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Cloud Seeding: राजधानी में फिर हो सकता है कृत्रिम बारिश कराने का प्रयोग, IIT कानपुर में चल रही है समीक्षा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 06 Apr 2026 06:59 AM IST
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सार

इस संबंध में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर पिछले साल किए गए परीक्षणों के नतीजों की समीक्षा कर रहा है। 

Cloud Seeding: Experiment to induce artificial rain may be conducted again in the capital.
file pic - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गर्मी के मौसम में एक बार फिर कृत्रिम बारिश (क्लाउड-सीडिंग) का प्रयोग किया जा सकता है। इस संबंध में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर पिछले साल किए गए परीक्षणों के नतीजों की समीक्षा कर रहा है। 

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जानकारी के अनुसार, पिछले साल अक्तूबर के अंत में दिल्ली में क्लाउड-सीडिंग के दो परीक्षण किए गए थे। यह परीक्षण दिल्ली के पर्यावरण विभाग और आईआईटी कानपुर के बीच 25 सितंबर 2025 को हुए समझौते के बाद शुरू हुए थे। हालांकि, यह प्रयोग बारिश कराने में सफल नहीं रहे। 
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आईआईटी कानपुर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उस समय बादलों में नमी की कमी थी, जिसकी वजह से बारिश नहीं हुई। संस्थान का कहना है कि इन परीक्षणों से मिले अनुभव भविष्य में बेहतर योजना बनाने और सही मौसम की पहचान करने में मदद करेंगे।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, क्लाउड-सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें बादलों में विशेष रसायन जैसे सिल्वर आयोडाइड और नमक के कण छोड़े जाते हैं। इससे बादलों में पानी की बूंदें बनने की प्रक्रिया तेज होती है और बारिश की संभावना बढ़ती है।

पिछले परीक्षणों में भी ऐसे ही रसायनों वाले फ्लेयर्स का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा, दिल्ली सरकार की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इन परीक्षणों से कुछ इलाकों में हवा में मौजूद प्रदूषण के कणों (पार्टिकुलेट मैटर) के स्तर में कमी आई थी। 

अब आईआईटी कानपुर ने नए सिरे से प्रयोग करने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से अनुमति मांगी है। एक अधिकारी ने बताया कि पुराने नतीजों की समीक्षा के बाद ही नए परीक्षण की तारीख तय की जाएगी। वहीं, दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की सलाह से आगे भी ऐसे प्रयोग किए जा सकते हैं।

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