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Delhi NCR News: एसआईआर में बेघर लोगों को मतदाता सूची से बाहर रखने पर फैसला सुरक्षित
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा-हर मामले का समाधान अदालत से नहीं कराया जा सकता
चुनाव आयोग को इस समस्या से निपटने का बेहतर तरीका खुद तय करना चाहिए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बेघर और विध्वंस अभियानों से विस्थापित लोगों के मतदाता सूची से बाहर होने की आशंका से जुड़ी जनहित याचिका पर बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि हर मामले का समाधान अदालत से नहीं कराया जा सकता। चुनाव आयोग को इस समस्या से निपटने का बेहतर तरीका खुद तय करना चाहिए। याचिका इंदु प्रकाश सिंह ने दायर की है। इसमें स्थायी पता नहीं होने के बावजूद पात्र बेघर और विस्थापित लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज करने और उन्हें बनाए रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यकाम ने कहा कि घर-घर जाकर होने वाली एसआईआर प्रक्रिया में घर खो चुके या विध्वंस अभियानों के कारण विस्थापित लोगों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 10 जुलाई को अधिकारियों को अभ्यावेदन दिया गया था, जिसकी 13 जुलाई को पावती भी मिली, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि बेघर और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की समस्या को पहले से मान्यता दी गई है और इसके लिए नीति व मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मौजूद है। आयोग के अनुसार, फॉर्म-6 के तहत बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) पात्र बेघर लोगों की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने में मदद करते हैं।
पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि एसआईआर में बाहर किए गए लोगों के विशिष्ट मामले क्यों नहीं सामने रखे गए। याचिकाकर्ता ने बताया कि पहले करीब 650 लोग सूची से बाहर रह गए थे और आशंका जताई कि मौजूदा प्रक्रिया में विध्वंस से प्रभावित तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि यदि नीति लागू नहीं हो रही है तो विशिष्ट मामलों की पहचान कर उन्हें अधिकारियों के समक्ष रखा जाना चाहिए।
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चुनाव आयोग को इस समस्या से निपटने का बेहतर तरीका खुद तय करना चाहिए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान बेघर और विध्वंस अभियानों से विस्थापित लोगों के मतदाता सूची से बाहर होने की आशंका से जुड़ी जनहित याचिका पर बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि हर मामले का समाधान अदालत से नहीं कराया जा सकता। चुनाव आयोग को इस समस्या से निपटने का बेहतर तरीका खुद तय करना चाहिए। याचिका इंदु प्रकाश सिंह ने दायर की है। इसमें स्थायी पता नहीं होने के बावजूद पात्र बेघर और विस्थापित लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज करने और उन्हें बनाए रखने के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग की गई है।
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याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यकाम ने कहा कि घर-घर जाकर होने वाली एसआईआर प्रक्रिया में घर खो चुके या विध्वंस अभियानों के कारण विस्थापित लोगों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 10 जुलाई को अधिकारियों को अभ्यावेदन दिया गया था, जिसकी 13 जुलाई को पावती भी मिली, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि बेघर और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की समस्या को पहले से मान्यता दी गई है और इसके लिए नीति व मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) मौजूद है। आयोग के अनुसार, फॉर्म-6 के तहत बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) पात्र बेघर लोगों की पहचान कर उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने में मदद करते हैं।
पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि एसआईआर में बाहर किए गए लोगों के विशिष्ट मामले क्यों नहीं सामने रखे गए। याचिकाकर्ता ने बताया कि पहले करीब 650 लोग सूची से बाहर रह गए थे और आशंका जताई कि मौजूदा प्रक्रिया में विध्वंस से प्रभावित तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि यदि नीति लागू नहीं हो रही है तो विशिष्ट मामलों की पहचान कर उन्हें अधिकारियों के समक्ष रखा जाना चाहिए।