Delhi: 'हमले की बरसी के दिन संसद की सुरक्षा में सेंध लगाना महज इत्तेफाक नहीं', सुनवाई में अदालत ने दी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि संसद पर आतंकी हमले की बरसी के दिन 13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा में सेंध की घटना महज इत्तेफाक नहीं हो सकती है।
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस सुधा जैन की पीठ ने यह टिप्पणी सुरक्षा में सेंध मामले में तीन आरोपियों मनोरंजन डी, सागर शर्मा और ललित झा की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की। हालांकि, आरोपियों के वकील ने कहा कि दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध नहीं है क्योंकि इस मामले में आरोपी सिर्फ बेरोजगारी का विरोध कर रहे थे।
इस पर पीठ ने कहा, 13 दिसंबर इत्तेफाक नहीं हो सकता। आरोपियों की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा, उनमें गुस्सा था लेकिन मैं इस बात से सहमत हूं कि विरोध करने का सही तरीका नहीं था। अगर हम इतिहास देखें तो अंग्रेजों ने भी लोगों को अनिश्चितकाल के लिए जेल में बंद नहीं रखा था। ऐसे में आरोपियों को अनिश्चितकाल तक जेल में बंद रखना सही नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि अभी आरोप तय नहीं हुए हैं और आरोपी पढ़े-लिखे नौजवान हैं।
इनका पहले किसी आपराधिक मामले में लेना-देना नहीं रहा है। पुलिस के वकील ने कहा, अभियोजन ने ट्रायल कोर्ट के सामने आरोप पर दलीलें पूरी कर ली हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई फरवरी में तय की और पक्ष से गुलफिशा फातिमा के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखने के लिए कहा, जिन्हें हाल ही में यूएपीए के तहत 2020 के दिल्ली दंगों के एक मामले में जमानत मिली थी। तीनों आरोपियों ने दिसंबर 2024 में ट्रायल कोर्ट के उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। आरोपी नीलम आजाद और महेश कुमावत को जुलाई 2025 में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।