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Delhi: सड़क हादसे में जान गई तो सिस्टम की विफलता बताकर नहीं टाला जा सकेगा, अब अफसर पर गिरेगी गाज
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 11 Feb 2026 02:28 AM IST
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सार
विभाग के ताजा आदेश में कहा गया है कि सड़क पर खुदाई, खुले गड्ढे या सुरक्षा मानकों की अनदेखी से यदि कोई हादसा होता है तो सीधे तौर पर संबंधित इंजीनियर और फील्ड अफसर जिम्मेदार माने जाएंगे।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
जनकपुरी में गड्ढे में गिरकर बाइक सवार की मौत के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने साफ कर दिया है कि अब सड़क हादसों को सिस्टम की विफलता बताकर नहीं टाला जाएगा। विभाग के ताजा आदेश में कहा गया है कि सड़क पर खुदाई, खुले गड्ढे या सुरक्षा मानकों की अनदेखी से यदि कोई हादसा होता है तो सीधे तौर पर संबंधित इंजीनियर और फील्ड अफसर जिम्मेदार माने जाएंगे।
पीडब्ल्यूडी ने सभी चालू और प्रस्तावित निर्माण व खुदाई कार्यों में दिन-रात बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टिव बोर्ड और ब्लिंकर लगाने को अनिवार्य कर दिया है। किसी भी हालत में सड़क का कोई हिस्सा बिना सुरक्षा के खुला छोड़ने पर रोक लगाई गई है। आदेश में कहा गया है कि लापरवाही पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने विशेष रूप से रात के समय निरीक्षण पर जोर दिया है। तीखे मोड़, चौराहे, बस स्टॉप, फ्लाईओवर, अंडरपास और दुर्घटना संभावित इलाकों में नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। स्ट्रीट लाइट्स में झिलमिलाहट, कम रोशनी या आंशिक खराबी को भी गंभीर मानते हुए तत्काल मरम्मत या अस्थायी रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
हादसा होने पर जिम्मेदारी होगी तय
विभाग ने नालों और ड्रेन के खुले या टूटे ढक्कनों को भी खतरा बताते हुए तुरंत बदलने या अस्थायी सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए हैं। पुल-पुलिया, रोड ओवर ब्रिज और अंडरपास पर लगे क्रैश बैरियर और रेलिंग की हालत की जांच कर उन्हें प्राथमिकता पर दुरुस्त करने को कहा गया है।
आदेश में चेतावनी दी गई है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी न केवल जन-जीवन के लिए खतरा है, बल्कि इससे विभाग की छवि धूमिल होती है और कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलता है। भविष्य में किसी भी दुर्घटना या असुरक्षित स्थिति पर जिम्मेदारी तय होगी और दोषियों पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटा जाएगा।
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पीडब्ल्यूडी ने सभी चालू और प्रस्तावित निर्माण व खुदाई कार्यों में दिन-रात बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टिव बोर्ड और ब्लिंकर लगाने को अनिवार्य कर दिया है। किसी भी हालत में सड़क का कोई हिस्सा बिना सुरक्षा के खुला छोड़ने पर रोक लगाई गई है। आदेश में कहा गया है कि लापरवाही पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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विभाग ने विशेष रूप से रात के समय निरीक्षण पर जोर दिया है। तीखे मोड़, चौराहे, बस स्टॉप, फ्लाईओवर, अंडरपास और दुर्घटना संभावित इलाकों में नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। स्ट्रीट लाइट्स में झिलमिलाहट, कम रोशनी या आंशिक खराबी को भी गंभीर मानते हुए तत्काल मरम्मत या अस्थायी रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
हादसा होने पर जिम्मेदारी होगी तय
विभाग ने नालों और ड्रेन के खुले या टूटे ढक्कनों को भी खतरा बताते हुए तुरंत बदलने या अस्थायी सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए हैं। पुल-पुलिया, रोड ओवर ब्रिज और अंडरपास पर लगे क्रैश बैरियर और रेलिंग की हालत की जांच कर उन्हें प्राथमिकता पर दुरुस्त करने को कहा गया है।
आदेश में चेतावनी दी गई है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी न केवल जन-जीवन के लिए खतरा है, बल्कि इससे विभाग की छवि धूमिल होती है और कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलता है। भविष्य में किसी भी दुर्घटना या असुरक्षित स्थिति पर जिम्मेदारी तय होगी और दोषियों पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटा जाएगा।