहले अपनी दोनों छोटी बहनों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन जब उन्हें अपनी पालतू बिल्ली ‘कोको’ का ख्याल आया तो वह दोबारा धुएं और आग से घिरे घर में लौट गईं। इसी दौरान वह झुलस गईं।

मुमताज के पति दीपक ने बताया कि रात करीब 2:15 बजे उनकी पत्नी का घबराया हुआ फोन आया था। उन्होंने मुमताज को छत पर जाने और जरूरत पड़ने पर पड़ोसी की छत के रास्ते बाहर निकलने की सलाह दी। पड़ोसियों की मदद से मुमताज और उनकी दोनों बहनें सुरक्षित बाहर आ गईं, लेकिन ‘कोको’ को अंदर छोड़ने का ख्याल उन्हें परेशान करता रहा।

दीपक के अनुसार, मुमताज को अपनी पालतू बिल्ली से बेहद लगाव है। उसे बचाने के लिए वह दोबारा घर के अंदर गईं और आग व धुएं की चपेट में आकर उनके हाथ और पैर झुलस गए। उन्हें इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। परिवार ने कहा कि आग ने  नई शुरुआत के सपनों को भी झटका दिया है। मुमताज को जल्द ही मुनिरका के एक ब्यूटी पार्लर में नई नौकरी शुरू करनी थी।

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के गोविंदपुरी थाना क्षेत्र स्थित तुगलकाबाद एक्सटेंशन में बृहस्पतिवार देर रात एक पांच मंजिला आवासीय इमारत में लगी आग में एक ही परिवार के पंकज (28), उनकी नानी सुशीला देवी (70) और बहन सोनी (20) की मौत हो गई। हादसे में पंकज की बहन मोनी (18) और उनकी मां गुड्डी (50) देवी की धुएं की चपेट में आने से हालत गंभीर है। 

हादसा बृहस्पतिवार रात करीब 2:25 बजे तुगलकाबाद एक्सटेंशन की गली नंबर-1 स्थित नया तारा अपार्टमेंट के पास हुआ। आग लगते ही इमारत में अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही मिनटों में धुआं ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया और लोग फंस गए। प्रारंभिक जांच में आग ग्राउंड फ्लोर पर खड़े दोपहिया वाहनों से लगने की बात सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार आग पर रात 3:45 बजे तक नियंत्रण पा लिया गया था। करीब 4 बजे आग पूरी तरह बुझा दी गई। 

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