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Delhi NCR News: डबल डेकर फ्लाईओवर-मेट्रो परियोजना की लागत 71 करोड़ बढ़ी
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यमुना विहार-भजनपुरा के बीच बन रहे इंटीग्रेटेड फ्लाईओवर व मेट्रो ढांचे की संशोधित लागत 291.10 करोड़ मंजूर, वर्ष के अंत तक काम पूरा होने की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो के फेज-4 के तहत यमुना विहार और भजनपुरा के बीच बन रहे डबल डेकर इंटीग्रेटेड फ्लाईओवर एवं मेट्रो कॉरिडोर की लागत 71 करोड़ रुपये बढ़ गई है। दिल्ली सरकार की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने परियोजना की संशोधित लागत 291.10 करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है। वर्ष 2021 में इस परियोजना को 220.10 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृति मिली थी।
ईएफसी के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार परियोजना का करीब 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) का अनुमान है कि शेष कार्य अगले छह से आठ महीनों में पूरा हो जाएगा। परियोजना के लिए अब तक 207.40 करोड़ रुपये डीएमआरसी को जारी किए जा चुके हैं। गैल, दिल्ली जल बोर्ड और बीएसईएस से संबंधित यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि पेड़ों की कटाई और प्रतिरोपण की अनुमति भी मिल गई है।
लागत बढ़ने के प्रमुख कारणों में जीएसटी की दर 12 से 18 प्रतिशत होना, निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि, महंगाई के कारण प्राइस एस्केलेशन, तीन प्रतिशत आकस्मिक व्यय, एक प्रतिशत थर्ड पार्टी क्वालिटी एश्योरेंस (टीपीक्यूए) तथा एक प्रतिशत स्ट्रक्चरल डिजाइन एवं प्रूफ कंसल्टेंसी शुल्क शामिल हैं। इन्हीं आधारों पर डीएमआरसी ने अगस्त 2024 में संशोधित प्रारंभिक लागत अनुमान सरकार को भेजा था।
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ईएफसी ने निर्देश दिया है कि मूल्य वृद्धि की गणना अनुबंध की शर्तों के अनुरूप हो तथा ठेकेदार की देरी की अवधि को इसमें शामिल न किया जाए। समिति ने जीएसटी प्रतिपूर्ति की तकनीकी जांच, अतिरिक्त लागत वृद्धि पर रोक, गुणवत्ता की कड़ी निगरानी और पेनल्टी क्लॉज लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। यह 1.43 किलोमीटर लंबी परियोजना मौजपुर-मजलिस पार्क कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसमें निचले स्तर पर पीडब्ल्यूडी का फ्लाईओवर और ऊपरी स्तर पर मेट्रो लाइन बनाई जा रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो के फेज-4 के तहत यमुना विहार और भजनपुरा के बीच बन रहे डबल डेकर इंटीग्रेटेड फ्लाईओवर एवं मेट्रो कॉरिडोर की लागत 71 करोड़ रुपये बढ़ गई है। दिल्ली सरकार की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने परियोजना की संशोधित लागत 291.10 करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है। वर्ष 2021 में इस परियोजना को 220.10 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृति मिली थी।
ईएफसी के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार परियोजना का करीब 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) का अनुमान है कि शेष कार्य अगले छह से आठ महीनों में पूरा हो जाएगा। परियोजना के लिए अब तक 207.40 करोड़ रुपये डीएमआरसी को जारी किए जा चुके हैं। गैल, दिल्ली जल बोर्ड और बीएसईएस से संबंधित यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि पेड़ों की कटाई और प्रतिरोपण की अनुमति भी मिल गई है।
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लागत बढ़ने के प्रमुख कारणों में जीएसटी की दर 12 से 18 प्रतिशत होना, निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि, महंगाई के कारण प्राइस एस्केलेशन, तीन प्रतिशत आकस्मिक व्यय, एक प्रतिशत थर्ड पार्टी क्वालिटी एश्योरेंस (टीपीक्यूए) तथा एक प्रतिशत स्ट्रक्चरल डिजाइन एवं प्रूफ कंसल्टेंसी शुल्क शामिल हैं। इन्हीं आधारों पर डीएमआरसी ने अगस्त 2024 में संशोधित प्रारंभिक लागत अनुमान सरकार को भेजा था।
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ईएफसी ने निर्देश दिया है कि मूल्य वृद्धि की गणना अनुबंध की शर्तों के अनुरूप हो तथा ठेकेदार की देरी की अवधि को इसमें शामिल न किया जाए। समिति ने जीएसटी प्रतिपूर्ति की तकनीकी जांच, अतिरिक्त लागत वृद्धि पर रोक, गुणवत्ता की कड़ी निगरानी और पेनल्टी क्लॉज लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। यह 1.43 किलोमीटर लंबी परियोजना मौजपुर-मजलिस पार्क कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसमें निचले स्तर पर पीडब्ल्यूडी का फ्लाईओवर और ऊपरी स्तर पर मेट्रो लाइन बनाई जा रही है।