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दिल्ली पीजी हादसा: अर्पित और अभिषेक की आंखें देखेंगी दुनिया; असहनीय पीड़ा के बावजूद नेत्र दान कर बांटा उजाला
Tue, 08 Sep 2026 03:58 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 08 Sep 2026 03:58 PM IST
सार
दिल्ली के हॉस्टल डेज पीजी हादसे में मृतकों की संख्या सात पहुंच गई है। दो और घायलों ने दम तोड़ दिया। करीब 27 घंटे तक मलबा हटाने के बाद सोमवार शाम बचाव अभियान पूरा हो गया। वहीं, पीजी हादसे में जान गंवाने वाले अर्पित और अभिषेक की आंखें दुनिया देखेंगी। दोनों के परिजनों ने आंखें दान कर दी हैं।
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अर्पित और अभिषेक की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए एक पीजी हादसे में जान गंवाने वाले दो छात्रों की आंखें दान की गई हैं। मध्यप्रदेश के देवास के अर्पित जाज और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के अभिषेक के परिजनों ने यह फैसला लिया। इस दुखद घड़ी में भी परिवारों ने दूसरों की दुनिया रोशन करने का हौसला दिखाया।
असहनीय पीड़ा के बावजूद ऐसा हौसला बेटों की आंखें दान कर बांटा उजाला
सीए का सपना मलबे में दफन
आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम सेकंड ईयर के छात्र अर्पित मध्यप्रदेश के देवास के रहने वाले थे। जन्माष्टमी पर घर गए थे। रविवार सुबह 9 बजे पीजी लौटे थे। दोपहर 12 बजे मां को वीडियो कॉल किया। घंटे भर बाद ही हादसा हो गया।
जानकारी मिलते ही मां समेत परिवार दिल्ली पहुंच गया। एम्स पहुंचे, तो पता चला कि बेटा नहीं रहा। मां वहीं निढाल हो गई। बाद में परिवार ने खुद को संभाला और उसकी आंखें दान कर दीं। मां ने कहा, वह सीए बनना चाहता था। अब उसका सपना किसी और की आंखों में पलेगा। परिवार ने खुद को संभालते हुए अर्पित की आंखें दान करने का निर्णय लिया।
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असहनीय पीड़ा के बावजूद ऐसा हौसला बेटों की आंखें दान कर बांटा उजाला
सीए का सपना मलबे में दफन
आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम सेकंड ईयर के छात्र अर्पित मध्यप्रदेश के देवास के रहने वाले थे। जन्माष्टमी पर घर गए थे। रविवार सुबह 9 बजे पीजी लौटे थे। दोपहर 12 बजे मां को वीडियो कॉल किया। घंटे भर बाद ही हादसा हो गया।
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जानकारी मिलते ही मां समेत परिवार दिल्ली पहुंच गया। एम्स पहुंचे, तो पता चला कि बेटा नहीं रहा। मां वहीं निढाल हो गई। बाद में परिवार ने खुद को संभाला और उसकी आंखें दान कर दीं। मां ने कहा, वह सीए बनना चाहता था। अब उसका सपना किसी और की आंखों में पलेगा। परिवार ने खुद को संभालते हुए अर्पित की आंखें दान करने का निर्णय लिया।
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दूसरे की दुनिया रोशन करेगा बेटा
सोनभद्र के अभिषेक भी हादसे में जान गंवा बैठे। वह दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र थे। हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। हिंडाल्को में काम करने वाले पिता संतोष कुमार जब दिल्ली पहुंचे, तो आंसू रोक न सके। अभिषेक ने पहले ही नेत्रदान के लिए पंजीकरण करा रखा था। हादसे के बाद परिजनों की सहमति से उनकी आंखें दान कर दी गईं। पिता ने कहा, अब अभिषेक की आंखों से दूसरे की दुनिया रोशन होगी। अभिषेक परिवार में सबसे छोटे थे।
सोनभद्र के अभिषेक भी हादसे में जान गंवा बैठे। वह दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र थे। हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। हिंडाल्को में काम करने वाले पिता संतोष कुमार जब दिल्ली पहुंचे, तो आंसू रोक न सके। अभिषेक ने पहले ही नेत्रदान के लिए पंजीकरण करा रखा था। हादसे के बाद परिजनों की सहमति से उनकी आंखें दान कर दी गईं। पिता ने कहा, अब अभिषेक की आंखों से दूसरे की दुनिया रोशन होगी। अभिषेक परिवार में सबसे छोटे थे।
मृतकों में ये भी
यूपी... सोनभद्र के अभिषेक, औरैया के पवन (17), छत्तीसगढ़ के युवराज (20)। मप्र... देवास के अर्पित जाज (19) व कटनी के अक्षत सिंह यादव (18)। इनके अलावा मजदूर सुरिंदर सिंह (56) व परमलाल कोरी (30)।
यूपी... सोनभद्र के अभिषेक, औरैया के पवन (17), छत्तीसगढ़ के युवराज (20)। मप्र... देवास के अर्पित जाज (19) व कटनी के अक्षत सिंह यादव (18)। इनके अलावा मजदूर सुरिंदर सिंह (56) व परमलाल कोरी (30)।
हादसे वाले दिन सुबह आया था अर्पित
अर्पित रक्षाबंधन मनाकर शनिवार रात मध्य प्रदेश के देवास से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। हादसे वाले दिन सुबह करीब आठ बजे वह पीजी पहुंचा था। दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा अर्पित मध्य प्रदेश के देवास से बेहतर भविष्य का सपना लेकर दिल्ली आया था। अर्पित के चाचा अर्जुन ने बताया कि शनिवार रात परिवार ने उसे ट्रेन में बैठाया था। घर से निकलते समय मां ने उसे विदा किया था।
अर्पित रक्षाबंधन मनाकर शनिवार रात मध्य प्रदेश के देवास से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। हादसे वाले दिन सुबह करीब आठ बजे वह पीजी पहुंचा था। दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा अर्पित मध्य प्रदेश के देवास से बेहतर भविष्य का सपना लेकर दिल्ली आया था। अर्पित के चाचा अर्जुन ने बताया कि शनिवार रात परिवार ने उसे ट्रेन में बैठाया था। घर से निकलते समय मां ने उसे विदा किया था।
घर में किसी को अंदाजा नहीं था कि अगली बार अर्पित की खबर इस तरह आएगी। अर्पित अपनी बहन से छोटा और परिवार का इकलौता बेटा था। पढ़ाई पूरी कर कॅरिअर बनाने की उम्मीदें उसके साथ जुड़ी थीं। रक्षाबंधन पर बहन ने जिस भाई की कलाई पर राखी बांधी थी, वही भाई कुछ दिनों बाद परिवार से हमेशा के लिए दूर हो गया। मोर्चरी के बाहर अर्पित की मां की हालत देखकर वहां मौजूद दूसरे लोगों की आंखें भी नम हो गईं। अनजान लोग भी उनके दर्द में शामिल हो गए।
मौत के बाद भी दुनिया देखेंगे अभिषेक
दिल्ली में हुए हादसे में रेणुकूट निवासी बीकॉम छात्र अभिषेक कुमार की मौत हो गई। हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। घटना के बाद पिता दिल्ली के लिए रवाना हो गए। अभिषेक जाते-जाते दो लोगों की जिंदगी रोशन भी दे गए। उन्होंने पहले ही नेत्रदान के लिए पंजीकरण करा रखा था। हादसे के बाद परिजनों की सहमति से उसकी आंखें दान कर दी गईं। अब अभिषेक की आंखों से किसी दूसरे की दुनिया रोशन होगी।
दिल्ली में हुए हादसे में रेणुकूट निवासी बीकॉम छात्र अभिषेक कुमार की मौत हो गई। हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। घटना के बाद पिता दिल्ली के लिए रवाना हो गए। अभिषेक जाते-जाते दो लोगों की जिंदगी रोशन भी दे गए। उन्होंने पहले ही नेत्रदान के लिए पंजीकरण करा रखा था। हादसे के बाद परिजनों की सहमति से उसकी आंखें दान कर दी गईं। अब अभिषेक की आंखों से किसी दूसरे की दुनिया रोशन होगी।
मूल रूप से चंदौली के झांसी गांव निवासी संतोष कुमार के पुत्र अभिषेक दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र थे। वह रेणुकूट की हिंडाल्को कॉलोनी में अपने माता-पिता के साथ रहते थे। उनके पिता संतोष हिंडाल्को में कार्यरत हैं। अभिषेक परिवार में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई राजस्थान में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। इन दिनों उनकी मां गांव गई हुई थीं।
बेटे की मौत की खबर मिलते ही पिता दिल्ली के लिए रवाना हो गए। पिता के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद अभिषेक का पार्थिव शरीर वाराणसी लाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार होगा। इसके बाद आगे के विधि-विधान उसके मूल गांव चंदौली जिले के झांसी से किए जाएंगे। अभिषेक के पिता ने बताया कि बेटे ने पहले ही अपनी आंखें दान करने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी आंखों से किसी और की जिंदगी में रोशनी आएगी। दुख की इस घड़ी में यही परिवार के लिए संतोष की बात है।
यह था पूरा मामला
दिल्ली के हॉस्टल डेज पीजी हादसे में मृतकों की संख्या सात पहुंच गई है। दो और घायलों ने दम तोड़ दिया। करीब 27 घंटे तक मलबा हटाने के बाद सोमवार शाम बचाव अभियान पूरा हो गया। कुल 12 लोगों को निकाला गया है। इनमें से पांच छात्रों समेत सात की मौत हो गई। पांच घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें तीन गंभीर हैं।
दिल्ली के हॉस्टल डेज पीजी हादसे में मृतकों की संख्या सात पहुंच गई है। दो और घायलों ने दम तोड़ दिया। करीब 27 घंटे तक मलबा हटाने के बाद सोमवार शाम बचाव अभियान पूरा हो गया। कुल 12 लोगों को निकाला गया है। इनमें से पांच छात्रों समेत सात की मौत हो गई। पांच घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें तीन गंभीर हैं।
वहीं, पीजी के मालिक हरिराम गुप्ता को पत्नी व बेटे समेत गिरफ्तार कर लिया गया। इस बीच, मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हादसे के लिए सिर्फ पीजी मालिक को जिम्मेदार ठहराकर दिल्ली सरकार जवाबदेही से नहीं बच सकती। जिम्मेदारी डीयू व एमसीडी की भी है। कोर्ट ने एक पीआईएल पर एमसीडी को उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली सरकार ने पांच अफसरो को निलंबित कर दिया है।
भिवाड़ी से दबोचा, हरिराम दंपती को 14 दिन की न्यायिक हिरासत
दिल्ली पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम गुप्ता (81), पत्नी उर्मिला गुप्ता (75) और बेटे महेश गुप्ता (52) को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने हरिराम व उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पीजी का बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम पर था, जबकि बेटा उसका प्रबंधन देख रहा था। वहीं, संपत्ति की रजिस्ट्री उर्मिला के नाम पर है।
दिल्ली पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम गुप्ता (81), पत्नी उर्मिला गुप्ता (75) और बेटे महेश गुप्ता (52) को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने हरिराम व उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पीजी का बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम पर था, जबकि बेटा उसका प्रबंधन देख रहा था। वहीं, संपत्ति की रजिस्ट्री उर्मिला के नाम पर है।