ब्रेन ट्यूमर से बदली बुजुर्ग की खाने की पसंद: चीनी का लगा चस्का, नमकीन से हुई नफरत; पढ़ें डॉक्टरों ने क्या कहा
डॉक्टर के अनुसार, मरीज का इलाज स्टीरियोटैक्टिक रेडियोथेरेपी से किया गया। इसके बाद परिवार ने उनके व्यवहार में असामान्य बदलाव महसूस किया। वह बड़ी मात्रा में चीनी खाने की मांग करने लगे और रोजाना करीब 100 ग्राम तक चीनी खाने के लिए अड़ जाते थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एक 89 साल के बुजुर्ग की खाने की पसंद अचानक ऐसी बदली कि परिवार हैरान रह गया। उन्हें मीठा इतना पसंद आने लगा कि वह रोजाना करीब 100 ग्राम तक चीनी खाने की जिद करने लगे। वहीं नमकीन और सामान्य भोजन से उन्होंने लगभग मुंह मोड़ लिया।
शुरुआत में यह बदलाव सिर्फ स्वाद की पसंद लगा, लेकिन जांच में इसके पीछे दिमाग में दोबारा फैले कैंसर और उससे बने ट्यूमर का पता चला। वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) और सफदरजंग अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के डॉक्टरों ने इस दुर्लभ मामले को सामने रखा है।
डॉक्टरों के अनुसार, मरीज का वर्ष 2021 में एडिनोकार्सिनोमा नामक कैंसर का इलाज हुआ था। करीब चार साल बाद शरीर में सोडियम की कमी के कारण उन्हें दौरे पड़ने लगे। साथ ही याददाश्त कमजोर होने लगी। इन लक्षणों के बाद डॉक्टरों ने एमआरआई कराया। जांच में पता चला कि कैंसर दोबारा फैल चुका है। दिमाग के बाएं भाग के पिछले हिस्से, यानी लेफ्ट पैरिटो-ऑक्सिपिटल क्षेत्र में ट्यूमर बन चुका था। ट्यूमर के कारण दिमाग में सूजन भी थी। डॉक्टरों के मुताबिक, सूजन और दबाव ने दिमाग के उन हिस्सों के कामकाज को प्रभावित किया, जो स्वाद, आनंद और भोजन से मिलने वाली संतुष्टि से जुड़े हैं।
जांच में मानसिक रोगों के लक्षण नहीं मिले
डॉ. पी वर्मा के अनुसार, मरीज का इलाज स्टीरियोटैक्टिक रेडियोथेरेपी से किया गया। इसके बाद परिवार ने उनके व्यवहार में असामान्य बदलाव महसूस किया। वह बड़ी मात्रा में चीनी खाने की मांग करने लगे और रोजाना करीब 100 ग्राम तक चीनी खाने के लिए अड़ जाते थे। इसके विपरीत नमकीन भोजन से उसे चिढ़ होने लगी और वह उसे खाने से इन्कार करते थे।
परिवार की चिंता के बाद डॉक्टरों ने उनकी मानसिक स्थिति की भी जांच की। विस्तृत मूल्यांकन में अवसाद, भ्रम, पागलपन या ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर जैसे मानसिक रोगों के लक्षण नहीं मिले। यानी बदलाव किसी सामान्य मानसिक बीमारी के कारण नहीं था, बल्कि खाने की पसंद और उससे मिलने वाली संतुष्टि में आया असामान्य परिवर्तन था।