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Delhi NCR News: पहले एकल प्रदर्शन में नृत्यांगना स्मिताने बिखेरा प्रतिभा का जादू
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- भाव, भक्ति और साधना का अद्भुत संगम, भरतनाट्यम अरंगेत्रम से किया मंत्रमुग्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। मयूर विहार स्थित कार्थ्यानी सामाजिक-सांस्कृतिक परिसर में युवा नृत्यांगना स्मिता अय्यर का भरतनाट्यम अरंगेत्रम भाव, लय और साधना के अद्भुत संगम के रूप में साकार हुआ। कृष्णांजलि सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कला प्रेमियों, परिजनों और कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही। गुरु डॉ. राजेश्वरी मेनन के मार्गदर्शन में वर्षों की साधना से निखरी स्मिता ने अपने पहले एकल प्रदर्शन में आत्मविश्वास और अनुशासन का प्रभावशाली परिचय दिया। प्रस्तुति की शुरुआत पुष्पांजलि से हुई, जिसके बाद अलारिपु की सधी हुई लय और शारीरिक संतुलन ने दर्शकों को बांधे रखा। गणेश स्तुति और सरस्वती कीर्तनम में उनकी अभिव्यक्ति ने भक्ति का कोमल रूप प्रस्तुत किया, जबकि राग कल्याणी में वर्णम इस संध्या का शिखर रहा। इसमें नृत्य और अभिनय का संतुलित समन्वय उनकी साधना की गहराई को दर्शाता है। मुरुगन कीर्तनम, कल्याण राम और कनक सभाई में उन्होंने भक्ति के विविध रंगों को जीवंत किया।
उत्तरार्ध में ‘जगन्मोहनाने’ के जरिए कृष्ण के चंचल रूप को साकार करते हुए उन्होंने दर्शकों को भावों की दुनिया में ले जाया, जबकि ‘श्री चक्र राजा’ में शक्ति स्वरूपा का दिव्य चित्रण किया। इस दौरान संगीत में नट्टुवांगम पर डॉ. राजेश्वरी मेनन, गायन में इलांगोवन गोविंदराजन, मृदंगम पर पी. वेत्रिभूति, बांसुरी पर रघुरामन गोविंदराजन और वायलिन पर दिल्ली आर. श्रीधर ने सशक्त संगति दी।
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नई दिल्ली। मयूर विहार स्थित कार्थ्यानी सामाजिक-सांस्कृतिक परिसर में युवा नृत्यांगना स्मिता अय्यर का भरतनाट्यम अरंगेत्रम भाव, लय और साधना के अद्भुत संगम के रूप में साकार हुआ। कृष्णांजलि सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कला प्रेमियों, परिजनों और कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही। गुरु डॉ. राजेश्वरी मेनन के मार्गदर्शन में वर्षों की साधना से निखरी स्मिता ने अपने पहले एकल प्रदर्शन में आत्मविश्वास और अनुशासन का प्रभावशाली परिचय दिया। प्रस्तुति की शुरुआत पुष्पांजलि से हुई, जिसके बाद अलारिपु की सधी हुई लय और शारीरिक संतुलन ने दर्शकों को बांधे रखा। गणेश स्तुति और सरस्वती कीर्तनम में उनकी अभिव्यक्ति ने भक्ति का कोमल रूप प्रस्तुत किया, जबकि राग कल्याणी में वर्णम इस संध्या का शिखर रहा। इसमें नृत्य और अभिनय का संतुलित समन्वय उनकी साधना की गहराई को दर्शाता है। मुरुगन कीर्तनम, कल्याण राम और कनक सभाई में उन्होंने भक्ति के विविध रंगों को जीवंत किया।
उत्तरार्ध में ‘जगन्मोहनाने’ के जरिए कृष्ण के चंचल रूप को साकार करते हुए उन्होंने दर्शकों को भावों की दुनिया में ले जाया, जबकि ‘श्री चक्र राजा’ में शक्ति स्वरूपा का दिव्य चित्रण किया। इस दौरान संगीत में नट्टुवांगम पर डॉ. राजेश्वरी मेनन, गायन में इलांगोवन गोविंदराजन, मृदंगम पर पी. वेत्रिभूति, बांसुरी पर रघुरामन गोविंदराजन और वायलिन पर दिल्ली आर. श्रीधर ने सशक्त संगति दी।
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