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MRP 100, दवा बनती 30 पैसे में: पुलिस के डर से 10 फीट गड्ढा कर दबा दी थीं दवाएं, पुलिस ने JCB से निकालीं; Video

शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Mon, 06 Apr 2026 03:03 AM IST
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सार

पुलिस की पूछताछ में आरोपी राहुल और शाहरुख ने खुलासा किया है दवाओं को बेचने के लिए बनाने वाले बिल के लिए आरोपी फर्जी कंपनियां बनवाते थे। जितने मोटे बिल होते थे, उसके हिसाब से कंपनी की कीमत होती थी। आरोपी एक लाख से डेढ़ लाख रुपये में दवा कारोबारियों कंपनी बनाकर देते थे। 

Fearing from police Nikhil Arora dug 10-foot-deep pit and buried the medicines
निखिल अरोड़ा ने पुलिस के डर से 10 फीट गहरा गड्ढा कर दफना दी थीं दवाएं - फोटो : AI Image
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विस्तार

नकली दवाएं बनाकर बेचने के आरोप में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने सबसे पहले निखिल अरोड़ा उर्फ सन्नी को दबोचा। इससे पूछताछ के बाद टीम आरोपी शिवम त्यागी के घर पहुंची तो वहां पुलिस को कुछ नहीं बरामद हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर शिवम ने बताया कि पुलिस के डर से उसने करीब 10 फीट गहरा गड्ढा खोदकर दवाओं को दफना दिया है। टीम ने जेसीबी मशीन के जरिये शिवम की बताई जगह पर खुदाई कराई तो करीब 40 हजार टैबलेट और कैप्सूल दफन मिले।

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100 रुपये एमआरपी की दवा बनाने में महज 30 पैसे का खर्चा
छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपी निखिल अरोड़ा का भागीरथ पैलेस में थोक में दवा बेचने का पुराना कारोबार है। वह लभभग सभी नामी कंपनियों की दवाएं बेचता था। निखिल ने खुलासा किया है कि वह पिछले कई साल से शिवम, मयंक और मोहित के संपर्क में था। यह तीनों ही उसे दवाएं सप्लाई करते थे। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपियों ने खुलासा किया है कि 100 रुपये एमआरपी की दवा बनाने में महज 30 पैसे का खर्चा आता है। बाद में इन दवाओं को एमआरपी के 20 से 25 फीसदी कीमत पर होलसेलर को बेच दिया जाता था। इस तरह मोटा मुनाफा कमाया जाता था। जांच के दौरान आरोपियों ने बताया है कि वह लगभग सभी कंपनियों की दवा बनाकर बेचते थे।

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मयंक अग्रवाल के खिलाफ पहले भी दो मामले दर्ज
पुलिस की छानबीन में पता चला है कि आरोपी मयंक अग्रवाल के खिलाफ पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने वर्ष 2013 में मामला दर्ज किया था। इसके बाद मुरादनगर, गाजियाबाद में जनवरी 2026 में एक और मामला दर्ज किया था। आरोपी मयंक लगातार नकली दवा बेचने के मामलों में शामिल रहा है। पुलिस इनके बाकी नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

एक से डेढ़ लाख में उपलब्ध कराते थे फर्जी कंपनियां
पुलिस की पूछताछ में आरोपी राहुल और शाहरुख ने खुलासा किया है दवाओं को बेचने के लिए बनाने वाले बिल के लिए आरोपी फर्जी कंपनियां बनवाते थे। जितने मोटे बिल होते थे, उसके हिसाब से कंपनी की कीमत होती थी। आरोपी एक लाख से डेढ़ लाख रुपये में दवा कारोबारियों कंपनी बनाकर देते थे। फिलहाल दोनों के पास से करीब 150 फर्जी कंपनियों का पता चला है। राहुल ने खुलासा किया है कि फर्जी कंपनी इन लोगों को भी कोई दूसरा व्यक्ति 20 से 25 हजार में देता था। पुलिस इनके बाकी साथियों की तलाश कर रही है।

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