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Delhi Assembly: हंगामे की भेंट चढ़ी विधानसभा, शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन एक मिनट भी नहीं चल पाया सदन

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 08 Jan 2026 03:44 AM IST
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सार

गुरु तेग बहादुर के कथित अपमान के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भाजपा विधायक सुबह से ही आक्रामक नजर आए और नेता विपक्ष आतिशी से सार्वजनिक माफी की मांग पर सदन के भीतर और बाहर प्रदर्शन करते रहे।

Delhi Assembly: The house could not function for even a minute on the third day of the winter session
बीजेपी विधायकों ने विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उन पर सिख गुरु तेग बहादुर का अपमान करने का आरोप लगाते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। तीसरे दिन सदन एक मिनट भी नहीं चल सका। गुरु तेग बहादुर के कथित अपमान के मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भाजपा विधायक सुबह से ही आक्रामक नजर आए और नेता विपक्ष आतिशी से सार्वजनिक माफी की मांग पर सदन के भीतर और बाहर प्रदर्शन करते रहे। बढ़ते शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को बार-बार कार्यवाही रोकनी पड़ी। अंततः मजबूरी में सदन को अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

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शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, सत्ता पक्ष भाजपा के विधायक गुरु तेग बहादुर के अपमान के आरोप को लेकर अपनी सीटों से खड़े हो गए। उन्होंने नेता विपक्ष आतिशी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करते हुए नारे लगाए और पर्चे लहराए। हंगामा इतना तेज था कि सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कुछ ही मिनटों में पहली बार स्थगित करनी पड़ी। कुछ देर बाद जब सदन दोबारा बैठा, तब भी हालात नहीं बदले। भाजपा विधायक इसी मुद्दे पर अड़े रहे और लगातार माफी की मांग करते रहे। शोर-शराबा बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दूसरी बार कार्यवाही को आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया। इस दौरान अध्यक्ष ने नेता विपक्ष आतिशी को एक घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए।
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सदन में नहीं पहुंचीं आतिशी
करीब एक घंटे बाद जब सदन फिर से शुरू करने की कोशिश की गई, तो विपक्ष की ओर से विधायक मुकेश अहलावत ने अध्यक्ष को जानकारी दी कि नेता विपक्ष आतिशी दिल्ली में मौजूद नहीं हैं और वे गोवा चली गई हैं। इस सूचना के बाद सदन में फिर से हंगामा तेज हो गया। सत्ता पक्ष के विधायक इसे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताते हुए और ज्यादा आक्रामक हो गए। विधानसभा अध्यक्ष लगातार सत्ता पक्ष के विधायकों से शांति बनाए रखने और सदन चलने देने की अपील करते रहे। उन्होंने कहा कि विधानसभा चर्चा और संवाद का मंच है, लेकिन उनकी अपील का कोई असर नहीं पड़ा। भाजपा विधायक नेता विपक्ष से सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़े रहे और कार्यवाही चलने नहीं दी।

शीतकालीन सत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल
लगातार हंगामे और असहयोग को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष को तीसरी बार सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। आखिरकार उन्होंने घोषणा की कि मौजूदा हालात में सदन चलाना संभव नहीं है और बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे तक के लिए विधानसभा की कार्यवाही स्थगित की जाती है। दिन भर के घटनाक्रम के बाद यह साफ हो गया कि गुरु तेग बहादुर के कथित अपमान का मुद्दा विधानसभा में बड़ा राजनीतिक टकराव बन गया है। तीसरे दिन एक मिनट भी कार्यवाही न चल पाने से शीतकालीन सत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

दिल्ली कैबिनेट ने आतिशी की सदस्यता रद्द करने और मुकदमा चलाने की मांग की
दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। दिल्ली कैबिनेट ने नेता विपक्ष आतिशी की विधानसभा सदस्यता रद्द करने, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने और दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में मंत्रियों ने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को औपचारिक पत्र सौंपा है। सरकार का आरोप है कि सदन के भीतर इस्तेमाल की गई भाषा न सिर्फ असंसदीय थी, बल्कि सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली भी थी।

दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल ने बुधवार मीडिया को जानकारी दी कि विधानसभा अध्यक्ष को लिखित रूप से तीन साफ मांगें रखी गई हैं। इसमें नेता विपक्ष आतिशी की सदस्यता तत्काल रद्द करने के साथ उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने की मांग है। इसके अलावा विधान सभा अध्यक्ष अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सख्त दंडात्मक कार्रवाई करें। यह पत्र मंत्री प्रवेश वर्मा, पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा, मंत्री कपिल मिश्रा, मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह और मुख्य सचेतक अभय वर्मा की ओर से सौंपा गया है।

नेता प्रतिपक्ष की भाषा अस्वीकार्य
मीडिया से बात करते हुए मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर की शहादत पर नियम 270 के तहत चल रही विशेष चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष द्वारा जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, जो व्यक्ति विधानसभा के पटल से गुरु तेग बहादुर का अपमान करता है, उसका स्थान सदन में नहीं हो सकता। सिरसा ने दो टूक कहा कि ऐसे लोगों के लिए विधानसभा नहीं, बल्कि जेल ही उचित जगह है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर सिख समाज में भारी आक्रोश है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) और कई सिख संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनके मुताबिक, यह मुद्दा सिर्फ दिल्ली या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में सिख समुदाय और आम लोगों के बीच गहरी नाराजगी है।

नेता प्रतिपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना - सिरसा
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना रहा है। एक दिन पहले आतिशी ने बार-बार प्रदूषण पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन जिस दिन प्रदूषण पर विधिवत चर्चा रखी गई, उस दिन वे सदन में मौजूद नहीं थीं। सिरसा ने कहा कि यह अनुपस्थिति इस बात का संकेत है कि उन्हें अपने कृत्य की गंभीरता और उसके सार्वजनिक असर का अंदाजा था। उन्होंने परंपरा और संसदीय मर्यादा का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे अहम विषयों पर चर्चा के दौरान सदन के नेता और नेता प्रतिपक्ष दोनों का मौजूद रहना जरूरी होता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री प्रवेश वर्मा, कपिल मिश्रा भी मौजूद रहे। सरकार की ओर से साफ संकेत दिए गए हैं कि इस मामले में पीछे हटने का सवाल नहीं है और विधानसभा अध्यक्ष से कड़ी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

मार्शल आउट विधायकों पर रहा पहरा, विधानसभा के बाहर बैरीकेडिंग
दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मार्शल आउट किए गए आम आदमी पार्टी के विधायकों को सदन से दूर रखने के लिए सख्त इंतजाम किए गए। बुधवार को विधानसभा परिसर में इन विधायकों की मौजूदगी की आशंका के चलते मुख्य द्वार पर भारी सुरक्षा और दो लेयर की बैरीकेडिंग की गई।

आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा, सोमदत्त, कुलदीप कुमार और जरनैल सिंह को शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन उपराज्यपाल के अभिभाषण के दौरान व्यवधान डालने के आरोप में तीन दिन के लिए मार्शल आउट किया गया था। बुधवार को ये विधायक विधानसभा पहुंचने की कोशिश में नजर आए, लेकिन उन्हें सदन में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इन्हें रोकने के लिए सुबह से ही विधानसभा के मुख्य द्वार पर दो स्तर की बैरीकेडिंग की गई थी और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहे। विधायकों ने विधानसभा के बाहर सरकार के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन किया। माना जा रहा है कि ये विधायक अपने पार्टी सहयोगियों का हौसला बढ़ाने के लिए विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन सख्त सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें बाहर ही रोका गया। बृहस्पतिवार को ये सदन का हिस्सा बन पाएंगे।

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