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Delhi: तुर्कमान गेट पर चले बुलडोजर ने ताजा कीं 50 साल पुरानी यादें, जब आपातकाल के समय हटाया गया ट्रांजिट कैंप

विनोद डबास, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 08 Jan 2026 03:45 AM IST
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सार

वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान कांग्रेस नेता संजय गांधी के निर्देश पर तुर्कमान गेट से ट्रांजिट कैंप हटाने के नाम पर बड़े पैमाने पर बुलडोजर चलाया गया था।

Delhi: Bulldozers at Turkman Gate revive 50-year-old memories
दिल्ली में मस्जिद के पास बुलडोजर एक्शन - फोटो : एएनआई
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तुर्कमान गेट इलाके में 7 जनवरी 2026 की तड़के जैसे ही बुलडोजर आगे बढ़ा, वहां मौजूद लोगों के जेहन में 50 साल पुरानी यादें ताजा हो गईं। मामला अप्रैल 1976 से अलग था लेकिन भारी पुलिस बल, बैरिकेडिंग, प्रशासनिक सख्ती और बुलडोजर की आवाज सब कुछ वैसा ही नजर आया, जैसा आधी सदी पहले तुर्कमान गेट ने देखा था।

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वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान कांग्रेस नेता संजय गांधी के निर्देश पर तुर्कमान गेट से ट्रांजिट कैंप हटाने के नाम पर बड़े पैमाने पर बुलडोजर चलाया गया था। उस कार्रवाई में सैकड़ों झुग्गियां ढहा दी गई थीं। उस समय की तरह बुधवार को भी जगह-जगह पुलिस तैनात थी, रास्ते सील और आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई थी। हालांकि एमसीडी का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। उच्च न्यायालय के आदेश पर रामलीला मैदान की भूमि से अवैध कब्जे हटाए गए। इसके लिए पहले सर्वे कराया गया, नोटिस दिए गए और प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर भी दिया गया। वैध पट्टे वाली जमीन को नुकसान नहीं पहुंचाया गया और केवल अवैध व्यवसायिक गतिविधियों को हटाया गया।
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आधी रात के बाद एमसीडी की बड़ी कार्रवाई, भारी सुरक्षा के बीच हटाया अतिक्रमण
दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर एमसीडी ने बुधवार तड़के करीब दो बजे बाद तुर्कमान गेट इलाके में बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को अंजाम दिया। यहां पर दरगाह फैज ए इलाही मस्जिद के सामने सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए एमसीडी की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। एमसीडी अधिकारियों के अनुसार जिस भूमि से अतिक्रमण हटाया गया, वहां लंबे समय से गैरकानूनी तरीके से बारात घर संचालित किया जा रहा था। इसके अलावा उसी परिसर में एक अवैध डिस्पेंसरी भी खोली गई थी।

एमसीडी ने कार्रवाई से पहले नियमानुसार दो बार नोटिस जारी कर कब्जाधारियों को स्थान खाली करने के निर्देश दिए थे। उसने अंतिम नोटिस 22 दिसंबर को भेजते हुए 15 दिन में कब्जा हटाने का आदेश दिया था, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाया गया। इस कारण हाई कोर्ट के आदेश पर सख्त कदम उठाया गया। एमसीडी ने इस कार्रवाई को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया। पूरे इलाके को पांच सेक्टरों में बांटा गया था ताकि हर हिस्से पर अलग-अलग टीम काम कर सके। इन पांच सेक्टरों में एमसीडी के पांच जोनों की टीमें तैनात की गई। ऑपरेशन में लगभग 100 एमसीडी कर्मचारियों को सीधे तौर पर लगाया गया था, जबकि अतिरिक्त कर्मचारियों को बैकअप के तौर पर तैनात रखा गया था। 

तोड़फोड़ के लिए 32 जेसीबी मशीनें, दो पोकलेन मशीनें और छह गैस कटर लगाए गए थे। मलबा हटाने के लिए 50 डंपरों की व्यवस्था की गई। यहां मलबा हटाने का कार्य तेजी के साथ किया जा रहा है। एमसीडी के अनुसार, बृहस्पतिवार की शाम तक मलबा हटाने का कार्य पूरा होने की संभावना है। आपात स्थिति से निपटने के लिए मौके पर एंबुलेंस भी तैनात की गई। इसके साथ ही कर्मचारियों की सुविधा और लंबे समय तक चलने वाले ऑपरेशन को ध्यान में रखते हुए तोड़फोड़ स्थल पर ही अस्थायी शौचालय, पीने के पानी और चाय आदि की व्यवस्था की गई थी।

सूत्रों के अनुसार, पूरे ऑपरेशन को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। कुछ चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों को ही इसकी पूर्व जानकारी थी, ताकि किसी तरह की सूचना लीक न हो और विरोध या अवरोध की संभावना कम से कम रहे। कार्रवाई के दौरान एमसीडी और दिल्ली पुलिस के कई आला अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहे और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रहे।

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