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Delhi NCR News: अमृत सरोवर योजना के लोकार्पण पर उठे सवाल, अधूरे कार्यों के बीच उद्घाटन से बढ़ा विवाद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 01:15 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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तावडू। नूंह जिले में अमृत सरोवर योजना के तहत बुधवार को मुख्यमंत्री द्वारा वर्चुअल माध्यम से विभिन्न तालाबों के जीर्णोद्धार कार्यों का लोकार्पण किया गया। हालांकि तावडू उपमंडल के गांव सीलखो और चिलावली के तालाबों को भी इस सूची में शामिल किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इन दोनों तालाबों पर कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है, जबकि निर्माण कार्यों में अनियमितताओं और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की जांच पहले से ही चल रही थी। ऐसे में अधूरे और जांच के अधीन कार्यों का लोकार्पण किए जाने पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार नूंह जिले में अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत कुल 16 तालाबों का लोकार्पण किया गया। इनमें तावडू क्षेत्र के सीलखो और चिलावली गांवों के तालाब भी शामिल थे। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि इन दोनों परियोजनाओं में कार्य धरातल पर पूरी तरह से संपन्न नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, संबंधित कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी द्वारा मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया था, जिसके आधार पर जिला प्रशासन ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन भी किया था। समिति द्वारा संबंधित स्थलों का निरीक्षण किए जाने की प्रक्रिया भी जारी रही। बताया जा रहा है कि पंचायत विभाग के अधिकारियों द्वारा पूर्व में उच्च अधिकारियों को भेजे गए पत्राचार में भी इन परियोजनाओं में अनियमितताओं और कार्यों की वास्तविक स्थिति का उल्लेख किया गया था। इसके बावजूद इन्हें लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल कर दिया गया। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ अधिकारियों ने जल्दबाजी में उपलब्धियां प्रदर्शित करने और वाहवाही लेने के उद्देश्य से वास्तविक स्थिति से इतर जानकारी प्रस्तुत कर उच्च अधिकारियों तथा सरकार को गुमराह किया। चिलावली गांव के तालाब के जीर्णोद्धार के लिए अमृत सरोवर योजना के तहत लगभग 97.96 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जबकि सीलखो गांव के तालाब के लिए करीब 51.73 लाख रुपये मंजूर किए गए थे। इन परियोजनाओं को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। शिकायतों के आधार पर हुई प्रारंभिक जांच में गुणवत्ता और कार्य निष्पादन को लेकर आपत्तियां सामने आने के बाद जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
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वहीं संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच प्रतिनिधियों का कहना है कि इन कार्यों में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रही। उनके अनुसार परियोजनाओं का संचालन और तकनीकी कार्यवाही पंचायत विभाग के कार्यकारी अभियंता के अधीन हुई तथा ग्राम पंचायतों से न तो कोई विशेष परामर्श लिया गया और न ही उन्हें कार्यों की प्रगति के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यों की पैमाइश और अन्य प्रक्रियाएं विभागीय स्तर पर ही संपन्न की गईं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि कार्य पूर्ण नहीं हुए थे, राशि का पूरा उपयोग नहीं हुआ था और मामले की जांच भी जारी थी, तो फिर इन परियोजनाओं का लोकार्पण किस आधार पर किया गया।
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