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Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने डीयू से मांगा जवाब, म्यांमार के शरणार्थी से पासपोर्ट अनिवार्यता पर पूछा तीखा सवाल

Fri, 10 Jul 2026 09:45 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Fri, 10 Jul 2026 09:45 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने डीयू से म्यांमार के एक शरणार्थी की याचिका पर जवाब तलब किया है। याचिका में विदेशी छात्रों के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए वैध विदेशी पासपोर्ट अनिवार्य करने के नियम को चुनौती दी गई है। अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

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delhi High Court seeks response from DU on mandatory passport requirement
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने म्यांमार के एक शरणार्थी की याचिका पर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से जवाब तलब किया है। याचिका में विदेशी छात्रों के स्नातक (अंडरग्रेजुएट) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए वैध विदेशी पासपोर्ट अनिवार्य करने के नियम को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने विश्वविद्यालय के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा, आप एक शरणार्थी से पासपोर्ट की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? अदालत ने डीयू को इस संबंध में निर्देश लेकर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

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याचिका संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) से मान्यता प्राप्त म्यांमार के शरणार्थी हेनरी हटू आंग लिन ने दायर की है। याचिका के अनुसार, वर्ष 2022 में म्यांमार में राजनीतिक हिंसा और उत्पीड़न के कारण हेनरी अपने परिवार के साथ भारत आ गए थे। वर्तमान में वे यूएनएचसीआर की सुरक्षा में भारत में रह रहे हैं। हेनरी ने अपनी स्कूली शिक्षा भारत में पूरी की और शैक्षणिक सत्र 2026-27 में डीयू के स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन किया। हालांकि, वैध पासपोर्ट जमा नहीं करने के कारण विश्वविद्यालय ने उनका आवेदन अधूरा मान लिया।

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याचिका में कहा गया है कि शरणार्थियों के लिए अपने देश की सरकार से पासपोर्ट बनवाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। ऐसे में पासपोर्ट की अनिवार्यता उनके शिक्षा के अधिकार में बाधा बन रही है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि उनकी पहचान और शैक्षणिक योग्यता भारतीय बोर्डों के दस्तावेजों और यूएनएचसीआर के रिकॉर्ड से पहले ही सत्यापित है। इसके बावजूद केवल पासपोर्ट के अभाव में प्रवेश से वंचित करना संविधान के समानता और गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है।

शरणार्थी पहचान पत्र को पासपोर्ट का विकल्प बनाने की मांग
हेनरी ने विश्वविद्यालय से अनुरोध किया कि उनके यूएनएचसीआर शरणार्थी पहचान पत्र को पासपोर्ट के स्थान पर स्वीकार किया जाए, लेकिन डीयू ने इसे मानने से इनकार कर दिया। याचिका में कहा गया है कि जब विश्वविद्यालय अपने नियमों में यूएनएचसीआर के दस्तावेजों को मान्यता देता है, तब पासपोर्ट की अलग से अनिवार्यता विरोधाभासी और मनमानी है।

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तिब्बती शरणार्थियों को छूट, म्यांमार के शरणार्थियों को क्यों नहीं?
याचिका में यह भी दलील दी गई है कि डीयू तिब्बती शरणार्थियों को वैकल्पिक दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश की अनुमति देता है, जबकि म्यांमार के शरणार्थियों को यह सुविधा नहीं मिल रही। याचिकाकर्ता के अनुसार, यह समान परिस्थितियों में अलग-अलग व्यवहार है, जो भेदभावपूर्ण और संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है।

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