रेलवे की बड़ी लापरवाही: दो यात्रियों को थमाया एक ही कंबल, उपभोक्ता आयोग ने लगाई फटकार; ठोका 25000 का जुर्माना
उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि रेलवे का यह कदम 23 सितंबर 2009 के रेलवे सर्कुलर का सीधा उल्लंघन है। इस नियम के तहत प्रत्येक यात्री को साफ और अलग बेडरोल देना अनिवार्य है, लेकिन रेलवे ने दो बिल्कुल अनजान यात्रियों को एक ही कंबल इस्तेमाल करने के लिए थमा दिया।
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ट्रेन के सफर के दौरान एक यात्री को किसी अनजान शख्स के साथ अपना कंबल साझा करने के लिए मजबूर करना भारतीय रेलवे को भारी पड़ गया है। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे 'सेवा में कमी' का स्पष्ट मामला मानते हुए रेलवे पर कड़ा रुख अपनाया है और उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
मुआवजा और जुर्माना
आयोग की अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव और सदस्य राजेंद्र धर व रितु गरोड़िया की पीठ ने 29 जुलाई को यह अहम आदेश पारित किया। पीठ ने रेलवे को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को यात्रा के दौरान हुए मानसिक उत्पीड़न और भारी असुविधा के लिए 20,000 रुपये का मुआवजा दे। इसके अतिरिक्त, कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में यात्री को 5,000 रुपये का भुगतान भी किया जाए।
नियमों का हुआ सीधा उल्लंघन
अपने आदेश में उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि रेलवे का यह कदम 23 सितंबर 2009 के रेलवे सर्कुलर का सीधा उल्लंघन है। इस नियम के तहत प्रत्येक यात्री को साफ और अलग बेडरोल देना अनिवार्य है, लेकिन रेलवे ने दो बिल्कुल अनजान यात्रियों को एक ही कंबल इस्तेमाल करने के लिए थमा दिया।
रेलवे ने छिपाई कार्रवाई की जानकारी
सुनवाई के दौरान आयोग ने रेलवे के रवैये पर भी गंभीर सवाल उठाए। आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रेलवे ने इस लापरवाही के बाद अपने लिनन (कंबल-चादर) ठेकेदार पर 1,000 रुपये की पेनल्टी तो लगा दी, लेकिन शिकायतकर्ता यात्री को न तो इस कार्रवाई की कोई जानकारी दी गई और न ही उसे कोई उचित मुआवजा दिया गया।
आयोग ने इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की कि जब रेलवे ने उपभोक्ता फोरम के समक्ष अपना आधिकारिक जवाब दाखिल किया, तो उसमें भी ठेकेदार पर लगाए गए इस 1,000 रुपये के जुर्माने की बात पूरी तरह से छिपा ली गई थी। यह फैसला रेल यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।